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भीषण गर्मी में बिजली संकट ने किया बेहाल
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फतेहपुर। करीब 20 दिनों से धान की रोपाई में चल रहे ट्यूबवेलों ने ग्रामीण इलाकों के फीडरों पर लोड बढ़ा दिया है। जिले के करीब 34 उपकेंद्रों से ओवरलोड के चलते आपूर्ति चरमरा गई है। उपकेंद्रों से आधे गांवों को एक दिन और आधों को दूसरे दिन बिजली दी जाती है। अफसरों का कहना है कि बारिश के बाद ओवरलोडिंग की समस्या दूर हो सकेगी।
जिले लोगों को बिजली देने के लिए 52 उपकेंद्र हैं। इनमें नगरीय क्षेत्र के 18 उपकेंद्रों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर उपकेंद्र ओवरलोडिंग से परेशान हैं। इनसे करीब 30 हजार किसानों ने ट्यूबवेल के लिए कनेक्सन ले रखा है। बिजली विभाग ने सरकारी के अलावा निजी ट्यूबवेलों को कनेक्शन को बांट दिए लेकिन उपकेंद्र की क्षमता उस हिसाब से नहीं बढ़ाई। इस समय धान की रोपाई का सीजन है। किसानों ने ट्यूबवेल के स्टार्टर को ऑटो पर लगा रखा है। बिजली आने के 10 सेकेंड में नलकूप खुद चालू हो जाते हैं। एक साथ सभी ट्यूबवेल चलने से ग्रामीण क्षेत्र के सभी उपकेंद्र ओवरलोड हो गए हैं।
तीन फेस तार से ट्यूबवेलों को चलाने के लिए 440 वोल्ट करंट मिलना चाहिए। लोड बढ़ने के कारण इस समय 200 वोल्ट करंट ही पहुंचता है। इससे ट्यूबवेलों से निकल रहे पानी की क्षमता आधी रहती है और कम वोल्टेज के कारण फाल्ट भी होता है। कभी ट्रांसफार्मर जलता है, तो कभी ट्यूबवेल की मोटर खराब हो रही है। धान की रोपाई न पिछड़े इस उद्देश्य से किसान कम वोल्टेज में भी ट्यूबवेल चलाने को मजबूर हैं।
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भैरमपुर गांव के किसान राजेश द्विवेदी ने बताया कि जब भी फसलों की सिंचाई का समय आता है, तो थरियांव उपकेंद्र में ओवरलोड की समस्या शुरू हो जाती है। इस समय धान की रोपाई करनी है। बारिश भी नहीं हो रही है और बिजली एक दिन छोड़कर दी जाती है। उसमें भी लो-वोल्टेज की समस्या बनी रहती है।
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कोर्रा जहानपुर गांव निवासी राजेंद्र मौर्य ने कहा कि बिजली विभाग ने ट्यूबवेल के कनेक्शन बांट दिए और किसानों ने विभाग में जमानत धनराशि भी जमा की है, लेकिन उपकेंद्र की मशीनों और हाईटेंशन तार अधिक क्षमता के नहीं लगाए गए हैं। इससे जरूरत के समय बिजली की समस्या होती है।
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बारिश न होने के कारण सभी ट्यूबवेलों का संचालन एक साथ शुरू हो जाता है। अन्य सीजन में कुछ ट्यूबवेल चलते हैं, तो कुछ बंद रहते हैं। साथ ही गर्मी के कारण कूलर, पंखा भी चल चल रह हैं। इससे मशीनें ओवरलोड हैं। बारिश होने पर इस समस्या से निजात मिलेगी।
- मेघ सिंह, अधिशासी अभिंयता, विद्युत वितरण खंड
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जिले लोगों को बिजली देने के लिए 52 उपकेंद्र हैं। इनमें नगरीय क्षेत्र के 18 उपकेंद्रों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर उपकेंद्र ओवरलोडिंग से परेशान हैं। इनसे करीब 30 हजार किसानों ने ट्यूबवेल के लिए कनेक्सन ले रखा है। बिजली विभाग ने सरकारी के अलावा निजी ट्यूबवेलों को कनेक्शन को बांट दिए लेकिन उपकेंद्र की क्षमता उस हिसाब से नहीं बढ़ाई। इस समय धान की रोपाई का सीजन है। किसानों ने ट्यूबवेल के स्टार्टर को ऑटो पर लगा रखा है। बिजली आने के 10 सेकेंड में नलकूप खुद चालू हो जाते हैं। एक साथ सभी ट्यूबवेल चलने से ग्रामीण क्षेत्र के सभी उपकेंद्र ओवरलोड हो गए हैं।
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तीन फेस तार से ट्यूबवेलों को चलाने के लिए 440 वोल्ट करंट मिलना चाहिए। लोड बढ़ने के कारण इस समय 200 वोल्ट करंट ही पहुंचता है। इससे ट्यूबवेलों से निकल रहे पानी की क्षमता आधी रहती है और कम वोल्टेज के कारण फाल्ट भी होता है। कभी ट्रांसफार्मर जलता है, तो कभी ट्यूबवेल की मोटर खराब हो रही है। धान की रोपाई न पिछड़े इस उद्देश्य से किसान कम वोल्टेज में भी ट्यूबवेल चलाने को मजबूर हैं।
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भैरमपुर गांव के किसान राजेश द्विवेदी ने बताया कि जब भी फसलों की सिंचाई का समय आता है, तो थरियांव उपकेंद्र में ओवरलोड की समस्या शुरू हो जाती है। इस समय धान की रोपाई करनी है। बारिश भी नहीं हो रही है और बिजली एक दिन छोड़कर दी जाती है। उसमें भी लो-वोल्टेज की समस्या बनी रहती है।
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कोर्रा जहानपुर गांव निवासी राजेंद्र मौर्य ने कहा कि बिजली विभाग ने ट्यूबवेल के कनेक्शन बांट दिए और किसानों ने विभाग में जमानत धनराशि भी जमा की है, लेकिन उपकेंद्र की मशीनों और हाईटेंशन तार अधिक क्षमता के नहीं लगाए गए हैं। इससे जरूरत के समय बिजली की समस्या होती है।
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बारिश न होने के कारण सभी ट्यूबवेलों का संचालन एक साथ शुरू हो जाता है। अन्य सीजन में कुछ ट्यूबवेल चलते हैं, तो कुछ बंद रहते हैं। साथ ही गर्मी के कारण कूलर, पंखा भी चल चल रह हैं। इससे मशीनें ओवरलोड हैं। बारिश होने पर इस समस्या से निजात मिलेगी।
- मेघ सिंह, अधिशासी अभिंयता, विद्युत वितरण खंड