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लाडलों की मौत पर परिजनों की गूंजती रहीं चीखें
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
Updated Tue, 26 Apr 2016 12:40 AM IST
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घटनास्थल पर लगी ग्रामीणों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
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रहसूपुर गांव में एक साथ चार घरों में मातम छा जाने से पूरे गांव में सन्नाटा छा गया। जिसे भी हादसे की सूचना मिली वह पीड़ित परिवारों के घरों तक पहुंचे। परिवारों का करुण क्रं दन सुनकर लोगों की आंखाें में आंसू छलक पड़े।
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मृतक मुकेश अपने पिता ननका का बड़ा बेटा था। ननका का दूसरा छोटा बेटा करन और दो बेटियां हैं। मुकेश को शव से लिपटकर उसकी मां सोमवती रोती बिलखती रही। यही हाल मृतक कल्लू की मां सरोजनी का रहा है। बेटे को सोया मानकर नींद से जगाने के लिए चीखती चिल्लाती रही। मृतक का एक छोटा भाई गुलेटर उर्फ गोलू और एक बहन है।
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भुल्लन का बेटा अमित सबसे छोटा था। इसी वजह से परिवार का दुलारा था। उससे बड़े भाई शंकर और साजन है। उसकी छह बहनें है। जिसमें तीन की शादी हो चुकी है। अमित की मां रानी दहाड़ मारकर रोती रही। वह बेहोश हो जाती फिर होश आने पर विलाप करने लगती। धर्मपाल का बेटा पुत्तीलाल भी सबसे छोटा था।
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उससे बड़े भाई राजू और दिनेश हैं। उसकी पांच बहनें हैं। बेटे की मौत से मां सियादुलारी का हाल बेहाल हो गया है। तालाब में डूबने पांचों भाई एक वंश के हैं। मृतक मुकेश का पिता ननका, मृतक कल्लू के पिता अरविंद, मृतक अमित के पिता भुल्लन के पिता छोटेलाल हैं। वहीं छोटेलाल के भाई प्यारेलाल के बेटे धर्मपाल और सूरजपाल हैं।
इसमें धर्मपाल के बेटे पंकज की डूबने से मौत हुई है। रहसूपुर प्राथमिक विद्यालय में सभी बच्चे पढ़ते थे। अगर बच्चे सोमवार को स्कूल गए होते तो शायद उनकी जान बच सकती थीं।
हादसे की खबर पर रहसूपुर गांव के राकेश, सूरजपाल, राजू, गोलू के मामा भिखारी निवासी सलेमपुर ने बिना सोचे समझे तालाब में छलांग लगा दी थी। उन लोगों का कहना रहा है कि उनकी सारी मेहनत बेकार गई। अगर बच्चों की जान बचा पाते तो छाती चौड़ी हो जाती।