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कंडम हो गए 2.80 करोड़ से बने शौचालयों
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फतेहपुर। एक साल पहले 2.80 करोड़ रुपये से बनकर तैयार हुए 23 सार्वजनिक शौचालय में 16 चालू होने से पहले ही कंडम हो गए। खास बात यह है कि कर्मचारियों की नियुक्ति न होने के कारण इन शौचालयों में ज्यादातर तो एक दिन भी इस्तेमाल नहीं हुए। पानी की टंकी, दरवाजे और खिड़कियां क्षतिग्रस्त हो गईं।
सदर नगर पालिका क्षेत्र की दो लाख की आबादी को खुले में शौच जाने से रोकने के लिए शहर में सार्वजनिक स्थानों पर 2018 में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण हुआ था। 376 सीटों वाले इन 23 शौचालयों के निर्माण के लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत बजट मिला था।
इन शौचालयों का निर्माण 2018 में शुरू हुआ 2020 में पूरा हुआ था। इनके संचालन की जिम्मेदारी कानपुर की संस्था तनिष्क नैंसी सेवा समिति को सौंपी गई थी। इसके साथ ही 5253 लोगों के घरों में निजी शौचालय निर्माण के लिए प्रति लाभार्थी आठ हजार की धनराशि प्रदान की गई थी। यह सब करने के बाद जिला प्रशासन ने 2020 की शुरुआत में ही शहर को ओडीएफ घोषित कर दिया।
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इसके बाद सार्वजनिक शौचालयों की तरफ मुड़कर नहीं देखा गया। सात सार्वजनिक शौचालयों को छोड़ दें तो 16 बंद पड़े हैं। इनमें लगी पानी की टंकी लोग उखाड़ ले गए हैं और अराजकतत्वों ने दरवाजा खिड़कियां और वाटर लाइन तक तोड़ दी हैं। यह शौचालय संचालित न हो पाने के कारण शहर की बड़ी आबादी खुले में शौच जाने को मजबूर है।
यहां के शौचालय हैं बंद
विनोवा नगर, अंदौली, हरगनपुर, पीरनपुर, गढीवा, तांबेश्वर, शादीपुर, अस्ती, हरिहरगंज, शेषपुर उनवां, अधारपुर, अजगवां आदि।
संचालित शौचालय
कलक्ट्रेट, राधानगर विद्युत उपकेंद्र, राधानगर चौराहा, जिला अस्पताल, वर्मा चौराहा, डाक बंगला, नई तहसील।
फोटो-6-रोहित
गढ़ीवा निवासी रोहित का कहना है कि नगर पालिका ने शौचालयों का निर्माण कराकर कर्मचारी नियुक्त नहीं किए । इतना ही नहीं पानी का कनेक्शन भी नहीं किया। ऐसे में लोग इनका उपयोग नहीं कर पा रहे। मजबूरन लोगों को खुले में शौच जाना पड़ता है।
.........................
फोटो-7- तन्नू
पीरनपुर निवासी तन्नू कहते हैं कि शौचालय बनाकर इनकी देखरेख नहीं की गई। ऐसे में अराजकतत्वों ने दरवाजे, खिड़कियां तोड़ दी हैं। पानी की टंकी भी गायब हैं। जलापूर्ति की व्यवस्था न होने के कारण लोग मजबूरन खुले में शौच जाते हैं।
...............................
बयान:-
सार्वजनिक शौचालयों के संचालन के लिए कानपुर की संस्था से समझौता किया गया है, लेकिन अभी तक इस समिति ने कुछ ही स्थानों पर सफाई कर्मचारी नियुक्त किए हैं। समिति को रिमाइंडर भेजा गया है। क्षतिग्रस्त शौचालयों की मरम्मत के लिए फिलहाल उनके पास कोई बजट नहीं है।
- कृष्ण कुमार सिंह, कार्यक्रम प्रबंधक, स्वच्छ भारत मिशन।
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सदर नगर पालिका क्षेत्र की दो लाख की आबादी को खुले में शौच जाने से रोकने के लिए शहर में सार्वजनिक स्थानों पर 2018 में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण हुआ था। 376 सीटों वाले इन 23 शौचालयों के निर्माण के लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत बजट मिला था।
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इन शौचालयों का निर्माण 2018 में शुरू हुआ 2020 में पूरा हुआ था। इनके संचालन की जिम्मेदारी कानपुर की संस्था तनिष्क नैंसी सेवा समिति को सौंपी गई थी। इसके साथ ही 5253 लोगों के घरों में निजी शौचालय निर्माण के लिए प्रति लाभार्थी आठ हजार की धनराशि प्रदान की गई थी। यह सब करने के बाद जिला प्रशासन ने 2020 की शुरुआत में ही शहर को ओडीएफ घोषित कर दिया।
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इसके बाद सार्वजनिक शौचालयों की तरफ मुड़कर नहीं देखा गया। सात सार्वजनिक शौचालयों को छोड़ दें तो 16 बंद पड़े हैं। इनमें लगी पानी की टंकी लोग उखाड़ ले गए हैं और अराजकतत्वों ने दरवाजा खिड़कियां और वाटर लाइन तक तोड़ दी हैं। यह शौचालय संचालित न हो पाने के कारण शहर की बड़ी आबादी खुले में शौच जाने को मजबूर है।
यहां के शौचालय हैं बंद
विनोवा नगर, अंदौली, हरगनपुर, पीरनपुर, गढीवा, तांबेश्वर, शादीपुर, अस्ती, हरिहरगंज, शेषपुर उनवां, अधारपुर, अजगवां आदि।
संचालित शौचालय
कलक्ट्रेट, राधानगर विद्युत उपकेंद्र, राधानगर चौराहा, जिला अस्पताल, वर्मा चौराहा, डाक बंगला, नई तहसील।
फोटो-6-रोहित
गढ़ीवा निवासी रोहित का कहना है कि नगर पालिका ने शौचालयों का निर्माण कराकर कर्मचारी नियुक्त नहीं किए । इतना ही नहीं पानी का कनेक्शन भी नहीं किया। ऐसे में लोग इनका उपयोग नहीं कर पा रहे। मजबूरन लोगों को खुले में शौच जाना पड़ता है।
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फोटो-7- तन्नू
पीरनपुर निवासी तन्नू कहते हैं कि शौचालय बनाकर इनकी देखरेख नहीं की गई। ऐसे में अराजकतत्वों ने दरवाजे, खिड़कियां तोड़ दी हैं। पानी की टंकी भी गायब हैं। जलापूर्ति की व्यवस्था न होने के कारण लोग मजबूरन खुले में शौच जाते हैं।
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बयान:-
सार्वजनिक शौचालयों के संचालन के लिए कानपुर की संस्था से समझौता किया गया है, लेकिन अभी तक इस समिति ने कुछ ही स्थानों पर सफाई कर्मचारी नियुक्त किए हैं। समिति को रिमाइंडर भेजा गया है। क्षतिग्रस्त शौचालयों की मरम्मत के लिए फिलहाल उनके पास कोई बजट नहीं है।
- कृष्ण कुमार सिंह, कार्यक्रम प्रबंधक, स्वच्छ भारत मिशन।