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याद मत दिलाओ वह मंजर
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फोटो- 5 - संजय
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6- अनिल
7- लल्लू
8- प्रवीण कुमार
याद मत दिलाओ वह मंजर - लुधियाना से लौटे प्रवासियों ने सुनाई व्यथा संवाद न्यूज़ एजेंसी फतेहपुर। लुधियाना से लौटे कामगारों की व्यथा बहुत ही कष्टदायक रही। यही वजह है कि ज्यादातर ने बीते दिनों की याद ना दिलाने की बात कही । खागा तहसील के कोट गांव के रहने वाले संजय कुमार लुधियाना में सिलाई का काम करते थे । वह 4 साल पहले घर से लुधियाना प्रांत गए थे । उन्होंने बताया कि काम धंधा बंद हो जाने से पैसा खत्म हो गया । खाने तक के लाले पड़ गए थे । कैसे-कैसे दिन गुजारा हम ही जानते हैं। उस समय को अब याद करना नहीं चाहते। इसी तहसील के ईट गांव के रहने वाले अनिल ने बताया कि दीपावली के पहले लोहा फैक्ट्री में काम करने लुधियाना गया था । सब कुछ अच्छा चल रहा था कि लॉक डाउन लग गया। कुछ दिन तो पैसे चले उसके बाद पैसे खत्म हो जाने पर यही सोचा था कि हम भी पैदल चलकर ही गांव पहुंचेंगे। गनीमत रही कि रेलवे टिकट नहीं लगा और आ गए। अगर टिकट लगा होता तो हमारी भी हालत खराब हो जाती। पड़ोसी जिले कौशांबी के सिराथू में रहने वाले लल्लू लुधियाना में सिलाई मशीन का कवर बनाते थे। 2 साल पहले लुधियाना गए थे। लल्लू ने बताया कि कोरोनावायरस के चलते बंद हो गया। नौकरी बंद हो जाने से माली हालत खराब हो गई। जैसे तैसे खाने-पीने का बंदोबस्त किया बड़ी मुश्किल से यहां तक आ पाए हैं। अच्छी बात यही रही कि यात्रा का टिकट नहीं लगा । हालत इतनी खराब हो गई कि टिकट कटाने के पैसे नहीं बचे थे। एक और पड़ोसी जिले उन्नाव निवासी प्रवीण कुमार ने बताया कि वह कंबल की फैक्ट्री में काम करते थे । यह पूरी तरह से खाली हो गई थी। पूछ कर लग डाउन के दौरान मिले जख्मों को न कुरे दिए।