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जीका को लेकर एलर्ट लेकिन सिर्फ जुबानी ...

Tue, 02 Nov 2021 12:21 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 02 Nov 2021 12:21 AM IST
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fathepur news,Alert about Zika but just verbal
फतेहपुर। मच्छरों से फैलने वाले जीका वायरस को लेकर प्रदेश सरकार ने एलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। पड़ोसी जनपद कानपुर में यह वायरस धीरे-धीरे अपनी पैठ जमा रहा है।
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ऐसे में जनपद में एलर्ट की स्थिति सिर्फ जुबानी तौर पर ही नजर आ रही है। सीएमओ डॉ.राजेंद्र सिंह का दावा है कि जीका वायरस के मरीजों के लिए सीएचसी-पीएचसी स्तर तक बेड आरक्षित हैं।
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मगर जमीनी हकीकत इससे परे है। किसी भी पीएचसी-सीएचसी में आरक्षित बेडों का अता पता नहीं है। सिर्फ इतना ही नहीं प्रभारी चिकित्सकों को न तो जीका के लक्षण पता हैं और न ही इसे लेकर एलर्ट की कोई जानकारी है। हालांकि जिला अस्पताल में जीका के एलर्ट का असर देखने को मिल रहा है। यहां मरीजों के लिए बेड आरक्षित कर दिए गए हैं।
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जीका वायरस मच्छर जनित बीमारी है, जिसका खतरा गर्भवती महिलाओं को आम लोगों की अपेक्षा ज्यादा रहता है। पहले लखनऊ और फिर अब कानपुर में इसके रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
ऐसे में सरकार ने एलर्ट जारी किया है। इस एलर्ट को लेकर सीएमओ डॉ. राजेंद्र सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पीएचसी स्तर पर तीन-तीन और सीएचसी स्तर पर पांच-पांच बेड जीका मरीजों के लिए आरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मेडिकल टीमों को जीका के लक्षण के रोगी मिलने पर जांच के लिए सैंपल केजीएमसी लखनऊ भेजने को कहा गया है। सीएमओ के इस कथन की हकीकत जानने की कोशिश की गई तो यह माहौल कहीं देखने को नहीं मिला।
न तो किसी पीएचसी-सीएचसी में बेड आरक्षित हैं और न ही कहीं मेडिकल टीमों को जीका को लेकर एलर्ट की जानकारी है। हालांकि इससे इतर जिला पुरुष अस्पताल के सीएमएस डॉ. प्रभाकर ने बताया कि ट्रामा सेंटर के ऊपर वाले हिस्से में बने वार्ड में जीका मरीजों के लिए आरक्षित किया गया है।
संक्रमिक मच्छर के काटने से फैलता है रोग
जीका वायरस मुख्य रूप से एक संक्रमित मच्छर (एडीज इजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस) के काटने से लोगों में फैलता है। आमतौर पर बीमारी लक्षणों के साथ एक सप्ताह तक चलती है। यह हल्की होती है।
बहुत से लोगों में लक्षण नहीं दिखते हैं या सिर्फ हल्के लक्षण दिखते हैं। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान जीका वायरस इंफेक्शन गंभीर बर्थ डिफेक्ट (जन्म दोष) पैदा कर सकता है। इसे विज्ञान की भाषा में माइक्रोसेफली कहते हैं। अन्य गंभीर मस्तिष्क दोष भी हो सकते हैं।
जीका से आ सकती हैं स्वास्थ्य समस्याएं
जीका से संक्रमित कई लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या हल्के लक्षण दिखते हैं। ये कुछ दिनों से लेकर एक सप्ताह तक बने रहते हैं। मौजूदा अध्ययनों से पता चलता है कि गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) जीका से जुड़ा है।
यह नर्वस सिस्टम की असामान्य बीमारी है। वैसे, हाल में जीका वायरस संक्रमण वाले लोगों के केवल एक छोटे से वर्ग को जीबीएस हुआ है। एक बार जीका से संक्रमित हो जाने पर संभव है कि उस व्यक्ति को भविष्य में यह इंफेक्शन नहीं हो।
जीका के लक्षण
जीका वायरस बीमारी के सबसे आम लक्षण बुखार, दाने, सिरदर्द, जोड़ों में दर्द, आंखें लाल होना और मांसपेशियों में दर्द हैं। इसके लक्षण काफी कुछ डेंगू से मिलते-जुलते हैं। जीका से संक्रमित कई लोगों में लक्षण नहीं होते हैं या मामूली होते हैं। ये कई दिनों से लेकर एक सप्ताह तक रह सकते हैं।

जीका से बचाव के लिए यह करें
जीका से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने और अपने परिवार को मच्छरों के काटने से बचाएं। इंसेक्ट रेपलेंट का इस्तेमाल करें। पूरी बाजू की शर्ट और फुल पैंट पहनें। अगर खुले में सोते हैं तो मच्छरदानी लगाएं।
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