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लॉकडाउन में गन्ना की बिक्री बंद, खर्च निकालना मुश्किल
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सातो धरमपुर में खड़ी गन्ना कि फसल
- फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। लॉकडाउन में भले ही सरकार ने किसानों को छूट दे रखी है, लेकिन जूस की दुकानें बंद होने से गन्ने की बिक्री बंद है। सातो धरमपुर गांव में 12 बीघा जूस वाले गन्ने की फसल खड़ी है। फसल तैयार करने में किसान कुलदीप सिंह के तीन लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। अब बिक्री का समय आया तो व्यापारी ही नहीं मिल रहे हैं।
हसवा ब्लाक के सातो धरमपुर गांव के किसान कुलदीप सिंह ने पिछले वर्ष मार्च में 12 बीघा जूस वाला गन्ना बोया था। गर्मी में गन्ने की तेज बिक्री होती है। लॉकडाउन के चलते गन्ना जूस की दुकानें बंद हैं। लिहाजा कुलदीप का अभी तक एक बीघा गन्ना भी नहीं बिका। तेज धूप और गर्मी से गन्ना सूखने लगा है।
कुलदीप का कहना है कि पिछले साल दो बीघा गन्ना डेढ़ लाख रुपये में बिका था। इस बार नौ लाख रुपये का नुकसान हो जाएगा। एक बीघा गन्ना बोने में एक हजार बोने वाला गन्ना लगता है। एक गन्ने की कीमत आठ से 10 रुपये होती है। दीमक से बचाव के लिए दवा का छिड़काव होता है। तीन बार गुड़ाई कराई जाती है। फिर खाद का छिड़काव होता है। साल भर में छह बार सिंचाई करनी पड़ती है। इस साल तो लागत निकलना भी मुश्किल है।
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हसवा ब्लाक के सातो धरमपुर गांव के किसान कुलदीप सिंह ने पिछले वर्ष मार्च में 12 बीघा जूस वाला गन्ना बोया था। गर्मी में गन्ने की तेज बिक्री होती है। लॉकडाउन के चलते गन्ना जूस की दुकानें बंद हैं। लिहाजा कुलदीप का अभी तक एक बीघा गन्ना भी नहीं बिका। तेज धूप और गर्मी से गन्ना सूखने लगा है।
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कुलदीप का कहना है कि पिछले साल दो बीघा गन्ना डेढ़ लाख रुपये में बिका था। इस बार नौ लाख रुपये का नुकसान हो जाएगा। एक बीघा गन्ना बोने में एक हजार बोने वाला गन्ना लगता है। एक गन्ने की कीमत आठ से 10 रुपये होती है। दीमक से बचाव के लिए दवा का छिड़काव होता है। तीन बार गुड़ाई कराई जाती है। फिर खाद का छिड़काव होता है। साल भर में छह बार सिंचाई करनी पड़ती है। इस साल तो लागत निकलना भी मुश्किल है।
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