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Fatehpur News: कूड़ा निस्तारण के लिए चार करोड़ स्वाहा, नतीजा शून्य

Tue, 22 Jul 2025 01:27 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 22 Jul 2025 01:27 AM IST
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Four crores spent for garbage disposal, result zero
बीबीपुर के समीप एमआरएफ सेंटर में कूड़ा छंटनी करते कर्मचारी।
फतेहपुर। शहर में कूड़ा निस्तारण के नाम पर चार करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर (एमआरएफ) अब तक न तो सफाई ला सके, न ही राजस्व। हालत ये है कि जहां प्रतिदिन 90 टन कचरा निकलता है, वहीं इन सेंटरों में महज दो टन का निस्तारण हो पा रहा है। बाकी का कचरा धीरे-धीरे डंपिंग पहाड़ में बदलता जा रहा है।
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नगर पालिका ने शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए पोस्टमार्टम हाउस के पीछे, अजगवां, बीबीपुर और मलाका के पास चार एमआरएफ सेंटर बनवाए थे। इनकी कुल लागत करीब चार करोड़ रुपये आई थी। प्रत्येक सेंटर पर पांच कर्मचारी तैनात हैं। वेतन में सालाना 24 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन अभी आउटपुट न के बराबर है।
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सेंटरों को एक साल पहले चालू किया गया था। तब नगर पालिका ने दावा किया था कि कूड़े की छंटनी से राजस्व भी बढ़ेगा। लेकिन एक साल में कुल नीलामी मात्र एक लाख रुपये की हो सकी, जिससे ये दावे भी हवा हो गए।
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साफ-सफाई पर हर साल दो करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने वाली नगर पालिका अब खुद कूड़ा निस्तारण को लेकर चिंतित है। एमआरएफ सेंटरों की विफलता ने व्यवस्था की पोल खोल दी है। कर्मचारियों के वेतन से लेकर डीजल तक, सब कुछ खर्च हो रहा है, लेकिन शहर सफाई रैंकिंग में अब भी फिसड्डी बना हुआ है।


लाखों टन कूड़ा डंप, चिंता का विषय

शहर सीमा में मलाका के समीप बने सालिड वेस्ट प्लांट परिसर में लाखों टन कूड़ा डंप हो चुका है और हर रोज करीब 88 टन कूड़ा डंप में बढ़ रहा है। अगर जल्द कूड़े का निस्तारण न हुआ, तो आसपास का पेयजल प्रदूषित हो जाएगा।




कूड़ा निस्तारण के लिए झारखंड की एक संस्था से समझौता हुआ है। संस्था को एमआरएफ सेंटर के साथ बिजली का बिल नगर पालिका को देना है। कूड़ा भी सेंटर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निकाय की होगी। संस्था कूड़े की छंटनी कराएगी और इससे होने वाले आय लेगी। एक साल में छंटनी हुआ कूड़ा एक लाख का बेचा गया है।

रविंद्र कुमार, ईओ नगर पालिका
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