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Fatehpur News: आधी रात स्टेशन पर उतरे यात्रियों का सहारा बने टेंपो और ई-रिक्शा
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फोटो-04-रेलवे स्टेशन में मौजूद परदेस से लौटे लोगों की भीड़। संवाद
फतेहपुर। होली की खुशियां मनाने घर लौट रहे यात्रियों को आधी रात स्टेशन पर उतरने के बाद भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। ट्रेन से पहुंचने पर उन्हें गंतव्य तक जाने के लिए रोडवेज बसें नहीं मिल रहीं। नजदीकी गांवों के लोग ऑटो बुक कर या ई-रिक्शा का पूरा भाड़ा देकर किसी तरह घर पहुंच रहे हैं। 30 से 40 किलोमीटर दूर कस्बों और गांवों के यात्रियों को भोर होने तक इंतजार करना पड़ रहा है।
शनिवार रात करीब दो बजे एक ट्रेन से लगभग सौ यात्री स्टेशन पर उतरे। बाहर निकलने पर ई-रिक्शा और ऑटो के अलावा कोई साधन नहीं मिला। रोडवेज बस स्टैंड पहुंचे तो वहां सन्नाटा पसरा था। इन दिनों परिवहन निगम की बसों का संचालन कार्यशाला से हो रहा है लेकिन वहां भी कोई बस उपलब्ध नहीं थी।
नजदीकी गांव कोराईं, शहजादा सरांय, केवई समेत आसपास के क्षेत्रों में जाने वाले लोग किराए के ऑटो से रवाना हो गए। वहीं बिंदकी, खागा और अन्य दूरस्थ स्थानों की ओर जाने वाले यात्री रात भर परिवहन निगम कार्यशाला के बाहर बैठे रहे। सुबह बस सेवा शुरू होने पर ही वे अपने गंतव्य के लिए रवाना हो सके।
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ऑटो और ई-रिक्शा चालक वसूल रहे अधिक किराया
होली पर घर लौटने वाले लोगों को उनके गांवों तक पहुंचाने के लिए ऑटो और ई-रिक्शा चालक अधिक किराया वसूल रहे हैं। 10 किलोमीटर दूर तक के गांवों का 400 और 15 से 20 किमी गांवों का 600 से 700 रुपये किराया ले रहे हैं। मजबूरन कई यात्री एक साथ मिलकर ऑटो या ई-रिक्शा को बुक करते हुए अपने घरों तक पहुंच रहे हैं।
लोकल रूट पर लगी हैं 40 रोडवेज बसें
परिवहन निगम ने 107 रोडवेज बसों को दिल्ली, मथुरा, देवरिया, कानपुर-प्रयागराज समेत अन्य लंबी दूरी के रूटों पर लगाया है। 40 रोडवेज बसों के जरिये 10 से 50 किमी दूरी पर स्थित गांवों के यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है। आधी रात के समय परिवहन निगम के बस स्टैंड पर सन्नाटा रहता है। सुबह पांच बजे बसें लोकल रूटों पर रवाना हो रही हैं। इससे यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एआरएम एसपी सिंह का कहना है कि यात्रियों की संख्या कम होने पर सुबह बसें संचालित होती हैं। अगर भीड़ अधिक है तो रात को भी बसों को लोकल रूटों पर संचालित किया जा रहा है।
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शनिवार रात करीब दो बजे एक ट्रेन से लगभग सौ यात्री स्टेशन पर उतरे। बाहर निकलने पर ई-रिक्शा और ऑटो के अलावा कोई साधन नहीं मिला। रोडवेज बस स्टैंड पहुंचे तो वहां सन्नाटा पसरा था। इन दिनों परिवहन निगम की बसों का संचालन कार्यशाला से हो रहा है लेकिन वहां भी कोई बस उपलब्ध नहीं थी।
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नजदीकी गांव कोराईं, शहजादा सरांय, केवई समेत आसपास के क्षेत्रों में जाने वाले लोग किराए के ऑटो से रवाना हो गए। वहीं बिंदकी, खागा और अन्य दूरस्थ स्थानों की ओर जाने वाले यात्री रात भर परिवहन निगम कार्यशाला के बाहर बैठे रहे। सुबह बस सेवा शुरू होने पर ही वे अपने गंतव्य के लिए रवाना हो सके।
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ऑटो और ई-रिक्शा चालक वसूल रहे अधिक किराया
होली पर घर लौटने वाले लोगों को उनके गांवों तक पहुंचाने के लिए ऑटो और ई-रिक्शा चालक अधिक किराया वसूल रहे हैं। 10 किलोमीटर दूर तक के गांवों का 400 और 15 से 20 किमी गांवों का 600 से 700 रुपये किराया ले रहे हैं। मजबूरन कई यात्री एक साथ मिलकर ऑटो या ई-रिक्शा को बुक करते हुए अपने घरों तक पहुंच रहे हैं।
लोकल रूट पर लगी हैं 40 रोडवेज बसें
परिवहन निगम ने 107 रोडवेज बसों को दिल्ली, मथुरा, देवरिया, कानपुर-प्रयागराज समेत अन्य लंबी दूरी के रूटों पर लगाया है। 40 रोडवेज बसों के जरिये 10 से 50 किमी दूरी पर स्थित गांवों के यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है। आधी रात के समय परिवहन निगम के बस स्टैंड पर सन्नाटा रहता है। सुबह पांच बजे बसें लोकल रूटों पर रवाना हो रही हैं। इससे यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एआरएम एसपी सिंह का कहना है कि यात्रियों की संख्या कम होने पर सुबह बसें संचालित होती हैं। अगर भीड़ अधिक है तो रात को भी बसों को लोकल रूटों पर संचालित किया जा रहा है।

फोटो-04-रेलवे स्टेशन में मौजूद परदेस से लौटे लोगों की भीड़। संवाद