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Fatehpur News: ठंड में आलू की फसल में लगने वाले झुलसा रोग से किसान परेशान

Mon, 06 Jan 2025 12:50 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jan 2025 12:50 AM IST
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Farmers worried about blight disease in potato crop in winter
थरियांव में आलू की फसल। - फोटो : थरियांव में आलू की फसल।
फतेहपुर। मौसम में बदलाव व तापमान गिरने से आलू की फसल में कई तरह के रोग लगने की संभावना है। अगर समय रहते बचाव न किया गया, तो आलू की खेती करने वाले किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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जनपद में करीब 12 हजार हेक्टेयर भूमि पर किसान आलू का उत्पादन कर रहा है। लेकिन इस समय किसान गिरते तापमान के साथ ठंड में आलू की फसल पर लगने वाले झुलसा रोग को लेकर परेशान है। कृषि वैज्ञानिक जगदीश किशोर ने बताया है कि ऐसे मौसम में आलू की फसल को झुलसा व अन्य बीमारियां बहुत अधिक नुकसान पहुंचाती हैं। इससे बचाव के लिए किसान सावधानी बरतें और जरूरी दवाओं का छिड़काव करें। बीते दिनों हुई बारिश व कोहरे आलू की फसल के लिए नुकसान देय रहा। अभी मौसम साफ है नहीं है। यह मौसम आलू फसल के लिए ठीक नहीं है। आने वाले समय में यदि बदली व कोहरा अधिक पड़ेगा तो आलू की फसल में झुलसा व अन्य बीमारियां लगने की अधिक संभावना रहेगी। इससे बचाव करना बहुत आवश्यक है। आलू की झुलसा बीमारी में रोग के लक्षण सबसे पहले पत्तियों पर धब्बे के रूप में शुरू होता है । यह धब्बा दो से चार दिनों में बहुत तेजी से पूरी फसल पर फैल जाता है जिसके कारण खेत की पूरी फसल झुलस जाती है। इसके अलावा इस बीमारी का असर पौधे के तने से होते हुए जमीन में आलू के कंदों पर भी हो जाता है। परिणाम स्वरूप आलू सड़ने लगते हैं और पूरी फसल बर्बाद होने लगती है। इससे उपज में 40 से 60 प्रतिशत या उससे भी अधिक नुकसान हो जाता है।
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ऐसे करें बचाव
प्रतिदिन आलू की फसल का निरीक्षण जरूरी है। जिन खेतों के पास पेड़ पौधे नहीं है। उन खेतों में नमी बनाए रखे। फसल में यूरिया का प्रयोग अधिक न करें। घुलनशील सल्फर दो ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें। लक्षण दिखाई देते ही फफूंदी नाशक कॉपर ऑक्सिक्लोराइड तीन ग्राम प्रति लीटर अथवा मैनकोज़ेब दो ग्राम प्रति लीटर की दर से फसल पर छिड़कें। रोग की उग्र अवस्था में रिडोमिल गोल्ड 2 ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें।
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