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सिर की मामूली चोट को हल्के में न लें: कुलपति
Thu, 21 Mar 2024 12:47 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
Updated Thu, 21 Mar 2024 12:47 AM IST
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फोटो 05:::::
- आयुर्विज्ञान विवि में मनाया गया गया वर्ल्ड हेड इंजरी अवेयरनेस डे
- मामूली चोट भी तंत्रिका तंत्र की बड़ी क्षति का कारण बन सकती है
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। हर वर्ष 20 मार्च को वर्ल्ड हेड इंजरी अवेयरनेस डे मनाया जाता है। इसके तहत बुधवार को आयुर्विज्ञान विवि में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सिर की मामूली चोट को भी हल्के में न लेने की सलाह दी गई।
इस दौरान लोगों को जागरूक करने के लिए कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। उनकी अध्यक्षता में एक संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। कुलपति ने कहा कि सिर की चोट की अनदेखी आपके स्वास्थ्य के लिए पड़ सकती है। प्रमुख उद्देश्य है कि लोग सिर की चोट के संदर्भ में जागरूक हों।
उन्होंने कहा कि सर में किसी भी कारण से हल्की या गंभीर चोट लगने से तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क की बड़ी क्षति का कारण बन सकती है। कई बार स्थायी या अस्थायी विकलांगता या मृत्यु का कारण भी बन जाता है। इसलिए सिर पर चोट यदि लगे तो तत्काल सही जांच और इलाज बहुत जरूरी है।
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मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. दिनेश बगड़िया ने मरीज के सिर में चोट होने पर चिकित्सकीय प्रबंधन के संदर्भ में महत्वपूर्ण जानकारी दी और अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। आईएमए अध्यक्ष डॉ. डीके सिंह ने भी उपस्थित छात्र-छात्राओं को जागरूक किया और अपील की सभी वाहन चलाते समय हेलमेट और सीट बेल्ट जरूर पहनें।
इमरजेंसी एवं ट्रामा विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ प्रशांत कुमार मिश्रा ने सभी को आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम प्रति कुलपति प्रो. डॉ. रमाकांत यादव, कुल सचिव डॉ चंद्रवीर, संकाय अध्यक्ष प्रो. डॉ. आदेश कुमार, इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर के सभी डॉक्टर्स व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
समय पर इलाज से बच सकती है कई जान
चिकित्सा अधीक्षक एवं जनरल सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि हेड इंजरी से नुकसान, हादसे की प्रकृति यानि माइल्ड (हल्के) और सीवियर (गंभीर) पर निर्भर करता है। किसी भी स्थिति में सिर की चोट का समय पर जांच व उपचार जरूरी है। शुरुआत में यानी गोल्डन पीरियड में मेडिकल सुविधा मिल जाने के कारण मरीज की जान बच सकती है। इसके लिए जरूरी है कि संबंधित अस्पताल में एक्सरे, सीटी स्कैन या एमआरआई सहित अन्य जांच व उपचार की सुविधा मरीज को मिले।
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ऐसे करें सर की चोट का बचाव
वाहन चलाते समय हेलमेट और सीट बेल्ट अवश्य लगाएं। शराब पीकर वाहन नहीं चलाएं। अधिक थकावट और नींद में भी वाहन न चलाएं।क्रिकेट या अन्य खेल खेलते समय हेलमेट का प्रयोग करें।
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- आयुर्विज्ञान विवि में मनाया गया गया वर्ल्ड हेड इंजरी अवेयरनेस डे
- मामूली चोट भी तंत्रिका तंत्र की बड़ी क्षति का कारण बन सकती है
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। हर वर्ष 20 मार्च को वर्ल्ड हेड इंजरी अवेयरनेस डे मनाया जाता है। इसके तहत बुधवार को आयुर्विज्ञान विवि में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सिर की मामूली चोट को भी हल्के में न लेने की सलाह दी गई।
इस दौरान लोगों को जागरूक करने के लिए कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। उनकी अध्यक्षता में एक संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। कुलपति ने कहा कि सिर की चोट की अनदेखी आपके स्वास्थ्य के लिए पड़ सकती है। प्रमुख उद्देश्य है कि लोग सिर की चोट के संदर्भ में जागरूक हों।
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उन्होंने कहा कि सर में किसी भी कारण से हल्की या गंभीर चोट लगने से तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क की बड़ी क्षति का कारण बन सकती है। कई बार स्थायी या अस्थायी विकलांगता या मृत्यु का कारण भी बन जाता है। इसलिए सिर पर चोट यदि लगे तो तत्काल सही जांच और इलाज बहुत जरूरी है।
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मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. दिनेश बगड़िया ने मरीज के सिर में चोट होने पर चिकित्सकीय प्रबंधन के संदर्भ में महत्वपूर्ण जानकारी दी और अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। आईएमए अध्यक्ष डॉ. डीके सिंह ने भी उपस्थित छात्र-छात्राओं को जागरूक किया और अपील की सभी वाहन चलाते समय हेलमेट और सीट बेल्ट जरूर पहनें।
इमरजेंसी एवं ट्रामा विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ प्रशांत कुमार मिश्रा ने सभी को आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम प्रति कुलपति प्रो. डॉ. रमाकांत यादव, कुल सचिव डॉ चंद्रवीर, संकाय अध्यक्ष प्रो. डॉ. आदेश कुमार, इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर के सभी डॉक्टर्स व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
समय पर इलाज से बच सकती है कई जान
चिकित्सा अधीक्षक एवं जनरल सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि हेड इंजरी से नुकसान, हादसे की प्रकृति यानि माइल्ड (हल्के) और सीवियर (गंभीर) पर निर्भर करता है। किसी भी स्थिति में सिर की चोट का समय पर जांच व उपचार जरूरी है। शुरुआत में यानी गोल्डन पीरियड में मेडिकल सुविधा मिल जाने के कारण मरीज की जान बच सकती है। इसके लिए जरूरी है कि संबंधित अस्पताल में एक्सरे, सीटी स्कैन या एमआरआई सहित अन्य जांच व उपचार की सुविधा मरीज को मिले।
ऐसे करें सर की चोट का बचाव
वाहन चलाते समय हेलमेट और सीट बेल्ट अवश्य लगाएं। शराब पीकर वाहन नहीं चलाएं। अधिक थकावट और नींद में भी वाहन न चलाएं।क्रिकेट या अन्य खेल खेलते समय हेलमेट का प्रयोग करें।