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Fatehpur News: देर से दस्तक देगा मानसून, कम बारिश की संभावना
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फतेहपुर। बदलते मानसून ने पुरानी सभी भविष्यवाणियों को नकारने के संकेत दिए हैं। मानसून भी देर से आने की संभावना है और सामान्य की तुलना में बारिश का प्रतिशत भी बहुत कम होने की आशंका जताई जा रही है। ये अलनीनो और विपरजॉय के प्रभाव का परिणाम है। पहले अनुमान लगाए जा रहे थे कि मानसून समय पर दस्तक देगा और भरपूर बारिश होगी।
मई महीने से मानसून ने दस्तक देना शुरू किया। कई बार मानसून बनने के कारण मई महीने में बारिश हुई। गर्म महीना का औसत तापमान 40 डिग्री के नीचे ही दर्ज किया गया। जून के पहले सप्ताह में भी मानसून मेहरबान रहा। आंधी के साथ हल्की बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। लेकिन कुछ दिनों पहले से अरब सागर से बिपरजाय चक्रवात बना। इसका असर पश्चिम उत्तर प्रदेश के साथ जिले में आंशिक रूप से रहा। इसके असर की वजह से जमीन की नमी हवा में सोख ली गई। इससे सूखी गर्मी पड़ने लगी है। ये हालात जून अंत तक बने रहने की संभावना है।
इससे तापमान बढ़कर 47 डिग्री तक पहुंच सकता है। वहीं अलनीनो की वजह से बादल बनने की प्रक्रिया में रुकावट आएगी। इससे बारिश देर और औसत से कम होने की संभावना जताई जा रही है। कृषि मौसम वैज्ञानिक वसीम खान ने बताया कि अलनीनो और पिपरजॉय के प्रभाव से बारिश औसत से कम और देर से होगी। इसका बुरा असर धान की खेती पर पड़ेगा। जिनके पास सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हों, वे धान की बेड़ तैयार करने से पहले सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराना सुनिश्चित कर लें।
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ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ही अलनीनो का प्रकोप देखने को मिल रहा है। इस वजह से समुद्र के पानी का तापमान बढ़ने के साथ हवा में भी गर्मी पैदा हो रही है। इस वजह से बादल बनने की प्रक्रिया में रुकावट आएगी। जबकि बादल बनने के लिए ठंडी हवा की जरूरत होती है। प्रशांत महासागर में भी ऐसा ही असर दिख रहा है। इस वजह से बादल कम बनने के आसार बन रहे हैं। बादल कम बनेंगे, तो बारिश भी कम ही होगी।
आसमान से आग बरस रही है। लोग गर्मी से बेहाल हो रहे हैं। जून में ऐसी सूखी गर्मी पिछले पांच सालों में नहीं पड़ी। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2019 से 2022 तक जून महीने का औसत तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक नहीं पहुंचा, जबकि 13 जून तक ही पारा 45 डिग्री पार कर चुका है।
मौसम विभाग के 2019 से 13 जून 2023 के आंकड़ों के मुताबिक मई का महीना जून से ज्यादा गर्म रहा। पिछले साल मई 2022 का औसत अधिकतम तापमान 47.08 डिग्री दर्ज किया गया, जो अब तक का रिकार्ड है। वहीं 2019, 2020, 2021 व 2022 तक जून महीने का औसत अधिकतम तापमान 41.49, 42.52, 36.16, 37.45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं 13 जून 2023 तक तापमान 45 डिग्री के पार दर्ज किया गया है। ये तापमान अगले कुछ दिनों में 46 डिग्री पार तक जाने की संभावना जताई जा रही है।
जिले में मई में 8.2 मिमी (मिलीमीटर) और जून में 70.2 मिमी सामान्य बारिश होती है। मई 2023 में पिछले पांच सालों की तुलना में सबसे अधिक बारिश 55 मिमी दर्ज की गई। जबकि जून सूखा साबित होने के आसार दिख रहे हैं। जून के अंतिम दिनों में बारिश की संभावना बहुत कम बताई जा रही है।
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मई महीने से मानसून ने दस्तक देना शुरू किया। कई बार मानसून बनने के कारण मई महीने में बारिश हुई। गर्म महीना का औसत तापमान 40 डिग्री के नीचे ही दर्ज किया गया। जून के पहले सप्ताह में भी मानसून मेहरबान रहा। आंधी के साथ हल्की बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। लेकिन कुछ दिनों पहले से अरब सागर से बिपरजाय चक्रवात बना। इसका असर पश्चिम उत्तर प्रदेश के साथ जिले में आंशिक रूप से रहा। इसके असर की वजह से जमीन की नमी हवा में सोख ली गई। इससे सूखी गर्मी पड़ने लगी है। ये हालात जून अंत तक बने रहने की संभावना है।
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इससे तापमान बढ़कर 47 डिग्री तक पहुंच सकता है। वहीं अलनीनो की वजह से बादल बनने की प्रक्रिया में रुकावट आएगी। इससे बारिश देर और औसत से कम होने की संभावना जताई जा रही है। कृषि मौसम वैज्ञानिक वसीम खान ने बताया कि अलनीनो और पिपरजॉय के प्रभाव से बारिश औसत से कम और देर से होगी। इसका बुरा असर धान की खेती पर पड़ेगा। जिनके पास सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हों, वे धान की बेड़ तैयार करने से पहले सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराना सुनिश्चित कर लें।
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ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ही अलनीनो का प्रकोप देखने को मिल रहा है। इस वजह से समुद्र के पानी का तापमान बढ़ने के साथ हवा में भी गर्मी पैदा हो रही है। इस वजह से बादल बनने की प्रक्रिया में रुकावट आएगी। जबकि बादल बनने के लिए ठंडी हवा की जरूरत होती है। प्रशांत महासागर में भी ऐसा ही असर दिख रहा है। इस वजह से बादल कम बनने के आसार बन रहे हैं। बादल कम बनेंगे, तो बारिश भी कम ही होगी।
आसमान से आग बरस रही है। लोग गर्मी से बेहाल हो रहे हैं। जून में ऐसी सूखी गर्मी पिछले पांच सालों में नहीं पड़ी। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2019 से 2022 तक जून महीने का औसत तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक नहीं पहुंचा, जबकि 13 जून तक ही पारा 45 डिग्री पार कर चुका है।
मौसम विभाग के 2019 से 13 जून 2023 के आंकड़ों के मुताबिक मई का महीना जून से ज्यादा गर्म रहा। पिछले साल मई 2022 का औसत अधिकतम तापमान 47.08 डिग्री दर्ज किया गया, जो अब तक का रिकार्ड है। वहीं 2019, 2020, 2021 व 2022 तक जून महीने का औसत अधिकतम तापमान 41.49, 42.52, 36.16, 37.45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं 13 जून 2023 तक तापमान 45 डिग्री के पार दर्ज किया गया है। ये तापमान अगले कुछ दिनों में 46 डिग्री पार तक जाने की संभावना जताई जा रही है।
जिले में मई में 8.2 मिमी (मिलीमीटर) और जून में 70.2 मिमी सामान्य बारिश होती है। मई 2023 में पिछले पांच सालों की तुलना में सबसे अधिक बारिश 55 मिमी दर्ज की गई। जबकि जून सूखा साबित होने के आसार दिख रहे हैं। जून के अंतिम दिनों में बारिश की संभावना बहुत कम बताई जा रही है।