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धूप निकली, हाड़कंपाऊ ठंड से मिली राहत
ब्यूरो, अमर उजाला फतेहपुर
Updated Wed, 04 Jan 2017 12:05 AM IST
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असोथर क्षेत्र में हरीभरी गेहूं की फसल
- फोटो : Amar ujala
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हाड़कंपाऊ ठंड से मंगलवार को कुछ राहत मिल गई। चार दिन के बाद निकली धूप ने लोगों को खुश कर दिया। वृद्ध व महिलाएं छत में बैठ कर धूप सेंकते रहे। चटख धूप में ही नहाने व कपड़े धुलने का सिलसिला जारी रहा। सरकारी कर्मचारी भी दफ्तर से बाहर निकल कर धूप का मजा लेते रहे। शाम होते ही ठंड का अहसास फिर शुरू हो गया।
हफ्ताभर की कड़ाके की ठंड से आलू, मिर्चा की फसल रोग की चपेट में आ गई है। आलू की फसल में मुर्रा, झुलसा रोग लग गया है। फसलों में कीटनाशक दवा छिड़कने का भी असर नहीं हुआ। कड़ाके की ठंड से सब्जी के फसलों की हरियाली खत्म हो गई। उधर गलनभरी ठंड गेहूं की फसल में वरदान साबित हुई है। किसान सिंचाई के बाद यूरिया, जिंक का भी छिड़काव कर दिए हैं। खाद, जिंक का असर होते ही फसल हरीभरी दिखाई देने लगी है। हरसिंहपुर के किसान बबलू लोधी ने बताया कि दो बार आलू की फसल में दवा का छिड़काव कर चुके हैं। फिर भी रोग का असर दिखाई देने लगा है। आलू के पौध की पत्तियां पीली पड़ गई हैं। पौध भी सूखने लगे हैं। इससे आलू की कम पैदावार होने की संभावना है। चंद्रशेखर आजाद कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि सब्जी की फसलों में पाला से रोग लग जाता है। इसके बचाव के लिए किसान पहले से दवा का छिड़काव कर दें। उधर चटख धूप से पशु-पक्षियों को भी राहत मिल गई है। दोपहर को धूप निकलते ही पशुपालक मवेशियों को जंगल छोड़ दिए।
शाम तक हरीघास चर कर पेट भरते रहे। महिलाएं पेड़ों से लकड़ी तोड़ कर इकट्ठा करते दिखाई दीं। शहर के ताबेश्वर मंदिर मुहल्ले की महिलाएं जेल के पीछे खड़े पेड़ से लकड़ी के गट्ठर बांध कर घर लाईं। ताकि आग जलाकर सुबह-शाम की ठंड से बचाव कर सकें।
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हफ्ताभर की कड़ाके की ठंड से आलू, मिर्चा की फसल रोग की चपेट में आ गई है। आलू की फसल में मुर्रा, झुलसा रोग लग गया है। फसलों में कीटनाशक दवा छिड़कने का भी असर नहीं हुआ। कड़ाके की ठंड से सब्जी के फसलों की हरियाली खत्म हो गई। उधर गलनभरी ठंड गेहूं की फसल में वरदान साबित हुई है। किसान सिंचाई के बाद यूरिया, जिंक का भी छिड़काव कर दिए हैं। खाद, जिंक का असर होते ही फसल हरीभरी दिखाई देने लगी है। हरसिंहपुर के किसान बबलू लोधी ने बताया कि दो बार आलू की फसल में दवा का छिड़काव कर चुके हैं। फिर भी रोग का असर दिखाई देने लगा है। आलू के पौध की पत्तियां पीली पड़ गई हैं। पौध भी सूखने लगे हैं। इससे आलू की कम पैदावार होने की संभावना है। चंद्रशेखर आजाद कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि सब्जी की फसलों में पाला से रोग लग जाता है। इसके बचाव के लिए किसान पहले से दवा का छिड़काव कर दें। उधर चटख धूप से पशु-पक्षियों को भी राहत मिल गई है। दोपहर को धूप निकलते ही पशुपालक मवेशियों को जंगल छोड़ दिए।
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शाम तक हरीघास चर कर पेट भरते रहे। महिलाएं पेड़ों से लकड़ी तोड़ कर इकट्ठा करते दिखाई दीं। शहर के ताबेश्वर मंदिर मुहल्ले की महिलाएं जेल के पीछे खड़े पेड़ से लकड़ी के गट्ठर बांध कर घर लाईं। ताकि आग जलाकर सुबह-शाम की ठंड से बचाव कर सकें।
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