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Fatehpur News: मां कालरात्रि की उपासना कर भक्तों ने गाए भजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना कर भक्तों ने भजन गाए। सुबह से ही भक्त नारियल, फूल और चुनरी लेकर माता को चढ़ाने के लिए मंदिर पहुंचे थे।
शहर के सैदाबाग देवीगंज स्थित दुर्गा माता मंदिर में मां कालरात्रि की विशेष पूजा अर्चना हुई। कालरात्रि को मां काली भी कहा जाता है। दानव, दैत्य व राक्षसों का संहार करने के कारण मां के इस रूप को कालरात्रि कहा गया। मंदिर में भक्तों ने आरती के अलावा भजन संध्या का भी आयोजन किया।
पुजारी दीपेश्वर महाराज ने बताया कि माता का मंदिर लगभग 100 वर्ष पुराना है। इस स्थान में पहले एक कच्ची मठिया में मां विराजमान थीं। भक्तों की मन्नतें पूरी होने पर उन्होंने माता के मंदिर की जीर्णोद्धार करवाया। नवरात्रों में दूर-दूर से भक्त आकर मां के दर्शन कर मन्नत मांगते हैं।
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अष्टमी को सुबह 7.52 से शुभ मुहूर्त
दुर्गा अष्टमी को मां महागौरी की पूजा होती है। माता को नारियल का भोग पसंद है। भक्त पीले रंग के फूल सजाकर व घी का दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें। माता को शृंगार में लाल चुनरी के साथ लाल चूड़ी जरूर चढ़ाएं। कन्या पूजन कर खीर-पूड़ी खिलाएं। अष्टमी पर कन्या पूजन के दो शुभ मुहूर्त हैं। पहला मुहूर्त सुबह 7.52 बजे से शुरू होकर 10.42 बजे तक रहेगा। वहीं दूसरा सुबह 11.54 बजे से शुरू होकर दोपहर 12.46 बजे तक रहेगा।
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फतेहपुर। नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना कर भक्तों ने भजन गाए। सुबह से ही भक्त नारियल, फूल और चुनरी लेकर माता को चढ़ाने के लिए मंदिर पहुंचे थे।
शहर के सैदाबाग देवीगंज स्थित दुर्गा माता मंदिर में मां कालरात्रि की विशेष पूजा अर्चना हुई। कालरात्रि को मां काली भी कहा जाता है। दानव, दैत्य व राक्षसों का संहार करने के कारण मां के इस रूप को कालरात्रि कहा गया। मंदिर में भक्तों ने आरती के अलावा भजन संध्या का भी आयोजन किया।
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पुजारी दीपेश्वर महाराज ने बताया कि माता का मंदिर लगभग 100 वर्ष पुराना है। इस स्थान में पहले एक कच्ची मठिया में मां विराजमान थीं। भक्तों की मन्नतें पूरी होने पर उन्होंने माता के मंदिर की जीर्णोद्धार करवाया। नवरात्रों में दूर-दूर से भक्त आकर मां के दर्शन कर मन्नत मांगते हैं।
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अष्टमी को सुबह 7.52 से शुभ मुहूर्त
दुर्गा अष्टमी को मां महागौरी की पूजा होती है। माता को नारियल का भोग पसंद है। भक्त पीले रंग के फूल सजाकर व घी का दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें। माता को शृंगार में लाल चुनरी के साथ लाल चूड़ी जरूर चढ़ाएं। कन्या पूजन कर खीर-पूड़ी खिलाएं। अष्टमी पर कन्या पूजन के दो शुभ मुहूर्त हैं। पहला मुहूर्त सुबह 7.52 बजे से शुरू होकर 10.42 बजे तक रहेगा। वहीं दूसरा सुबह 11.54 बजे से शुरू होकर दोपहर 12.46 बजे तक रहेगा।

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