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जहानाबाद विधानसभा: 33 साल में इतिहास ने बदली करवट

Thu, 03 Feb 2022 11:27 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 03 Feb 2022 11:27 PM IST
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fathepur news,Jehanabad Assembly: History changed course in 33 years
अमौली। जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र में सियासत का इतिहास बड़ा ही रोचक है। यहां आजादी के 33 साल यानि 1952 से 1985 तक 6 ब्राह्मण, एक कुर्मी और दो मुस्लिम विधायक हुए।
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जबकि 1989 में मंडल आयोग के बाद के 33 वर्षों में 6 बार कुर्मी, एक बार ब्राह्मण और एक बार मुस्लिम विधायक चुना गया। जहानाबाद विधानसभा को कभी ब्राम्हणों की सीट कही जाती थी, लेकिन 1989 के बाद से यह सीट कुर्मी बाहुल्य हो गई।
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जहानाबाद विधानसभा के अतीत पर निगाह डालते है यह स्थिति एकदम साफ हो जाती है। 1952 से 85 तक के चुनावी सफर में मुख्य दल के तौर पर कांग्रेस रही। इन 9 चुनावों में 7 बार कांग्रेस तो एक बार निर्दलीय और एक बार जनता पार्टी जीत सकी।
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कांग्रेस में ब्राम्हण, क्षत्रिय, दलित एवं मुस्लिम समीकरण होने से पार्टी सफल होती रही। 1952 में कांग्रेस के गुरु प्रसाद पांडेय विधायक चुने गए। 1957 में कांग्रेस से शब्बीर हसन विधायक बने। 1962 में का चुनाव करिश्माई साबित हुआ, लोकसभा में कांग्रेस ने केसकर को टिकट दिया। जबकि गौरी शंकर कक्कड़ निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे।
उनका चुनाव चिन्ह और जहानाबाद से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे राम किशोर वर्मा का चुनाव चिन्ह साइकिल था। मतदाताओं ने केसकर को बाहरी कहकर नकारने के कारण जमकर साइकिल चली। जिससे राम किशोर वर्मा की लाटरी लग गई और वह विधायक बन गए।
1967 के चुनाव में कांग्रेस से प्रेम दत्त तिवारी चुनाव जीते, 1969 के मध्यावधि चुनाव में उदित नारायण शर्मा बीकेडी से विधायक बने। 1974 में कांग्रेस से प्रेम दत्त तिवारी फिर से चुने गए। 1977 के मध्यावधि चुनाव की जनता पार्टी की लहर में कासिम हसन विधायक बन गए।
1980 में उदित नारायण शर्मा की हत्या हो जाने के कारण 1981 में उपचुनाव हुआ और कांग्रेस ने उनके लड़के जगदीश नारायण शर्मा को टिकट दिया और वह विधायक बने। 1985 में कांग्रेस से प्रकाश नारायण अवस्थी चुने गए।
1989 के चुनाव से मंडल आयोग का ग्रहण इस सीट पर लगा और जिले की सभी सीटें जनता दल को चली गई। क्षत्रिय और मुस्लिम के कांग्रेस से खिसक जाने से यहां का भी समीकरण बिगड़ गया और उल्टी गिनती शुरू हो गई।
जनता दल से नरेश उत्तम विजयी हुए। 1991 में छत्रपाल वर्मा तो 1993 में मदन गोपाल वर्मा जनता दल से विधायक बने। 1996 में बसपा कांग्रेस गठबंधन से कासिम हसन बसपा प्रत्याशी बनकर विधायक बने।

2002 में समाजवादी पार्टी से मदन गोपाल वर्मा विजयी रहे। 1985 के बाद 2007 में बसपा से आदित्य पांडेय विधायक चुने गए। इसके बाद 2012 में फिर सपा से मदन गोपाल वर्मा विजयी हुए। 2017 में भाजपा के समर्थन से अपना दल के जय कुमार सिंह जैकी ने अपना दल एस से सफलता हासिल की।
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