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जो खाते हैं देश का जपते हैं तालिबान-----
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फतेहपुर। भाजयुमो ने नवभारत मेला कार्यक्रम के तहत मंगलवार रात ठा. युगराज सिंह महाविद्यालय में कवि सम्मेलन का आयोजन किया। कवियों ने रचनाओं से श्रोताओं को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया। कवि केपी सिंह कछवाह कृष्ण ने ‘जो खाते हैं देश का, जपते हैं तालिबान, उनसे तो ज्यादा भले गलियों के हैं श्वान।’ कविता सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।
कवि प्रवीण श्रीवास्तव प्रसून ने पढ़ा,‘ यही एक डोर रिश्ते की कभी टूटा नहीं करती, अमर स्नेह की रंगत कभी छूटा नहीं करती’। कवि मधुसूदन दीक्षित ने पढ़ा, ‘हो गया पथभ्रष्ट चलता जा रहा है, मिल रहा जो भी निगलता जा रहा है’।
कवि महेश चंद्र त्रिपाठी ने पढ़ा ‘अपनी-अपनी जिंदगी, अपना-अपना ढंग, कुछ को सतरंगी लगे, पर कुछ को बदरंग’। कवि आनंद प्रकाश ने ‘हिंदी है नील गगन से ऊंची, हिंदी सागर से गहरी है, हिंदी है हिम शिखरों से ऊंची, हिंदी ही कवियों की प्रहरी है’ कविता सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता मधुसूदन दीक्षित ने की।
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संयोजक प्रसून तिवारी रहे। श्रेय शुक्ला, भाजयुमो जिलाध्यक्ष मधुराज विश्वकर्मा, स्मिता सिंह, डॉ. अनुराग श्रीवास्तव, गौरव अग्रहरी, सौरभ अवस्थी, शिवम वर्मा, उमा शरण गुप्ता, डॉ. माधुरी साहू, रीता सिंह तोमर, साधना चौरसिया और नीरज यादव मौजूद रहे।
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कवि प्रवीण श्रीवास्तव प्रसून ने पढ़ा,‘ यही एक डोर रिश्ते की कभी टूटा नहीं करती, अमर स्नेह की रंगत कभी छूटा नहीं करती’। कवि मधुसूदन दीक्षित ने पढ़ा, ‘हो गया पथभ्रष्ट चलता जा रहा है, मिल रहा जो भी निगलता जा रहा है’।
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कवि महेश चंद्र त्रिपाठी ने पढ़ा ‘अपनी-अपनी जिंदगी, अपना-अपना ढंग, कुछ को सतरंगी लगे, पर कुछ को बदरंग’। कवि आनंद प्रकाश ने ‘हिंदी है नील गगन से ऊंची, हिंदी सागर से गहरी है, हिंदी है हिम शिखरों से ऊंची, हिंदी ही कवियों की प्रहरी है’ कविता सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता मधुसूदन दीक्षित ने की।
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संयोजक प्रसून तिवारी रहे। श्रेय शुक्ला, भाजयुमो जिलाध्यक्ष मधुराज विश्वकर्मा, स्मिता सिंह, डॉ. अनुराग श्रीवास्तव, गौरव अग्रहरी, सौरभ अवस्थी, शिवम वर्मा, उमा शरण गुप्ता, डॉ. माधुरी साहू, रीता सिंह तोमर, साधना चौरसिया और नीरज यादव मौजूद रहे।