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Fatehpur News: जिले में दोबारा विवेचना से हरियाणा में तेल माफिया की खुली कुंडली
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फतेहपुर। बरौनी-मथुरा इंडियन ऑयल की पाइप लाइन तोड़कर तेल चोरी के मलवां थाने में दर्ज मामलों में दोबारा नाम प्रकाश में लाने से माफिया की हरियाणा में चार साल से बंद कुंडली फिर खुली है। हरियाणा के रेवाड़ी जिले के रामपुरा थाने में दर्ज मुकदमे में दोबारा तेल माफिया का नाम प्रकाश में लाया गया है। मुकदमे में वारंट-बी के तहत रेवाड़ी कोर्ट में बुधवार को माफिया की पेशी हुई।
मलवां थाने में तेल चोरी की 2019 में दो मुकदमे दर्ज हुए थे। मामलों में मथुरा जिला फरह थाना क्षेत्र के बेरी निवासी मनोज कुमार अग्रवाल को आरोपी बनाया गया था। आरोपी पर हत्या, तेल चोरी समेत कई धाराओं के 53 मुकदमे हैं। पुलिस ने उसे तेल माफिया घोषित कर रखा है। विवेचना दौरान 2019 के मुकदमों में माफिया को पुलिस ने क्लीन चिट दी थी। शासन के आदेश पर मई 2023 माफिया को विवेचना से बाहर निकाले जाने की दोबारा जांच शुरू हुई। जांच में पुलिस ने माफिया को फिर दोनों मुकदमों के साथ गैंगस्टर में शामिल किया। मथुरा से उसे गिरफ्तार कर तीन दिसंबर को जेल भेजा। इसका पता हरियाणा के रेवाड़ी जिला रामपुरा थाने की पुलिस को लगा।
रामपुरा थाना क्षेत्र में भी पाइप लाइन तोड़कर 2019 में चोरी हुई थी। चोरी में माफिया मनोज गैंग के साथी मैनपुरी जिला निवासी शैलू सिंह, पंकज, रवी उर्फ रबिया पकड़े गए थे। उनके बयान पर रामपुरा पुलिस ने मनोज अग्रवाल को वांछित किया था। यहीं तीनों मलवां थाना क्षेत्र की चोरी में भी पकड़े गए थे। यहां भी पुलिस ने तीनों के बयान पर ही मनोज को प्रकाश में लाई थी।
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जांच के खेल में पुलिस ने मनोज को जेल जाने के बाद विवेचना में यहां के मुकदमों में क्लीन चिट दी थी। यहां से विवेचना में हटाए जाने का आधार सही मानकर रामपुरा पुलिस ने भी माफिया को मुकदमे से बाहर कर दिया था। दोबारा शुरू जांच में जिन साक्ष्यों के आधार पर मनोज को आरोपी बनाया गया। उन्हीं साक्ष्यों पर मनोज को रामपुरा पुलिस ने 2019 के मुकदमे में आरोपी बनाया है। रेवाड़ी जिला कोर्ट से वारंट बी जारी कराने के बाद जिला पुलिस को भेजा। रेवाड़ी कोर्ट में 20 दिसंबर को पुलिस ने मनोज को पेश किया। पेशी के बाद गुरुवार को जिला कारागार में पहुंचाया गया। पुलिस लाइन से माफिया को सुरक्षित ले जाने के लिए 11 पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगी।
मलवां थाने में 2019 में दर्ज तेल चोरी के मुकदमों की विवेचना तत्कालीन बिंदकी कोतवाली प्रभारी रवींद्र श्रीवास्तव को मिली थी। विवेचना दौरान माफिया मनोज ने बयान में बताया कि वह घटना की रात मथुरा के गोवर्धन निवासी विष्णु गुर्जर के यहां रात्रि जागरण में था। उसने विष्णु गुर्जर का आधार कार्ड कहीं से लेकर विवेचक को सौंपा। विवेचक ने उसी आधार मुकदमे से मनोज को विलोप कर दिया। दोबारा विवेचना में सीओ प्रगति यादव ने विष्णु गुर्जर के बयान दर्ज कराए। विष्णु गुर्जर ने बयान में बताया कि उससे कभी मनोज के संंबंध में पूछताछ तक नहीं की। कई साल पहले मनोज गनर के तौर पर उनके पास रहता था। उन्होंने कोई आधार कार्ड तक नहीं दिया और न ही उनके घर में घटना की रात्रि जागरण हुआ था। इससे तत्कालीन विवेचक और माफिया की जुगलबंदी साफ हो गई।
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मलवां थाने में तेल चोरी की 2019 में दो मुकदमे दर्ज हुए थे। मामलों में मथुरा जिला फरह थाना क्षेत्र के बेरी निवासी मनोज कुमार अग्रवाल को आरोपी बनाया गया था। आरोपी पर हत्या, तेल चोरी समेत कई धाराओं के 53 मुकदमे हैं। पुलिस ने उसे तेल माफिया घोषित कर रखा है। विवेचना दौरान 2019 के मुकदमों में माफिया को पुलिस ने क्लीन चिट दी थी। शासन के आदेश पर मई 2023 माफिया को विवेचना से बाहर निकाले जाने की दोबारा जांच शुरू हुई। जांच में पुलिस ने माफिया को फिर दोनों मुकदमों के साथ गैंगस्टर में शामिल किया। मथुरा से उसे गिरफ्तार कर तीन दिसंबर को जेल भेजा। इसका पता हरियाणा के रेवाड़ी जिला रामपुरा थाने की पुलिस को लगा।
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रामपुरा थाना क्षेत्र में भी पाइप लाइन तोड़कर 2019 में चोरी हुई थी। चोरी में माफिया मनोज गैंग के साथी मैनपुरी जिला निवासी शैलू सिंह, पंकज, रवी उर्फ रबिया पकड़े गए थे। उनके बयान पर रामपुरा पुलिस ने मनोज अग्रवाल को वांछित किया था। यहीं तीनों मलवां थाना क्षेत्र की चोरी में भी पकड़े गए थे। यहां भी पुलिस ने तीनों के बयान पर ही मनोज को प्रकाश में लाई थी।
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जांच के खेल में पुलिस ने मनोज को जेल जाने के बाद विवेचना में यहां के मुकदमों में क्लीन चिट दी थी। यहां से विवेचना में हटाए जाने का आधार सही मानकर रामपुरा पुलिस ने भी माफिया को मुकदमे से बाहर कर दिया था। दोबारा शुरू जांच में जिन साक्ष्यों के आधार पर मनोज को आरोपी बनाया गया। उन्हीं साक्ष्यों पर मनोज को रामपुरा पुलिस ने 2019 के मुकदमे में आरोपी बनाया है। रेवाड़ी जिला कोर्ट से वारंट बी जारी कराने के बाद जिला पुलिस को भेजा। रेवाड़ी कोर्ट में 20 दिसंबर को पुलिस ने मनोज को पेश किया। पेशी के बाद गुरुवार को जिला कारागार में पहुंचाया गया। पुलिस लाइन से माफिया को सुरक्षित ले जाने के लिए 11 पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगी।
मलवां थाने में 2019 में दर्ज तेल चोरी के मुकदमों की विवेचना तत्कालीन बिंदकी कोतवाली प्रभारी रवींद्र श्रीवास्तव को मिली थी। विवेचना दौरान माफिया मनोज ने बयान में बताया कि वह घटना की रात मथुरा के गोवर्धन निवासी विष्णु गुर्जर के यहां रात्रि जागरण में था। उसने विष्णु गुर्जर का आधार कार्ड कहीं से लेकर विवेचक को सौंपा। विवेचक ने उसी आधार मुकदमे से मनोज को विलोप कर दिया। दोबारा विवेचना में सीओ प्रगति यादव ने विष्णु गुर्जर के बयान दर्ज कराए। विष्णु गुर्जर ने बयान में बताया कि उससे कभी मनोज के संंबंध में पूछताछ तक नहीं की। कई साल पहले मनोज गनर के तौर पर उनके पास रहता था। उन्होंने कोई आधार कार्ड तक नहीं दिया और न ही उनके घर में घटना की रात्रि जागरण हुआ था। इससे तत्कालीन विवेचक और माफिया की जुगलबंदी साफ हो गई।