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साइबर अपराध होने पर मिलाएं 155260 हेल्पलाइन नंबर
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फतेहपुर। साइबर अपराध का शिकार होने के बाद 155260 हेल्पलाइन नंबर का इस्तेमाल करें। नंबर में शिकायत दर्ज कराने के बाद ऑन लाइन फ्राड की ट्रांजेक्शन आईडी के जरिये लेनदेन को रोक दिए जाएगा।
जिसके बाद खाते में रकम लौटने की काफी संभावनाएं बढ़ जाती है। हेल्पलाइन और साइबर अपराधों से बचाव के तरीकों की पुलिस ने बुधवार को बैंक और एटीएम बूथों पर घूमकर जानकारी दी।
साइबर क्राइम के प्रति जागरुकता के लिए हर महीने के पहले बुधवार को साइबर जागरूकता दिवस आयोजित किया जाता है। इसमें पुलिस कर्मी साइबर अपराध के प्रकार और बचने के तरीकों की जानकारियां लोगों को देते हैं।
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क्षेत्र में पड़ने वाले बैंक, एटीएम, प्रमुख बाजार, बस अड्डे, चौराहे, प्रमुख व्यावसायिक दुकानों, गांव-कस्बों पर पुलिस कर्मी पहुंचे और पंपलेट वितरित जाते हैं। बुधवार को भी पुलिस कर्मियों ने लोगों को बताया कि साइबर अपराधी तमाम माध्यमों से उनका डाटा चोरी करते हैं।
साइबर क्राइम का शिकार होने पर राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के टोल फ्री नंबर 155260 पर फौरन काल करें। शिकायत के बाद बैंक फ्राड करने वालों के खाते में ट्रांजेक्शन रोक दिया जाता है।
हेल्पलाइन नंबर पर शिकायतकर्ता को देनी होगी यह जानकारी
शिकायतकर्ता का मोबाइल नंबर। बैंक/वॉलेट/व्यापारी का नाम जिससे राशि डेबिट की गई है। खाता संख्या/वॉलेट आईडी/व्यापारी, आई/यूपीआई आईडी जिससे राशि डेबिट की गई है। लेन-देन आईडी। कार्रवाई की तिथि। डेबिट कार्ड/क्रेडिट कार्ड की साख का उपयोग करके की गई धोखाधड़ी के मामले में डेबिट/क्रेडिट कार्ड नंबर। लेन-देन का स्क्रीन शॉट या धोखाधड़ी से संबंधित कोई अन्य छवि।
शिकायतकर्ता को मिलेगा आईडी या रिसिप्ट नंबर
हेल्पलाइन नंबर पर धोखाधड़ी की शिकायत करने के बाद आवेदन या फरियादी को एसएमएस या ई-मेल के माध्यम से सिस्टम जनरेटेड लॉग-इन आईडी या रिसिप्ट नंबर मिलेगा। उसे डालते ही आवेदक या फरियादी को 24 घंटे में cybercrime.gov.in पर आवेदन या शिकायत रजिस्टर्ड करवाना होगा।
जो साइबर अपराध के लिए अनिवार्य है। आवेदन मिलने के बाद अधिकृत पुलिस अधिकारी ऑनलाइन धोखाधड़ी में शामिल राशि को फ्रिज या ब्लॉक करने के लिए तुरंत जांच करेंगे। संबंधित बैंक पेमेंट गेटवे या पेमेंट वॉलेट आदि को भी पेरिफाई करेगी। इसके बाद पुलिस बैंक पेमेंट/वॉलेट और पेमेंट गेटवे का सहयोग लेते हुए उचित कार्रवाई करेगी।
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जिसके बाद खाते में रकम लौटने की काफी संभावनाएं बढ़ जाती है। हेल्पलाइन और साइबर अपराधों से बचाव के तरीकों की पुलिस ने बुधवार को बैंक और एटीएम बूथों पर घूमकर जानकारी दी।
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साइबर क्राइम के प्रति जागरुकता के लिए हर महीने के पहले बुधवार को साइबर जागरूकता दिवस आयोजित किया जाता है। इसमें पुलिस कर्मी साइबर अपराध के प्रकार और बचने के तरीकों की जानकारियां लोगों को देते हैं।
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क्षेत्र में पड़ने वाले बैंक, एटीएम, प्रमुख बाजार, बस अड्डे, चौराहे, प्रमुख व्यावसायिक दुकानों, गांव-कस्बों पर पुलिस कर्मी पहुंचे और पंपलेट वितरित जाते हैं। बुधवार को भी पुलिस कर्मियों ने लोगों को बताया कि साइबर अपराधी तमाम माध्यमों से उनका डाटा चोरी करते हैं।
साइबर क्राइम का शिकार होने पर राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के टोल फ्री नंबर 155260 पर फौरन काल करें। शिकायत के बाद बैंक फ्राड करने वालों के खाते में ट्रांजेक्शन रोक दिया जाता है।
हेल्पलाइन नंबर पर शिकायतकर्ता को देनी होगी यह जानकारी
शिकायतकर्ता का मोबाइल नंबर। बैंक/वॉलेट/व्यापारी का नाम जिससे राशि डेबिट की गई है। खाता संख्या/वॉलेट आईडी/व्यापारी, आई/यूपीआई आईडी जिससे राशि डेबिट की गई है। लेन-देन आईडी। कार्रवाई की तिथि। डेबिट कार्ड/क्रेडिट कार्ड की साख का उपयोग करके की गई धोखाधड़ी के मामले में डेबिट/क्रेडिट कार्ड नंबर। लेन-देन का स्क्रीन शॉट या धोखाधड़ी से संबंधित कोई अन्य छवि।
शिकायतकर्ता को मिलेगा आईडी या रिसिप्ट नंबर
हेल्पलाइन नंबर पर धोखाधड़ी की शिकायत करने के बाद आवेदन या फरियादी को एसएमएस या ई-मेल के माध्यम से सिस्टम जनरेटेड लॉग-इन आईडी या रिसिप्ट नंबर मिलेगा। उसे डालते ही आवेदक या फरियादी को 24 घंटे में cybercrime.gov.in पर आवेदन या शिकायत रजिस्टर्ड करवाना होगा।
जो साइबर अपराध के लिए अनिवार्य है। आवेदन मिलने के बाद अधिकृत पुलिस अधिकारी ऑनलाइन धोखाधड़ी में शामिल राशि को फ्रिज या ब्लॉक करने के लिए तुरंत जांच करेंगे। संबंधित बैंक पेमेंट गेटवे या पेमेंट वॉलेट आदि को भी पेरिफाई करेगी। इसके बाद पुलिस बैंक पेमेंट/वॉलेट और पेमेंट गेटवे का सहयोग लेते हुए उचित कार्रवाई करेगी।