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विदेशी नागरिकों पर टिकी एलआईयू की निगाह
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हसवा। अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्या पर जांच एजेंसियों की निगाहें लगी हैं। ऐसा ही एक मामला थरियांव थानाक्षेत्र में आया है। जिसमें डीआईजी ने रिपोर्ट तलब की है।
मो. उमर की कुंडली खोलने के लिए सभी जांच एजेंसियां पूरी तरह लगी हैं। विदेशी नागरिकों खासकर बांग्लादेशियों और रोहिंग्या को चिह्नित किया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में कुछ अनाम लोग आकर बस गए हैं, उनकी जानकारी एकत्र की जा रही है।
डीआईजी प्रयागराज ने थरियांव थानाक्षेत्र के सुकुई गांव में रहने वाले एक व्यक्ति से संबंधित जानकारी एलआईयू व थरियांव पुलिस से मांगी है। पत्र के जरिए अवैध रूप से रह रहे लोगों का विवरण उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। सुकुई सेमरा निवासी एक व्यक्ति का विवरण पुलिस इकट्ठा कर रही है। साथ ही एलआईयू की निगाहें ऐसे लोगों पर है, जो वर्षों से यहां अवैध तरीके से रह रहे हैं।
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हसवा। क्षेत्र में कई ऐसे गांव हैं, जहां पर कुछ बांग्लादेशी भी आकर बस गए हैं। इनके पास भारतीय होने का कोई भी प्रमाण नहीं हैं। ये लोग अक्सर गांव के किनारे झुग्गी झोपड़ी में रहते हैं। क्षेत्र के बिलंदा, एकारी, पक्का तालाब, छीटी का पुरवा, मजरे नगरा आदि जगह पर सैकड़ों की संख्या में बाहरी लोग हैं। कुछ समय रहने के बाद लोकल स्तर की राजनीति हावी हो जाती है। धीरे-धीरे इनका आधार व निर्वाचन कार्ड तक बन गया। यदि गहनता से जांच की जाए तो इनकी नागरिकता बाहर की मिलेगी।
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मो. उमर की कुंडली खोलने के लिए सभी जांच एजेंसियां पूरी तरह लगी हैं। विदेशी नागरिकों खासकर बांग्लादेशियों और रोहिंग्या को चिह्नित किया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में कुछ अनाम लोग आकर बस गए हैं, उनकी जानकारी एकत्र की जा रही है।
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डीआईजी प्रयागराज ने थरियांव थानाक्षेत्र के सुकुई गांव में रहने वाले एक व्यक्ति से संबंधित जानकारी एलआईयू व थरियांव पुलिस से मांगी है। पत्र के जरिए अवैध रूप से रह रहे लोगों का विवरण उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। सुकुई सेमरा निवासी एक व्यक्ति का विवरण पुलिस इकट्ठा कर रही है। साथ ही एलआईयू की निगाहें ऐसे लोगों पर है, जो वर्षों से यहां अवैध तरीके से रह रहे हैं।
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हसवा। क्षेत्र में कई ऐसे गांव हैं, जहां पर कुछ बांग्लादेशी भी आकर बस गए हैं। इनके पास भारतीय होने का कोई भी प्रमाण नहीं हैं। ये लोग अक्सर गांव के किनारे झुग्गी झोपड़ी में रहते हैं। क्षेत्र के बिलंदा, एकारी, पक्का तालाब, छीटी का पुरवा, मजरे नगरा आदि जगह पर सैकड़ों की संख्या में बाहरी लोग हैं। कुछ समय रहने के बाद लोकल स्तर की राजनीति हावी हो जाती है। धीरे-धीरे इनका आधार व निर्वाचन कार्ड तक बन गया। यदि गहनता से जांच की जाए तो इनकी नागरिकता बाहर की मिलेगी।