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Fatehpur News: आंधी में वर्षों पुराना पारिजात का वृक्ष गिरा, महाभारत काल से जोड़ा जाता है इसका संबंध

Sat, 04 Apr 2026 12:53 AM IST
कानपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, फतेहतपुर
अमर उजाला नेटवर्क, फतेहतपुर Published by: कानपुर ब्यूरो Updated Sat, 04 Apr 2026 12:53 AM IST
सार

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पारिजात वृक्ष भगवान श्रीकृष्ण स्वर्ग से लाए थे और इसका संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इसके दर्शन और पूजन से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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Five-Thousand-Year-Old Parijat Tree Falls in Storm
गिरा पड़ा पुराना पारिजात का वृक्ष - फोटो : Amar ujala

विस्तार

फतेहपुर जिले के विजयीपुर ब्लॉक के सरौली गांव में वर्षों पुराना पारिजात का वृक्ष मंगलवार देर रात आई आंधी में गिर गया। यह वृक्ष लंबे समय से क्षेत्र की आस्था और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक रहा है। जिले के चार संरक्षित वृक्षों में से एक होने के बावजूद विभागीय अनदेखी के कारण यह अमूल्य वृक्ष बचाया नहीं जा सका। जनप्रतिनिधियों की मांग पर यह वृक्ष संरक्षित हुए थे।

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महाभारत काल से जोड़ा जाता है संबंध
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पारिजात वृक्ष भगवान श्रीकृष्ण स्वर्ग से लाए थे और इसका संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इसके दर्शन और पूजन से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। प्राचीन समय में इस क्षेत्र में पांच पारिजात के वृक्ष थे लेकिन अब यह अंतिम वृक्ष भी नष्ट हो जाने से यमुना तटवर्ती जनपद एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर से वंचित हो गया है। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. रमेश पाठक ने बताया कि पारिजात दुर्लभ श्रेणी का वृक्ष है।
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जिले में संरक्षित वृक्ष
सरौली के जंगल में दो पारिजात के वृक्ष, डाक बंगला स्थित बरगद का वृक्ष, बिंदकी-खजुहा के मध्य बावनी इमली का वृक्ष संरक्षित किए गए। हालांकि जिले में पारिजात के दोनों वृक्ष अब नष्ट हो चुके हैं।
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इसलिए माने जाते हैं दुर्लभ
पारिजात में फूल और फल नहीं होते और इसकी कलम भी नहीं लगती। ऐसे में इसे नर्सरी में तैयार नहीं किया जा सकता। जिले में यह एकमात्र पारिजात का वृक्ष था।

सिर्फ अभिलेखों में हुआ संरक्षण
वन विभाग ने चार प्राचीन वृक्षों का अभिलेखों में संरक्षण किया लेकिन सरौली के पारिजात के वृक्ष की जड़ों में मिट्टी नहीं डाली गई। न कंटीले तार या दीवार बनाई गई न ही समय-समय पर सिंचाई की व्यवस्था की गई। इस कारण यह वृक्ष आंधी में टूटकर गिर गया।

मिट्टी डालकर सिंचाई की जाती तो बच जाता वृक्ष
पर्यावरण प्रेमी जयकांत सिंह ने बताया कि प्रशासन ने लाख प्रयासों के बावजूद इन दुर्लभ वृक्षों की सुरक्षा और रखरखाव के लिए कोई कदम नहीं उठाया। यदि जड़ों में मिट्टी डालकर सिंचाई की जाती तो यह दुर्लभ वृक्ष बचाया जा सकता था।

सरौली निवासी दिनेश सिंह ने कहा कि ऐतिहासिक स्रोतों में उल्लेख है कि 711 ईस्वी में पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र से विस्थापित क्षत्रियों के समूह ने सरौली में पारिजात के वृक्ष लगाए थे। यह वृक्ष उनके लिए उनकी मूल भूमि की यादगार था।


विजयीपुर ब्लाॅक के सरौली गांव में पारिजात का वृक्ष संरक्षित था। आंधी में गिरने की जानकारी मिली है। - गंगा दत्त मिश्रा, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी अधिकारी

 

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