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Fatehpur News: लाइट जलाओ, हॉर्न बजाओ, फिटनेस पाओ
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नामित शुक्ला
फतेहपुर। संभागीय परिवहन कार्यालय में वाहनों की फिटनेस में अनदेखी कर उसे लगभग दो मिनट में पास किया जा रहा है। वाहन की लाइट अपर-डिपर, हॉर्न बजाने के साथ वाइपर चलता देख फिट होने का प्रमाण पत्र दे दिया जाता है। ऐसे अनफिट वाहन ही कई बार दुर्घटना के कारण बनते हैं।
ऐसा ही नजारा गुरुवार को संभागीय परिवहन कार्यालय में देखने को मिला। यहां सुबह 10 बजे से ही फिटनेस के लिए वाहन हाईवे किनारे सर्विसलेन में खड़े हो गए। लंबे इंतजार के बाद आरआई कृष्ण चंद्र सिंह दोपहर डेढ़ बजे वाहनों की फिटनेस जांच के लिए पहुंचे। उन्होंने लोडर, ई-रिक्शा, ट्रक और स्कूली बस समेत 15 वाहनों की जांच दोपहर दो बजे तक तीस मिनट में कर दी। सभी से एक ही सवाल रहा। गाड़ी का ड्राइवर कौन है? सीट पर बैठो, लाइट जलाओ, अपर-डीपर करो। साइड लाइट जलाओ, हॉर्न बजाओ, वाइपर चलाओ और बस दो मिनट में एक वाहन की फिटनेस जांच पूरी हो गई। ड्राइवर के आंखों की जांच व अन्य शारीरिक दक्षता भी नहीं देखी जाती है। इस खानापूर्ति की वजह से ही सड़कों पर हजारों अनफिट वाहन दौड़ रहे हैं। वाहनों में खामियां भी कहीं न कहीं हादसे का कारण भी बनती हैं।
स्कूली बसों में मानक की अनदेखी
अधिकांश स्कूली वाहनों पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। इनमें प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स तक नहीं होते हैं। स्कूली वाहनों के चालक और परिचालक का मेडिकल परीक्षण भी नहीं कराया जाता है। जबकि चालक का ड्राइविंग लाइसेंस, नेत्र परीक्षण और मेडिकल चेकअप अनिवार्य है। लेकिन बिना किसी परीक्षण के स्कूली वाहनों को फिटनेस में पास किया जा रहा है। यह लापरवाही स्कूली बच्चों की जान खतरे में डाल रही है।
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करीब 30 जांच हैं जरूरी
सामान्य वाहनों में हेड लाइट, ब्रेक लाइट, पार्किंग लाइट, इंडिकेटर, मीटर, स्टेयरिंग, मानक अनुसार टायर, ब्रेक, हैंड ब्रेक, क्लच, एक्सीलेटर, सीट बेल्ट, हार्न, रिफलेक्टर, वाइपर, फर्स्ट एड बॉक्स की जांच करनी होती है। वहीं स्कूली वाहनों में इनके अतिरिक्त स्कूल बस लिखा होना जरूरी होता है। इसके साथ ही सुरक्षा जाली, अग्निशमन यंत्र, दरवाजे पर ताले, स्कूल का नाम-फोन नंबर, सीटों में गैप, इमरजेंसी गेट, स्पीड गवर्नर, प्रेशर हॉर्न, सीसीटीवी कैमरे लगा होना अनिवार्य है। इसके अलावा बस 12 साल से ज्यादा पुरानी नहीं होना चाहिए। बस में पुलिस विभाग के नंबर, जिलाधिकारी का नंबर, एंबुलेंस का नंबर लिखा होना चाहिए। इन जांचों में पास होने के बाद ही फिटनेस का प्रमाण पत्र दिया जाता है।
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फतेहपुर। संभागीय परिवहन कार्यालय में वाहनों की फिटनेस में अनदेखी कर उसे लगभग दो मिनट में पास किया जा रहा है। वाहन की लाइट अपर-डिपर, हॉर्न बजाने के साथ वाइपर चलता देख फिट होने का प्रमाण पत्र दे दिया जाता है। ऐसे अनफिट वाहन ही कई बार दुर्घटना के कारण बनते हैं।
ऐसा ही नजारा गुरुवार को संभागीय परिवहन कार्यालय में देखने को मिला। यहां सुबह 10 बजे से ही फिटनेस के लिए वाहन हाईवे किनारे सर्विसलेन में खड़े हो गए। लंबे इंतजार के बाद आरआई कृष्ण चंद्र सिंह दोपहर डेढ़ बजे वाहनों की फिटनेस जांच के लिए पहुंचे। उन्होंने लोडर, ई-रिक्शा, ट्रक और स्कूली बस समेत 15 वाहनों की जांच दोपहर दो बजे तक तीस मिनट में कर दी। सभी से एक ही सवाल रहा। गाड़ी का ड्राइवर कौन है? सीट पर बैठो, लाइट जलाओ, अपर-डीपर करो। साइड लाइट जलाओ, हॉर्न बजाओ, वाइपर चलाओ और बस दो मिनट में एक वाहन की फिटनेस जांच पूरी हो गई। ड्राइवर के आंखों की जांच व अन्य शारीरिक दक्षता भी नहीं देखी जाती है। इस खानापूर्ति की वजह से ही सड़कों पर हजारों अनफिट वाहन दौड़ रहे हैं। वाहनों में खामियां भी कहीं न कहीं हादसे का कारण भी बनती हैं।
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स्कूली बसों में मानक की अनदेखी
अधिकांश स्कूली वाहनों पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। इनमें प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स तक नहीं होते हैं। स्कूली वाहनों के चालक और परिचालक का मेडिकल परीक्षण भी नहीं कराया जाता है। जबकि चालक का ड्राइविंग लाइसेंस, नेत्र परीक्षण और मेडिकल चेकअप अनिवार्य है। लेकिन बिना किसी परीक्षण के स्कूली वाहनों को फिटनेस में पास किया जा रहा है। यह लापरवाही स्कूली बच्चों की जान खतरे में डाल रही है।
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करीब 30 जांच हैं जरूरी
सामान्य वाहनों में हेड लाइट, ब्रेक लाइट, पार्किंग लाइट, इंडिकेटर, मीटर, स्टेयरिंग, मानक अनुसार टायर, ब्रेक, हैंड ब्रेक, क्लच, एक्सीलेटर, सीट बेल्ट, हार्न, रिफलेक्टर, वाइपर, फर्स्ट एड बॉक्स की जांच करनी होती है। वहीं स्कूली वाहनों में इनके अतिरिक्त स्कूल बस लिखा होना जरूरी होता है। इसके साथ ही सुरक्षा जाली, अग्निशमन यंत्र, दरवाजे पर ताले, स्कूल का नाम-फोन नंबर, सीटों में गैप, इमरजेंसी गेट, स्पीड गवर्नर, प्रेशर हॉर्न, सीसीटीवी कैमरे लगा होना अनिवार्य है। इसके अलावा बस 12 साल से ज्यादा पुरानी नहीं होना चाहिए। बस में पुलिस विभाग के नंबर, जिलाधिकारी का नंबर, एंबुलेंस का नंबर लिखा होना चाहिए। इन जांचों में पास होने के बाद ही फिटनेस का प्रमाण पत्र दिया जाता है।