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बाढ़ ने किया घर से दूर, अब पेट भरने का संकट
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मवेशियों का पेट भरने के लिए चराने लाते बच्चे। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
औंग। गंगा और पांडु नदी का जलस्तर थमने के बाद भी बाढ़ के कहर कम नहीं हुआ है। पानी अभी भी संपर्क मार्ग व खेतों के ऊपर से बह रहा है। कालीकुंडी के लोगों ने गांव छोड़ कर पांच किमी दूर कालोनियों में गृहस्थी रख ली है। वहीं पर खाना-पकाना हो रहा है। लोग अपना पेट तो जैसे-तैसे भर रहे हैं, लेकिन मवेशियों का पेट भरने की चिंता पशुपालकों को सता रही है।
गंगा नदी का जलस्तर 101.21 मीटर है, जो खतरे के निशान से 35 सेमी ऊपर है। गंगा किनारे के 14 गांव बाढ़ की चपेट में हैं, लेकिन कालीकुंडी गांव के 35 परिवार अपना घर छोड़ कर दरियापुर बांगर में प्रशासन की कालोनियों में अपना ठिकाना बना लिया है। कालीकुंडी से अपने गृहस्थी का सामान इन कालोनियों में सुरक्षित रख लिया हैं।
बाढ़ प्रभावित गांव के लोग तो राहत शिविर व कालोनियों में रहकर अपना पेट भर रहे हैं, लेकिन इन लोगों के सामने अपने मवेशियों का पेट भरने की दिक्कत हो गई है। बाढ़ में इनके खेत-खलिहान डूब गए हैं। मवेशियों को खिलाने के बोया गया हरा चारा नष्ट हो गया है। भूसा भी बाढ़ प्रभावित घरों में रखा हुआ है।
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काली कुंडी गांव के दिनेश ने कहा कि मवेशियों का पेट भरना सबसे बढ़ी दिक्कत है। ऊंचाई वाले क्षेत्र में लोगों ने फसलों की बुआई शुरू कर दी है। खेत भी खाली नहीं हैं, कि उनको चरा कर पेट भरा जा सके। लक्ष्मण ने कहा कि मवेशियों का पेट भरने के लिए सुबह से शाम तक जंगल में चराने के लिए ले जाना पड़ता है।
बाढ़ प्रभावित गांव....
दरियापुर बांगर, मदारपुर, दरियापुर, कटरी, बड़ाखेड़ा, नया खेड़ा, मल्लू खेड़ा, काली कुंडी, सदनहा बिंदकीफार्म, जाड़े का पुरवा, औसेरीखेड़ा, बेनीखेड़ा, बेरी नारी, रामघाट गांव हैं। बिंदकीफार्म, सदनहा, कालीकुंडी गांव के घरों में पानी घुस गया है।
आठ दिन के गंगा की बाढ़ रिपोर्ट:
दिन--- रिपोर्ट मीटर में शुक्रवार-- 99.30
शनिवार-- 99.76
रविवार-- 100.14
सोमवार-- 100.51
मंगलवार-- 101.10
बुधवार-- 101.15
गुरुवार-- 101.26
शुक्रवार-- 101.21
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गंगा नदी का जलस्तर 101.21 मीटर है, जो खतरे के निशान से 35 सेमी ऊपर है। गंगा किनारे के 14 गांव बाढ़ की चपेट में हैं, लेकिन कालीकुंडी गांव के 35 परिवार अपना घर छोड़ कर दरियापुर बांगर में प्रशासन की कालोनियों में अपना ठिकाना बना लिया है। कालीकुंडी से अपने गृहस्थी का सामान इन कालोनियों में सुरक्षित रख लिया हैं।
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बाढ़ प्रभावित गांव के लोग तो राहत शिविर व कालोनियों में रहकर अपना पेट भर रहे हैं, लेकिन इन लोगों के सामने अपने मवेशियों का पेट भरने की दिक्कत हो गई है। बाढ़ में इनके खेत-खलिहान डूब गए हैं। मवेशियों को खिलाने के बोया गया हरा चारा नष्ट हो गया है। भूसा भी बाढ़ प्रभावित घरों में रखा हुआ है।
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काली कुंडी गांव के दिनेश ने कहा कि मवेशियों का पेट भरना सबसे बढ़ी दिक्कत है। ऊंचाई वाले क्षेत्र में लोगों ने फसलों की बुआई शुरू कर दी है। खेत भी खाली नहीं हैं, कि उनको चरा कर पेट भरा जा सके। लक्ष्मण ने कहा कि मवेशियों का पेट भरने के लिए सुबह से शाम तक जंगल में चराने के लिए ले जाना पड़ता है।
बाढ़ प्रभावित गांव....
दरियापुर बांगर, मदारपुर, दरियापुर, कटरी, बड़ाखेड़ा, नया खेड़ा, मल्लू खेड़ा, काली कुंडी, सदनहा बिंदकीफार्म, जाड़े का पुरवा, औसेरीखेड़ा, बेनीखेड़ा, बेरी नारी, रामघाट गांव हैं। बिंदकीफार्म, सदनहा, कालीकुंडी गांव के घरों में पानी घुस गया है।
आठ दिन के गंगा की बाढ़ रिपोर्ट:
दिन--- रिपोर्ट मीटर में शुक्रवार-- 99.30
शनिवार-- 99.76
रविवार-- 100.14
सोमवार-- 100.51
मंगलवार-- 101.10
बुधवार-- 101.15
गुरुवार-- 101.26
शुक्रवार-- 101.21

नाव से खेतों की ओर जाता किसान। संवाद- फोटो : FATEHPUR

भिटोरा क्षेत्र के खेतों में भरे पानी से होकर निकलता किसान। संवाद- फोटो : FATEHPUR

राहत शिविर में खाना बनाने की तैयारी करती महिलाएं। संवाद- फोटो : FATEHPUR