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Fatehpur News: आठ की फायर एनओसी, चल रहे 350 होटल-रेस्टोरेंट
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फोटो-36-पटेल नगर चौराहे पर गली में बना होटल। संवाद
फतेहपुर। दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में आग लगने से 21 लोगों के जिंदा जलने की घटना ने जिले में संचालित होटल, रेस्टोरेंट और मैरिज हॉल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सच तो यह है कि यहां न तो नियमों का पालन होता है और न ही किसी अफसर को इसकी परवाह है। मिलीभगत इतनी गहरी है कि दमकल विभाग खुद मूकदर्शक बना हुआ है।
अग्निशमन विभाग के नियमों की अनदेखी कर जिले में करीब 350 से अधिक होटल, गेस्ट हाउस और मैरिज हॉल बिना फायर एनओसी के धड़ल्ले से चल रहे हैं। वहीं सिर्फ आठ प्रतिष्ठानों ने फायर एनओसी ले रखी है। ऐसे में जिले में संचालित हो रहे अन्य होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज हॉल और ढाबों में कानून के साथ-साथ हजारों लोगों की जान से भी खिलवाड़ किया जा रहा है। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी सिर्फ नोटिस जारी करके खानापूरी कर रहे हैं। लापरवाही बरतने वाले संचालकों के होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और दुकानों को सीज किया जाता तो ज्यादा कुछ सुधार जरूर नजर आता है।
इन स्थानों पर रहता है खतरा
शहर के राधानगर, कलक्टरगंज, ज्वालागंज, पक्का तालाब, लखनऊ बाईपास, सिविल लाइंस, आईटीआई रोड, कानपुर-प्रयागराज हाईवे और ग्रामीण इलाकों तक फैले इन प्रतिष्ठानों में से अधिकांश के पास आपातकालीन निकास की भी व्यवस्था नहीं है। आग बुझाने के उपकरण हैं भी तो सिर्फ दिखावे के लिए। इनकी चालू हालत का कोई प्रमाण नहीं है। सबसे खतरनाक बात यह है कि कोई नहीं जानता कि आपदा आने पर इन उपकरणों को चलाने का प्रशिक्षित कर्मचारी मौजूद है भी या नहीं। अनहोनी के वक्त भगदड़ मचने का पूरा खतरा है।
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सबको पता है फिर भी कोई कार्रवाई नहीं
प्रशासन और अग्निशमन विभाग इस लापरवाही से अच्छी तरह परिचित हैं। नोटिस जारी करने के अलावा जमीनी स्तर पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होती। साठगांठ के चलते बिना एनओसी के ही इन प्रतिष्ठानों में शादियां और बड़े व्यावसायिक कार्यक्रम धड़ल्ले से बुक किए जा रहे हैं।
आखिर कैसे मिल रही संचालन की अनुमति
होटल, रेस्टोरेंट और मैरिज हॉल के लिए लोग शहरी प्रशासन व ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत और फूड एवं पर्यटन विभाग से अनुमति लेकर निर्माण व संचालन कर लेते हैं। किसी विभाग को यह जरूरी नहीं लगता कि फायर विभाग से एनओसी लेना भी अनिवार्य है। न ही कोई विभाग एक-दूसरे से संचालित प्रतिष्ठानों की सूची लेकर कार्रवाई की मांग करता है।
होटल, रेस्टोरेंट और मैरिज हाल के लिए लोग शहरी प्रशासन, ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत और फूड व पर्यटन विभाग से ही अनुमति लेकर निर्माण व संचालन का काम करते हैं। फायर विभाग से भी एनओसी ली जानी चाहिए। किसी विभाग से भी आख्या नहीं मिलती है। वह सभी विभागों से संपर्क व पत्राचार कर संचालित प्रतिष्ठानों की सूची लेकर नोटिस जारी करेंगे। वर्तमान में आठ ऐसे प्रतिष्ठानों के पास एनओसी है। कुछ प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी की गई है।
- जसबीर सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी।
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अग्निशमन विभाग के नियमों की अनदेखी कर जिले में करीब 350 से अधिक होटल, गेस्ट हाउस और मैरिज हॉल बिना फायर एनओसी के धड़ल्ले से चल रहे हैं। वहीं सिर्फ आठ प्रतिष्ठानों ने फायर एनओसी ले रखी है। ऐसे में जिले में संचालित हो रहे अन्य होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज हॉल और ढाबों में कानून के साथ-साथ हजारों लोगों की जान से भी खिलवाड़ किया जा रहा है। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी सिर्फ नोटिस जारी करके खानापूरी कर रहे हैं। लापरवाही बरतने वाले संचालकों के होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और दुकानों को सीज किया जाता तो ज्यादा कुछ सुधार जरूर नजर आता है।
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इन स्थानों पर रहता है खतरा
शहर के राधानगर, कलक्टरगंज, ज्वालागंज, पक्का तालाब, लखनऊ बाईपास, सिविल लाइंस, आईटीआई रोड, कानपुर-प्रयागराज हाईवे और ग्रामीण इलाकों तक फैले इन प्रतिष्ठानों में से अधिकांश के पास आपातकालीन निकास की भी व्यवस्था नहीं है। आग बुझाने के उपकरण हैं भी तो सिर्फ दिखावे के लिए। इनकी चालू हालत का कोई प्रमाण नहीं है। सबसे खतरनाक बात यह है कि कोई नहीं जानता कि आपदा आने पर इन उपकरणों को चलाने का प्रशिक्षित कर्मचारी मौजूद है भी या नहीं। अनहोनी के वक्त भगदड़ मचने का पूरा खतरा है।
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सबको पता है फिर भी कोई कार्रवाई नहीं
प्रशासन और अग्निशमन विभाग इस लापरवाही से अच्छी तरह परिचित हैं। नोटिस जारी करने के अलावा जमीनी स्तर पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होती। साठगांठ के चलते बिना एनओसी के ही इन प्रतिष्ठानों में शादियां और बड़े व्यावसायिक कार्यक्रम धड़ल्ले से बुक किए जा रहे हैं।
आखिर कैसे मिल रही संचालन की अनुमति
होटल, रेस्टोरेंट और मैरिज हॉल के लिए लोग शहरी प्रशासन व ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत और फूड एवं पर्यटन विभाग से अनुमति लेकर निर्माण व संचालन कर लेते हैं। किसी विभाग को यह जरूरी नहीं लगता कि फायर विभाग से एनओसी लेना भी अनिवार्य है। न ही कोई विभाग एक-दूसरे से संचालित प्रतिष्ठानों की सूची लेकर कार्रवाई की मांग करता है।
होटल, रेस्टोरेंट और मैरिज हाल के लिए लोग शहरी प्रशासन, ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत और फूड व पर्यटन विभाग से ही अनुमति लेकर निर्माण व संचालन का काम करते हैं। फायर विभाग से भी एनओसी ली जानी चाहिए। किसी विभाग से भी आख्या नहीं मिलती है। वह सभी विभागों से संपर्क व पत्राचार कर संचालित प्रतिष्ठानों की सूची लेकर नोटिस जारी करेंगे। वर्तमान में आठ ऐसे प्रतिष्ठानों के पास एनओसी है। कुछ प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी की गई है।
- जसबीर सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी।

फोटो-36-पटेल नगर चौराहे पर गली में बना होटल। संवाद