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ढाबों व सब्जी मंडी से बचे खाद्य को गोशाला पहुंचाएं
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विकास भवन सभागार में बैठक करतीं डीएम अपूर्वा दुबे। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। होटलों, ढाबों और रेस्टोरेंटों में बचा खाना गायों के लिए गोशालाओं में पहुंचाया जाएगा। गायों को देने से पहले इस खाने की गुणवत्ता की जांच खाद्य निरीक्षक करेंगे। गाय के बीमार होने पर तुरंत इलाज कराया जाएगा। इसमें लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी अपूर्वा दुबे ने विकास भवन सभागार में मातहतों के साथ बैठक कर गायों को बचे भोजन की पहल की रूपरेखा तय की। उन्होंने कहा संबंधित एसडीएम गोशालाओं के आसपास स्थित ढाबों, होटलों व रेस्टोरेंटों में बचा खाना देने के लिए संपर्क कर लें।
इस बचे खाने की गुणवत्ता की जांच खाद्य निरीक्षक करेंगे। खाने की गुणवत्ता सही होने पर गायों को खिलाया जाए। उन्होंने कहा कि गोवंशों के लिए चारा, हरा चारा, पानी की की व्यवस्था रखें। हरे चारे की बुआई हुई है। उनमें खाद व पानी समय पर दिया जाए और निगरानी भी कराएं।
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गर्मी को देखते हुए गोवंशों के लिए साफ ड्रम रखकर पानी भराया जाए। अगर तालाब की व्यवस्था है तो उसे साफ कराकर पानी भरा दें। जिन गोशाला में सबमर्सिबल पंप लगा हुआ है, वहां की बिजली व्यवस्था को मजबूत रखें।
ग्राम पंचायत के खातों में गोवंशों से संबंधित योजना के पैसे खर्च की रिपोर्ट दी जाए। इन पैसों पर जो ब्याज आया हो, उन पैसों का व्यय मवेशियों के लिए सुविधाओं में किया जाए।
इसके लिए कार्य योजना बनाकर स्वीकृति ली जाए। पशु चिकित्सकों से कहा गया कि वह नियमित रूप से मवेशियों की जांच कर रिपोर्ट बनाएं। इसमें किसी तरह की लापरवाही न की जाए। अगर मवेशी बीमार हैं तो इनके लिए एक अलग टिन शेड लगाकर उन्हें वहां रखा जाए।
वहीं पर उनके पानी व चारे की व्यवस्था की जाए। भूसा भंडारण की फोटो खींचकर दी जाए। बैठक में जिला परियोजना निदेशक एमपी चौबे और डीपीआरओ निधि बंसल समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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जिलाधिकारी अपूर्वा दुबे ने विकास भवन सभागार में मातहतों के साथ बैठक कर गायों को बचे भोजन की पहल की रूपरेखा तय की। उन्होंने कहा संबंधित एसडीएम गोशालाओं के आसपास स्थित ढाबों, होटलों व रेस्टोरेंटों में बचा खाना देने के लिए संपर्क कर लें।
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इस बचे खाने की गुणवत्ता की जांच खाद्य निरीक्षक करेंगे। खाने की गुणवत्ता सही होने पर गायों को खिलाया जाए। उन्होंने कहा कि गोवंशों के लिए चारा, हरा चारा, पानी की की व्यवस्था रखें। हरे चारे की बुआई हुई है। उनमें खाद व पानी समय पर दिया जाए और निगरानी भी कराएं।
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गर्मी को देखते हुए गोवंशों के लिए साफ ड्रम रखकर पानी भराया जाए। अगर तालाब की व्यवस्था है तो उसे साफ कराकर पानी भरा दें। जिन गोशाला में सबमर्सिबल पंप लगा हुआ है, वहां की बिजली व्यवस्था को मजबूत रखें।
ग्राम पंचायत के खातों में गोवंशों से संबंधित योजना के पैसे खर्च की रिपोर्ट दी जाए। इन पैसों पर जो ब्याज आया हो, उन पैसों का व्यय मवेशियों के लिए सुविधाओं में किया जाए।
इसके लिए कार्य योजना बनाकर स्वीकृति ली जाए। पशु चिकित्सकों से कहा गया कि वह नियमित रूप से मवेशियों की जांच कर रिपोर्ट बनाएं। इसमें किसी तरह की लापरवाही न की जाए। अगर मवेशी बीमार हैं तो इनके लिए एक अलग टिन शेड लगाकर उन्हें वहां रखा जाए।
वहीं पर उनके पानी व चारे की व्यवस्था की जाए। भूसा भंडारण की फोटो खींचकर दी जाए। बैठक में जिला परियोजना निदेशक एमपी चौबे और डीपीआरओ निधि बंसल समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।