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नीलम भदौरिया ने मेहनत और लगन से बदली पहरवापुर प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर
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नीलम भदोरिया। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
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बिंदकी। प्राथमिक विद्यालय पहरवापुर की प्रधानाचार्या नीलम ने अपनी मेहनत और लगन से विद्यालय को प्रदेश में तीसरा स्थान दिलाया है। विद्यालय का चमचमाता साफ सुथरा परिसर , विद्यालय की हरी-भरी बागवानी , दीवारों पर रंग बिरंगी कलाकृतियां, स्मार्ट क्लास के चलते विद्यालय को तीसरा स्थान मिला है।
मलवां विकासखंड के पहरवापुर प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाचार्या ने बताया कि उन्होंने विद्यालय को दो बार सन 2016 और सन 2019 में उत्कृष्ट विद्यालय का पुरस्कार भी दिलाया। वर्तमान समय में पहरवापुर प्राथमिक विद्यालय का प्रदेश में तीसरा स्थान है। वही नीलम भदौरिया को मुख्यमंत्री द्वारा सन 2017 में राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया था।
यह पुरस्कार पाने वाली जिले की पहली शिक्षक थी। इसके अलावा इन्हें नवाचार के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार, शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार, आईसीटी पुरस्कार 2018, इंटरनेशनल लीडरशिप अवार्ड भी मिला।
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इतना ही नहीं विद्यालय के कायाकल्प के लिए इन्होंने अपने निजी धन से विद्यालय में हैंड वाश यूनिट, छात्राओं के लिए शौचालय, विद्यालय में सीसीटीवी कैमरे भी लगवाए।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इस विद्यालय के बच्चों का लगातार 8 वर्षों तक मंडल में चयन हुआ। बालिका शिक्षा को लेकर उन्होंने विशेष कदम उठाए जिससे गांव की हर बच्ची को शिक्षित किया जा सके।
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मलवां विकासखंड के पहरवापुर प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाचार्या ने बताया कि उन्होंने विद्यालय को दो बार सन 2016 और सन 2019 में उत्कृष्ट विद्यालय का पुरस्कार भी दिलाया। वर्तमान समय में पहरवापुर प्राथमिक विद्यालय का प्रदेश में तीसरा स्थान है। वही नीलम भदौरिया को मुख्यमंत्री द्वारा सन 2017 में राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया था।
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यह पुरस्कार पाने वाली जिले की पहली शिक्षक थी। इसके अलावा इन्हें नवाचार के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार, शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार, आईसीटी पुरस्कार 2018, इंटरनेशनल लीडरशिप अवार्ड भी मिला।
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इतना ही नहीं विद्यालय के कायाकल्प के लिए इन्होंने अपने निजी धन से विद्यालय में हैंड वाश यूनिट, छात्राओं के लिए शौचालय, विद्यालय में सीसीटीवी कैमरे भी लगवाए।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इस विद्यालय के बच्चों का लगातार 8 वर्षों तक मंडल में चयन हुआ। बालिका शिक्षा को लेकर उन्होंने विशेष कदम उठाए जिससे गांव की हर बच्ची को शिक्षित किया जा सके।