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Fatehpur News: रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगा सहजन, रोपे जाएंगे छह लाख पौधे
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फोटो-10-वन विभाग की नर्सरी में लगे सहजन के पौध। संवाद
फतेहपुर। वन विभाग गुणों के खजाने के रूप में पहचाने जाने वाले सहजन के छह लाख पौधों का रोपण जिले में कराया। यह पौधरोपण परिषदीय विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, सीएचसी, पीएचसी सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों पर किया जाएगा। इससे मधुमेह नियंत्रण, वजन कम करने, अल्सर में राहत और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सहजन को मोरिंगा भी कहा जाता है। यह औषधीय गुणों से भरपूर है। इसका इस्तेमाल सब्जी, सूप और दाल में किया जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, फोलेट, कैल्शियम, आयरन, जिंक, सोडियम, पोटेशियम और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसकी पत्तियों में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, सी, के और बीटा कैरोटीन होता है। यह आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक है।
इसी उद्देश्य से वन विभाग जिलेवासियों की सेहत सुधारने और समूह की महिलाओं को रोजगार देने के लिए इसका बड़े पैमाने पर रोपण करा रहा है। डीएफओ ने बताया कि सहजन के लिए उन्नतशील ओडीसी थ्री वैरायटी का बीज तमिलनाडु से मंगवाया गया था। वन विभाग की नर्सरी में पौध तैयार कर ली गई है।
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आगामी माह सहजन भंडारा कार्यक्रम के तहत स्कूल, अस्पताल और आंगनबाड़ी केंद्रों में पौधों का वितरण कर रोपण कराया जाएगा। साथ ही स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को पौधरोपण से जोड़कर सहजन की पत्ती का पाउडर बनवाकर बिक्री कराई जाएगी। इसके लिए विभाग बाजार भी उपलब्ध कराएगा। (संवाद)
सहजन के सेवन से दिल रहता है स्वस्थ
सीएमएस डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि सहजन बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाने और बुजुर्गों में बोन डेंसिटी के खतरे को कम करने में सहायक है। इसमें मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट सामान्य संक्रमण से बचाते हैं। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण अस्थमा, खांसी और श्वसन समस्याओं के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं। यह हृदय को स्वस्थ रखने के साथ किडनी से विषाक्त पदार्थ निकालकर शरीर को डिटॉक्स करने में भी सहायक है।
सहजन औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके सेवन से कई बीमारियों से बचा रहता है। वन महोत्सव के दौरान इस बार जिले में करीब छह लाख पौधे लगाए जाएंगे। आगामी माह सहजन भंडारा कार्यक्रम के तहत पौधों का वितरण कर लोगों को इसके लाभों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
- गंगादत्त मिश्रा, डीएफओ।
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सहजन को मोरिंगा भी कहा जाता है। यह औषधीय गुणों से भरपूर है। इसका इस्तेमाल सब्जी, सूप और दाल में किया जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, फोलेट, कैल्शियम, आयरन, जिंक, सोडियम, पोटेशियम और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसकी पत्तियों में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, सी, के और बीटा कैरोटीन होता है। यह आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक है।
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इसी उद्देश्य से वन विभाग जिलेवासियों की सेहत सुधारने और समूह की महिलाओं को रोजगार देने के लिए इसका बड़े पैमाने पर रोपण करा रहा है। डीएफओ ने बताया कि सहजन के लिए उन्नतशील ओडीसी थ्री वैरायटी का बीज तमिलनाडु से मंगवाया गया था। वन विभाग की नर्सरी में पौध तैयार कर ली गई है।
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आगामी माह सहजन भंडारा कार्यक्रम के तहत स्कूल, अस्पताल और आंगनबाड़ी केंद्रों में पौधों का वितरण कर रोपण कराया जाएगा। साथ ही स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को पौधरोपण से जोड़कर सहजन की पत्ती का पाउडर बनवाकर बिक्री कराई जाएगी। इसके लिए विभाग बाजार भी उपलब्ध कराएगा। (संवाद)
सहजन के सेवन से दिल रहता है स्वस्थ
सीएमएस डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि सहजन बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाने और बुजुर्गों में बोन डेंसिटी के खतरे को कम करने में सहायक है। इसमें मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट सामान्य संक्रमण से बचाते हैं। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण अस्थमा, खांसी और श्वसन समस्याओं के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं। यह हृदय को स्वस्थ रखने के साथ किडनी से विषाक्त पदार्थ निकालकर शरीर को डिटॉक्स करने में भी सहायक है।
सहजन औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके सेवन से कई बीमारियों से बचा रहता है। वन महोत्सव के दौरान इस बार जिले में करीब छह लाख पौधे लगाए जाएंगे। आगामी माह सहजन भंडारा कार्यक्रम के तहत पौधों का वितरण कर लोगों को इसके लाभों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
- गंगादत्त मिश्रा, डीएफओ।

फोटो-10-वन विभाग की नर्सरी में लगे सहजन के पौध। संवाद