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Fatehpur News: आईसीयू के करोड़ों के उपकरण खा रहे धूल
Fri, 26 Apr 2024 04:47 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
Updated Fri, 26 Apr 2024 04:47 AM IST
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फोटो-28-स्टोर में कबाड़ में पड़े आईसीयू की उपकरण। संवाद
-जिले के गंभीर रोगी गैर जिलों के लिए होते हैं रेफर
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। इंसेटिव केयर यूनिट (आईसीयू) के करोड़ों कीमत के उपकरण कबाड़ में पड़े धूल खा रहे हैं। एक साल पहले भारी भरकम धनराशि खर्च करने के बावजूद जिले को गंभीर रोगियों को आईसीयू की चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाई। अभी भी स्वास्थ्य विभाग के पास आईसीयू चालू करने की कोई योजना नहीं दिख रही है।
एक साल पहले जिला अस्पताल में 10 बेड का आईसीयू स्वीकृत हुआ था। इसके लिए करोड़ों कीमत के उपकरण खरीदे गए और जिला अस्पताल के एक्सरे विभाग की ऊपर दूसरी मंजिल के हाल में आईसीयू स्थापित करने की योजना तैयार हुई। दरवाजे पर आईसीयू लिखा गया, लेकिन जब चालू करने का नंबर आया, तो डाक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। ऐसे में वेंटीलेटर आदि सभी जरूरी उपकरण यहां से हटाकर ट्रामा सेंटर के ऊपरी मंजिल के एक कमरे में फेंक दिए गए। एक साल से यहां पर पड़े उपकरणों में मिट्टी की परत जमा हो चुकी है। यही स्थिति रही तो करोड़ों कीमत के उपकरण कबाड़ हो जाएंगे और आईसीयू को जिले के गंभीर रोगियों को लाभ भी नहीं मिल पाएगा।
...कोट्स--
जल्द ही जिला अस्पताल जाएंगे और कबाड़ में पड़े कीमती उपकरण का जायजा लेंगे। प्रयास है कि मेडिकल कालेज की ओपडी चलने के साथ आईसीयू भी चालू हो जाए।
डॉ. आरपी सिंह, प्राचार्य मेडिकल कालेज
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-जिले के गंभीर रोगी गैर जिलों के लिए होते हैं रेफर
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। इंसेटिव केयर यूनिट (आईसीयू) के करोड़ों कीमत के उपकरण कबाड़ में पड़े धूल खा रहे हैं। एक साल पहले भारी भरकम धनराशि खर्च करने के बावजूद जिले को गंभीर रोगियों को आईसीयू की चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाई। अभी भी स्वास्थ्य विभाग के पास आईसीयू चालू करने की कोई योजना नहीं दिख रही है।
एक साल पहले जिला अस्पताल में 10 बेड का आईसीयू स्वीकृत हुआ था। इसके लिए करोड़ों कीमत के उपकरण खरीदे गए और जिला अस्पताल के एक्सरे विभाग की ऊपर दूसरी मंजिल के हाल में आईसीयू स्थापित करने की योजना तैयार हुई। दरवाजे पर आईसीयू लिखा गया, लेकिन जब चालू करने का नंबर आया, तो डाक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। ऐसे में वेंटीलेटर आदि सभी जरूरी उपकरण यहां से हटाकर ट्रामा सेंटर के ऊपरी मंजिल के एक कमरे में फेंक दिए गए। एक साल से यहां पर पड़े उपकरणों में मिट्टी की परत जमा हो चुकी है। यही स्थिति रही तो करोड़ों कीमत के उपकरण कबाड़ हो जाएंगे और आईसीयू को जिले के गंभीर रोगियों को लाभ भी नहीं मिल पाएगा।
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...कोट्स
जल्द ही जिला अस्पताल जाएंगे और कबाड़ में पड़े कीमती उपकरण का जायजा लेंगे। प्रयास है कि मेडिकल कालेज की ओपडी चलने के साथ आईसीयू भी चालू हो जाए।
डॉ. आरपी सिंह, प्राचार्य मेडिकल कालेज
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