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किसी भी स्कूल में पाई जा सकती है रसोइया की नौकरी
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फतेहपुर। मध्याह्न भोजन योजना की 976 रसोइयों को अभयदान मिल गया है। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने रसोइया की नौकरी के लिए संबंधित स्कूल में पाल्य के पढ़ने की अनिवार्यता खत्म कर दी है। बड़ी कक्षाएं पहुंचे पाल्यों की मां भी किसी स्कूल में रसोइए की नौकरी पा सकती हैं।
जिले के 2650 परिषदीय स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत 67 सौ रसोइयां कार्यरत हैं। रसोइया चयन के लिए आवेदक के पाल्य को संबंधित स्कूल में पढ़ना अनिवार्य था। स्कूल में पढ़ने वाले पाल्य की मां ही रसोइया पाती थी। जिन महिलाओं का पाल्य बड़ी कक्षाओं में निकल जाते थे, उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ता था। विशेष
सचिव देवप्रताप सिंह ने अब रसोइया चयन के नियम में परिवर्तन करते हुए पाल्य की अनिवार्यता खत्म कर दी है। ऐसे में जिले में कार्यरत 976 रसोइयों की नौकरी पर मंडरा रहा खतरा खत्म हो गया है। एमडीएम के जिला समन्वयक आशीष दीक्षित ने बताया कि रसोइया चयन नियमों में परिवर्तन से रसोइयों को मनमानी तरीके से निकाला भी नहीं जा सकेगा।
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जिले के 2650 परिषदीय स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत 67 सौ रसोइयां कार्यरत हैं। रसोइया चयन के लिए आवेदक के पाल्य को संबंधित स्कूल में पढ़ना अनिवार्य था। स्कूल में पढ़ने वाले पाल्य की मां ही रसोइया पाती थी। जिन महिलाओं का पाल्य बड़ी कक्षाओं में निकल जाते थे, उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ता था। विशेष
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सचिव देवप्रताप सिंह ने अब रसोइया चयन के नियम में परिवर्तन करते हुए पाल्य की अनिवार्यता खत्म कर दी है। ऐसे में जिले में कार्यरत 976 रसोइयों की नौकरी पर मंडरा रहा खतरा खत्म हो गया है। एमडीएम के जिला समन्वयक आशीष दीक्षित ने बताया कि रसोइया चयन नियमों में परिवर्तन से रसोइयों को मनमानी तरीके से निकाला भी नहीं जा सकेगा।
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