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Fatehpur News: बेड पर न तकिया, न चादर, धुलाई के नाम पर हर माह लाखों का खेल

Wed, 29 Oct 2025 12:49 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 29 Oct 2025 12:49 AM IST
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No pillow or bedsheet on the bed, lakhs of rupees every month in the name of laundry
अस्पताल के पोषण पुर्नवास केंद्र में बिछी फटी चादर।  - फोटो : संवाद
फतेहपुर। जिला चिकित्सालय में चादर और तकिया धुलाई के नाम पर हर महीने लाखों रुपये का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि आधे से ज्यादा बेडों पर चादरें नदारद हैं और किसी भी बेड पर तकिया नजर नहीं आता। अस्पताल प्रशासन दावा करता है कि सभी 118 बेडों पर रोजाना चादर व तकिया बदले जाते हैं।
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अस्पताल की पड़ताल में कई बेडों पर गंदी और फटी हुई चादरें मिलीं। कुछ बेडों पर चादरें ही नहीं थीं। लॉन्ड्री कर्मचारियों ने बताया कि वे प्रतिदिन 200 चादरें धुलकर देते हैं और अस्पताल की बिजली से ही मशीनें चलती हैं। इसके बावजूद मरीजों को साफ-सुथरी चादरें और तकिए नहीं मिल पा रहे।
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अस्पताल में चादरों के लिए सप्ताह के हिसाब से रंग तय हैं
बुधवार को हरा, गुरुवार को पीला, शुक्रवार को हल्का नीला, शनिवार को बैंगनी और रविवार को लाल या भूरा। बावजूद इसके, अस्पताल में अधिकतर बेडों पर सफेद रंग की चादरें ही दिखीं। मंगलवार को नारंगी रंग की चादर बिछाने का नियम है, लेकिन एक भी बेड पर नारंगी चादर नहीं मिली।
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पुरुष वार्ड में कुछ बेड पर चादरें नहीं बिछी थीं, जबकि कुछ पर गंदी चादरें थीं। किसी भी मरीज के पास तकिया नहीं दिखा। मरीज हरिशचंद्र (खागा) ने बताया— “सिर्फ एक बार चादर बदली जाती है। ठंड बढ़ने पर कंबल मांगा तो नहीं मिला, घर से लाना पड़ा।”

महिला वार्ड में सभी बेडों पर चादरें तो थीं मगर तकिए कहीं नहीं मिले। मंगलवार को नारंगी रंग की चादर का नियम होने के बावजूद कोई भी बेड निर्धारित रंग से सजा नहीं था।


पोषण पुनर्वास केंद्र के 10 में दो बेडों पर फटी चादरें मिलीं। किसी भी बेड पर तकिया नहीं था। जचा-बच्चा वार्ड की स्थिति भी ऐसी ही रही।

अस्पताल का चार्ज लिए कुछ दिन ही हुए हैं। सभी व्यवस्थाओं को धीरे-धीरे सुधारा जा रहा है। साफ-सफाई और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
राजेश सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल
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