फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Fatehpur News ›   positive news,fatehpur news,kadaknath

मुर्गी पालकों की कड़की दूर कर रहा ‘कड़कनाथ’

Fri, 24 Sep 2021 12:41 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 24 Sep 2021 12:41 AM IST
विज्ञापन
positive news,fatehpur news,kadaknath
औंग। कम लागत से बड़ी आमदनी कैसे कमाई जा सकती है, इसका जीता जागता उदाहरण औंग का खदरा और करचलपुर गांव है। भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर के सहयोग से यहां के लोगों ने फरवरी माह में कड़कनाथ प्रजाति के मुर्गी और मुर्गे का पालन शुरू किया।
विज्ञापन

आज हर पालक रोजाना करीब 1200 और महीने में 36000 रुपये की कमाई सिर्फ अंडे बेच कर रहा है। विशेष गुण के कारण इसकी न सिर्फ मांग ज्यादा है बल्कि कीमत भी अधिक हैं। मुर्गा भी ज्यादा दामों पर बिकता है।
विज्ञापन

भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर ने फरवरी माह में औंग के खदरा गांव के जगदीश पासवान, अंबिका पासवान, कैलाश पासवान, राहुल पटेल और करचलपुर गांव के नारायण सिंह को कड़कनाथ प्रजाति के चूजे दिए थे। जो अब वयस्क हो चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस प्रजाति की मुर्गी की खासियत है कि यह आठ माह तक लगातार रोजाना एक अंडा देती है। इसका एक अंडा बाजार में 15 रुपये का बिकता है। इन पालकों में प्रत्येक के पास करीब 80-80 मुर्गियां हैं। यानी इन लोगों को रोजाना 80 अंडे मिल रहे हैं। जो बाजार में करीब 1200 रुपये के बिक रहे
है। इस हिसाब से इन पालकों को हर माह करीब 36000 की आय अगले आठ माह तक होती रहेगी। ठंड के सीजन में इन अंडों के दाम और बढ़ेंगे। इसी तरह, कड़कनाथ मुर्गा भी आम मुर्गों से कहीं ज्यादा दामों पर बिकता है। इसकी कीमत करीब दो हजार प्रति मुर्गा तक अभी है। सर्दी के मौसम में यह तीन हजार के भी पार हो जाता है। इन पालकों को देखकर अब कई और लोग भी इस प्रजाति की मुर्गी के पालन के लिए आगे आ रहे हैं।
गुरुवार को भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजेश कुमार भी खदरा गांव पहुंचे और पालकों से इस विषय में जानकारी ली। मुर्गे-मुर्गियों का परीक्षण किया। देखा कि कहीं किसी को कोई बीमारी तो नहीं है। इनके खानपान और होने वाली आमदनी के बारे में भी जानकारी ली।

इन खासियतों के कारण है अधिक मांग
कड़कनाथ मुर्गा मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य झाबर क्षेत्र में पाया जाता है। इसकी चोंच से लेकर टांगे, नाखून, मांस और जुबान तक काली होती है। चटक काले रंग का मुर्गा कम फैट वाला होता है। माना जाता है इसमें औषधीय गुण होते हैं। भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के अधिकारी चूजे भी झाबर से ही लाए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed