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किसान मान रहे दैवी आपदा में शत-प्रतिशत फसल हुई बर्बाद
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फतेहपुर। बारिश और ओलावृष्टि वाले क्षेत्रों में गेहूं, राई, सरसों, चना मटर की फसल का शत प्रतिशत नुकसान हुआ है, जबकि प्रशासन ने गेहूं का 50 से 55 प्रतिशत व राई-सरसों में 65 से 70 प्रतिशत अनुमानित नुकसान दिखाया है। सर्वे रिपोर्ट को लेकर पीड़ित किसानों ने विरोध जताया है। किसानों का कहना है कि उनकी पूरे सीजन की फसल बर्बाद हो गई। आरोप लगाया कि बिना देखे ही रिपोर्ट बनाकर भेजी जा रही है। किसानों का कहना है कि कथित रिपोर्ट के आधार पर नुकसान का सही आकलन व भरपाई संभव ही नहीं है।
एक सप्ताह पहले बिंदकी तहसील में आंधी के साथ तेज बारिश और ओलावृष्टि हुई। इससे अमौली, देवमई, खजुहा और मलवां ब्लाक की फसलऊों में ज्यादा तबाही हुई है। तहसील स्तर पर बनाई गई रिपोर्ट में मात्र 61 गांव की फसलें प्रभावित दिखाई गई हैं। वहीं किसानों का कहना है कि दैवी आपदा से राई-सरसों की फसलों का शत प्रतिशत नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल में 80 फीसदी से अधिक और चना की फसल में 75 फीसदी नुकसान
हुआ है। आंधी और ओलावृष्टि से फसलों में दाना नहीं बचा है। सिर्फ फसल का डंठल खड़ा है। गेहूं की फसल में मवेशियों से लिए बनने वाला भूसा भी नष्ट हो गया है। अब किसानों को पालतू मवेशियों का पेट भरना भी मुश्किल होगा। ऐसे में प्रशासन की ओर से तैयार हो रही रिपोर्ट सही नहीं मानी जा सकती।
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बिंदकी एसडीएम प्रह्लाद सिंह का कहना है कि ओलावृष्टि से बर्बाद फसलों की रिपोर्ट बनाने के लिए लेखपालों को लगाया गया है। उनको निर्देश दिया गया है कि किसानों के खेत में जाकर पड़ताल करें। कोई लेखपाल बिना निरीक्षण के रिपोर्ट बनाता है और उसकी शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। अभी तक कहीं से ऐसी शिकायत नहीं आई है।
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एक सप्ताह पहले बिंदकी तहसील में आंधी के साथ तेज बारिश और ओलावृष्टि हुई। इससे अमौली, देवमई, खजुहा और मलवां ब्लाक की फसलऊों में ज्यादा तबाही हुई है। तहसील स्तर पर बनाई गई रिपोर्ट में मात्र 61 गांव की फसलें प्रभावित दिखाई गई हैं। वहीं किसानों का कहना है कि दैवी आपदा से राई-सरसों की फसलों का शत प्रतिशत नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल में 80 फीसदी से अधिक और चना की फसल में 75 फीसदी नुकसान
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हुआ है। आंधी और ओलावृष्टि से फसलों में दाना नहीं बचा है। सिर्फ फसल का डंठल खड़ा है। गेहूं की फसल में मवेशियों से लिए बनने वाला भूसा भी नष्ट हो गया है। अब किसानों को पालतू मवेशियों का पेट भरना भी मुश्किल होगा। ऐसे में प्रशासन की ओर से तैयार हो रही रिपोर्ट सही नहीं मानी जा सकती।
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बिंदकी एसडीएम प्रह्लाद सिंह का कहना है कि ओलावृष्टि से बर्बाद फसलों की रिपोर्ट बनाने के लिए लेखपालों को लगाया गया है। उनको निर्देश दिया गया है कि किसानों के खेत में जाकर पड़ताल करें। कोई लेखपाल बिना निरीक्षण के रिपोर्ट बनाता है और उसकी शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। अभी तक कहीं से ऐसी शिकायत नहीं आई है।