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खतौनी पर ही किसानों को मिलेगी खाद
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फतेहपुर। मनमाने तरीके से खाद बेचने और खरीदने वालों पर कृषि विभाग अंकुश लगाने जा रहा है। ज्यादा मात्रा में खाद लेने वाले किसानों को आधार कार्ड के साथ खतौनी भी देनी होगी। बड़े कास्तकार को एक महीने में 50 बोरी से ज्यादा खाद नहीं मिलेगी। इसके लिए कृषि विभाग ने प्राइवेट दुकानदारों के साथ सहकारी समिति के सचिवों को निर्देश जारी किए हैं।
जिले में हर साल यूरिया की होने वाली किल्लत को रोकने के लिए कृषि विभाग ने आधार से खाद बिक्री के साथ अब खतौनी अनिवार्य कर दी है। यह नियम उन किसानों के लिए लागू होगा, जो महीने या एक बार में 15 बोरी से ज्यादा खाद खरीदते हैं। दरअसल, अभी कुछ लोग आधार कार्ड लेकर समितियों और दुकानों पर आते थे, ई-पॉस
मशीन में अंगूठा लगाकर क्षमता से अधिक खाद खरीद कर डंप कर लेते हैं। जरूरत मंद किसानों को जब फसलों पर छिड़काव के लिए खाद की जरूरत पड़ती थी, तब तक खाद की किल्लत शुरू हो जाती थी। फिर महंगे दाम में खाद खरीद कर किसानों को छिड़काव करना पड़ता था। इसका असर सहकारी समितियों व पंजीकृत दुकानों में हर साल देखने को मिलता है। इस समस्या को देखते हुए कृषि विभाग ने खतौनी में दर्ज रकबे के अनुसार खाद देने का नियम बनाया है।
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जिले में 72 सहकारी समिति, 22 जिला सहकारी संघ, केंद्रीय उपभोक्ता भंडार के 12, आईएफएफडीसी के 35 और 36 किसान कृषक केंद्र में इफ्को खाद की बिक्री की जाती है। वहीं, जिले में 650 प्राइवेट खाद की दुकानें हैं, जिनमें 550 एक्टिव दुकानदार हैं।
जिले में चार लाख दो हजार पंजीकृत किसान हैं। इनमें दो लाख 25 हजार किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिल रहे हैं। दो लाख 23 हजार किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बने हैं। जिला कृषि अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि खरीफ के सीजन में धान की फसल में ज्यादा खाद की जरूरत पड़ती है। जिले में धान का क्षेत्रफल 83 हजार हेक्टेयर है।
खाद की किल्लत को रोकने के लिए हर महीने 20 दुकानदार चिह्नित किए जाते हैं। महीने भर में एक आधार कार्ड पर सबसे ज्यादा खाद किस किसान को दी गई है, ऐसे 20 दुकानदारों की शासन से हर महीने रिपोर्ट जिला कृषि अधिकारी को दी जाती है, फिर कृषि विभाग की टीम जिस आधार कार्ड से खाद खरीदी गई है, उसकी जांच करते हैं। यदि दुकानदार ने कम खेती व बिना खेती वाले लोगों का आधार कार्ड लगाकर खाद बिक्री की है, तो दुकानदार पर कार्रवाई की जाती है।
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जिले में हर साल यूरिया की होने वाली किल्लत को रोकने के लिए कृषि विभाग ने आधार से खाद बिक्री के साथ अब खतौनी अनिवार्य कर दी है। यह नियम उन किसानों के लिए लागू होगा, जो महीने या एक बार में 15 बोरी से ज्यादा खाद खरीदते हैं। दरअसल, अभी कुछ लोग आधार कार्ड लेकर समितियों और दुकानों पर आते थे, ई-पॉस
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मशीन में अंगूठा लगाकर क्षमता से अधिक खाद खरीद कर डंप कर लेते हैं। जरूरत मंद किसानों को जब फसलों पर छिड़काव के लिए खाद की जरूरत पड़ती थी, तब तक खाद की किल्लत शुरू हो जाती थी। फिर महंगे दाम में खाद खरीद कर किसानों को छिड़काव करना पड़ता था। इसका असर सहकारी समितियों व पंजीकृत दुकानों में हर साल देखने को मिलता है। इस समस्या को देखते हुए कृषि विभाग ने खतौनी में दर्ज रकबे के अनुसार खाद देने का नियम बनाया है।
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जिले में 72 सहकारी समिति, 22 जिला सहकारी संघ, केंद्रीय उपभोक्ता भंडार के 12, आईएफएफडीसी के 35 और 36 किसान कृषक केंद्र में इफ्को खाद की बिक्री की जाती है। वहीं, जिले में 650 प्राइवेट खाद की दुकानें हैं, जिनमें 550 एक्टिव दुकानदार हैं।
जिले में चार लाख दो हजार पंजीकृत किसान हैं। इनमें दो लाख 25 हजार किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिल रहे हैं। दो लाख 23 हजार किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बने हैं। जिला कृषि अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि खरीफ के सीजन में धान की फसल में ज्यादा खाद की जरूरत पड़ती है। जिले में धान का क्षेत्रफल 83 हजार हेक्टेयर है।
खाद की किल्लत को रोकने के लिए हर महीने 20 दुकानदार चिह्नित किए जाते हैं। महीने भर में एक आधार कार्ड पर सबसे ज्यादा खाद किस किसान को दी गई है, ऐसे 20 दुकानदारों की शासन से हर महीने रिपोर्ट जिला कृषि अधिकारी को दी जाती है, फिर कृषि विभाग की टीम जिस आधार कार्ड से खाद खरीदी गई है, उसकी जांच करते हैं। यदि दुकानदार ने कम खेती व बिना खेती वाले लोगों का आधार कार्ड लगाकर खाद बिक्री की है, तो दुकानदार पर कार्रवाई की जाती है।