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Fatehpur News: प्याज-लहसुन की महंगाई से रसोई का बजट बिगड़ा
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फतेहपुर। प्याज और लहसुन के बढ़ते दामों ने गृहणियों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। प्याज 60 रुपये और लहसुन 160 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रहा है। प्याज के थोक और फुटकर भाव में भी करीब 20 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर है।
महंगाई से राहत मध्य वर्ग के लिए किसी सपने से कम नहीं रह गई है। एक सप्ताह पहले तक 50 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाला प्याज सोमवार को 60 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया। थोक बाजार में लहसुन 120 से 130 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है।
फुटकर बाजार में इसकी कीमत 150 से 160 रुपये प्रति किलोग्राम है। थोक व्यवसायी शमीम वारसी ने बताया कि मौजूदा समय में प्याज की आवक काफी कम है। प्याज इंदौर और कानपुर की मंडी से आ रही है।
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मंडी शुल्क के साथ भाड़ा आदि का खर्च भी बढ़ जाता है। मंडी में प्याज 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। वहीं लहसुन के दाम 12000 से 13500 रुपये प्रति क्विंटल हैं। सब्जी के फुटकर विक्रेता मोहम्मद आसिफ ने बताया कि प्याज का थोक भाव कम होने के बावजूद फुटकर में कीमत नहीं बढ़ाने पर नुकसान उठाना पड़ता है।
50 किलो की बोरी में करीब पांच किलो तक प्याज खराब निकल जाती है। इसके अलावा छोटा और बड़ा प्याज अलग करने के बाद उन्हें अलग-अलग दाम पर बेचना पड़ता है। ऐसे में बिक्री में लाभ दिखाई देता है लेकिन वास्तविकता में मुनाफा नहीं बचता। लहसुन की स्थिति भी ऐसी ही है।
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महंगाई से राहत मध्य वर्ग के लिए किसी सपने से कम नहीं रह गई है। एक सप्ताह पहले तक 50 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाला प्याज सोमवार को 60 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया। थोक बाजार में लहसुन 120 से 130 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है।
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फुटकर बाजार में इसकी कीमत 150 से 160 रुपये प्रति किलोग्राम है। थोक व्यवसायी शमीम वारसी ने बताया कि मौजूदा समय में प्याज की आवक काफी कम है। प्याज इंदौर और कानपुर की मंडी से आ रही है।
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मंडी शुल्क के साथ भाड़ा आदि का खर्च भी बढ़ जाता है। मंडी में प्याज 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। वहीं लहसुन के दाम 12000 से 13500 रुपये प्रति क्विंटल हैं। सब्जी के फुटकर विक्रेता मोहम्मद आसिफ ने बताया कि प्याज का थोक भाव कम होने के बावजूद फुटकर में कीमत नहीं बढ़ाने पर नुकसान उठाना पड़ता है।
50 किलो की बोरी में करीब पांच किलो तक प्याज खराब निकल जाती है। इसके अलावा छोटा और बड़ा प्याज अलग करने के बाद उन्हें अलग-अलग दाम पर बेचना पड़ता है। ऐसे में बिक्री में लाभ दिखाई देता है लेकिन वास्तविकता में मुनाफा नहीं बचता। लहसुन की स्थिति भी ऐसी ही है।