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पहले भी आरोपों से घिर चुके हैं बहुआ ईओ
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4 दिसंबर को प्रकाशित खबर। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। इसे सिस्टम की कमी कहें या फिर ऊपर तक सेटिंग। छह माह में दो बार बहुआ ईओ के खिलाफ खुद जिलाधिकारी ने शासन को रिपोर्ट भेजी और कार्रवाई की संस्तुति की। लेकिन आज तक ईओ अपनी कुर्सी पर बरकरार हैं।
नियम विरुद्ध बरातशाला का टेंडर देने में फंसे नगर पंचायत बहुआ के ईओ राजकुमार पर इससे पहले भी कई आरोप लग चुके हैं। डीएम ने इनकी जांच कराई।
फरवरी माह में एसडीएम सदर ने जांच रिपोर्ट डीएम अपूर्वा दुबे को दी थी। जांच में यह तथ्य प्रमुखता से उजागर हुए थे कि ईओ नगर पंचायत क्षेत्र में आवासित नहीं हैं। कर्मचारियों को अनुपस्थित दिखाते हुए अनुपस्थित दिनों के मानदेय की धनराशि स्वयं फर्म से नगद प्राप्त करते हैं।
अनुपस्थित दिनों की धनराशि काटकर शेष उनके खातों में हस्तांतरण की जाती है, लेकिन अनुपस्थित तारीख की अवशेष राशि ईओ किस शासकीय लेखा शीर्षक में जमा करते हैं। इसका कोई हिसाब जांच में नहीं मिला था। इस क्रम में 179 आवासों में 12 शौचालय नहीं बने मिले थे। जबकि भुगतान सभी का हो गया था।
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इस जांच रिपोर्ट पर डीएम ने अगस्त माह में शासन को रिपोर्ट भेजकर ईओ के स्थानांतरण की संस्तुति की थी। मगर आज तक इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
शासन तक मामला पहुंचने के बाद भी ठंडा पड़ा
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की ओर से जो जांच कराई गई, उसकी रिपोर्ट शासन को एक बार नहीं बल्कि दो बार भेजी गई। इसे राजनीतिक दबाव कहें या फिर कुछ और लेकिन अभी तक ईओ के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
18 फरवरी को भेजी गई थी पहली रिपोर्ट
डीएम अपूर्वा दुबे ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट शासन को 18 फरवरी 2021 को भेजी थी। लेकिन 10 महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामला जहां का तहां ही है।
नगर पंचायत बहुआ के ईओ के स्थानांतरण की रिपोर्ट काफी पहले भेजी गई थी। इस पर अभी तक शासन की ओर से कोई भी जानकारी नहीं दी गई है। वह इस मामले में भी रिमाइंडर जल्द भेजेंगी। - अपूर्वा दुबे, जिलाधिकारी।
एसडीएम सदर ने जांच के दौरान जो भी दस्तावेज मांगे थे, उन्हें उपलब्ध कराए गए थे। कई आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। वह शासन की मंशा के अनुरूप अपना काम कर रहे हैं। - राजकुमार, ईओ नगर पंचायत बहुआ।
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नियम विरुद्ध बरातशाला का टेंडर देने में फंसे नगर पंचायत बहुआ के ईओ राजकुमार पर इससे पहले भी कई आरोप लग चुके हैं। डीएम ने इनकी जांच कराई।
फरवरी माह में एसडीएम सदर ने जांच रिपोर्ट डीएम अपूर्वा दुबे को दी थी। जांच में यह तथ्य प्रमुखता से उजागर हुए थे कि ईओ नगर पंचायत क्षेत्र में आवासित नहीं हैं। कर्मचारियों को अनुपस्थित दिखाते हुए अनुपस्थित दिनों के मानदेय की धनराशि स्वयं फर्म से नगद प्राप्त करते हैं।
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अनुपस्थित दिनों की धनराशि काटकर शेष उनके खातों में हस्तांतरण की जाती है, लेकिन अनुपस्थित तारीख की अवशेष राशि ईओ किस शासकीय लेखा शीर्षक में जमा करते हैं। इसका कोई हिसाब जांच में नहीं मिला था। इस क्रम में 179 आवासों में 12 शौचालय नहीं बने मिले थे। जबकि भुगतान सभी का हो गया था।
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इस जांच रिपोर्ट पर डीएम ने अगस्त माह में शासन को रिपोर्ट भेजकर ईओ के स्थानांतरण की संस्तुति की थी। मगर आज तक इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
शासन तक मामला पहुंचने के बाद भी ठंडा पड़ा
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की ओर से जो जांच कराई गई, उसकी रिपोर्ट शासन को एक बार नहीं बल्कि दो बार भेजी गई। इसे राजनीतिक दबाव कहें या फिर कुछ और लेकिन अभी तक ईओ के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
18 फरवरी को भेजी गई थी पहली रिपोर्ट
डीएम अपूर्वा दुबे ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट शासन को 18 फरवरी 2021 को भेजी थी। लेकिन 10 महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामला जहां का तहां ही है।
नगर पंचायत बहुआ के ईओ के स्थानांतरण की रिपोर्ट काफी पहले भेजी गई थी। इस पर अभी तक शासन की ओर से कोई भी जानकारी नहीं दी गई है। वह इस मामले में भी रिमाइंडर जल्द भेजेंगी। - अपूर्वा दुबे, जिलाधिकारी।
एसडीएम सदर ने जांच के दौरान जो भी दस्तावेज मांगे थे, उन्हें उपलब्ध कराए गए थे। कई आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। वह शासन की मंशा के अनुरूप अपना काम कर रहे हैं। - राजकुमार, ईओ नगर पंचायत बहुआ।