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25 साल बाद अनुसूचित जाति का ब्लाक प्रमुख

Fri, 05 Mar 2021 12:08 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 05 Mar 2021 12:08 AM IST
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पंचायती राज कार्यालय में आरक्षण सम्बंधी सुनवाई करते पटल प्रभारी। संवाद - फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अनंतिम आरक्षण आते ही असंतुष्ट लोगों की आपत्तियां आना शुरू हो गई हैं।
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अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए लोग ब्लाकों में न पहुंचकर सीधे जनपद मुख्यालय में अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं।
गुरुवार को आम ग्रामीणों से लेकर पंचायतों के नेता पंचायतीराज कार्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे।
जहां सभी ने अपने-अपने आंकड़ों के साथ आरक्षण पर आपत्ति दर्ज कराई। दिन भर में जिला पंचायत सदस्यों के आरक्षण पर 7, क्षेत्र पंचायत सदस्यों पर 4 और ग्राम प्रधानों के आरक्षण पर 96 सीटों पर आपत्तियां आईं।
पंचायतीराज कार्यालय में दिन भर शिकायतें दर्ज कराने वालों का तांता लगा रहा। डीपीआरओ अजय आनंद सरोज ने बताया कि समस्त शिकायतों का निस्तारण 12 मार्च शुक्रवार तक कर दिया जाएगा।
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इसके बाद आरक्षण की अंतिम सूची जिलाधिकारी स्तर से जारी होगी। चुनाव उसी के आधार पर कराए जाएंगे।
25 साल बाद चुना जाएगा अनुसूचित जाति का ब्लाक प्रमुख
पच्चीस साल बाद हसवा ब्लाक प्रमुख की कुर्सी पर अनुसूचित जाति का व्यक्ति बैठेगा। ऐसे में ब्लाक की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले दिग्गज अपने मुखौटे वाले अनुसूचित जाति के व्यक्ति की तलाश में जुट गए हैं।
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1995 हसवा ब्लाक प्रमुख की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई थी। इसमें हसवा के राकेश पासवान विजयी हुए थे। उप ब्लाक प्रमुख चंद्रशेखर तोमर रहे।
लोगों का कहना है कि चंद्रशेखर पूरे पांच साल तक हावी रहे। 2001 में सपा नेता इंद्रसेन यादव की पत्नी आशा यादव चुनावी मैदान में उतरीं और अपने प्रतिद्वंदी नरेंद्र मुंशी को हराकर कुर्सी पर कब्जा जमाया था।
उस दौरान 72 बीडीसी सदस्य थे। जिसमें 52 मत आशा यादव को मिले थे। 2005 में सीट अनारक्षित रही। इस बार सपा नेता इंद्रसेन यादव चुनावी मैदान में आए।
इनके सामने पूर्व ब्लाक प्रमुख बरदानी सिंह के बेटे बुद्ध राज सिंह रहे। उस समय 88 बीडीसी सदस्य थे।
इसमें इंद्रसेन यादव को 52 मत मिले थे। 2010 में फिर से महिला के लिए सीट आरक्षित रही। इसमें आशा यादव ने पर्चा दाखिल किया।
इनके सामने एक डमी प्रत्याशी उतारा। इस बार आशा यादव 88 मतों के सापेक्ष 84 मत पाकर विजयी रहीं।
लगातार 15 साल तक इंद्रसेन यादव का परिवार ब्लाक प्रमुख के पद पर काबिज रहा। 2015 में सीट अनारक्षित होने पर पूर्व विधायक आनंद लोधी के भाई अमित लोधी और इंद्रसेन यादव आमने सामने रहे। लेकिन इस बार अमित लोधी ब्लाक प्रमुख बने। अमित लोधी के निधन के बाद पूर्व विधायक आनंद लोधी के बेटे अक्षय लोधी ब्लाक प्रमुख बने।

विधायक के बेटे की होगी एंट्री
हसवा। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हसवा ब्लाक प्रमुख की सीट पर जिले के एक विधायक के बेटे की इंट्री की चर्चा जोरों पर है। लोगों का कहना है कि इंद्रसेन यादव व अक्षय लोधी भी अपना प्रत्याशी उतारेंगे। विधायक के बेटे के चुनाव में आने से चुनाव दिलचस्प होगा।
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