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पशु तस्करी में शामिल एक दरोगा समेत सात निलंबित ....
Updated Sun, 09 Dec 2018 12:40 AM IST
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फतेहपुर। पशु तस्करी में संलिप्तता के आरोप में निलंबित पुलिस कर्मी अपने अधिकारियों के चहेतों में शुमार हैं। पीठ पीछे अधिकारियों की छवि पर दाग लगाने वाले चहेतों की फैलाई गंदगी सामने आई है।
सीओ खागा के ड्राइवर के पद पर तैनात लालता प्रसाद मिश्रा की तस्करों से मिलीभगत सामने आना महकमे की साख पर बट्टा लगना माना जा रहा है। एक अधिकारी का वाहन लेकर चालक वसूली को घूमता रहा। इसकी भनक
तक अधिकारी को नहीं रही। यह अधिकारियों के लिए बड़ा सवाल है। हेड कांस्टेबल लालता प्रसाद मिश्रा पहले पुलिस अधीक्षक और अपर पुलिस अक्षीक्षक जैसे बड़े अधिकारियों के चालक के पद पर तैनात रहे हैं। महकमे का काफी चर्चित चेहरा माने जाते रहे हैं। हाईवे के थानों में ड्राइवर के पद तैनात कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल की
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भूमिका भी संदिग्ध मानी जाती है। हेड कांस्टेबल शाहनवाज हुसैन तस्कर और माफियाओं से मजबूत सेटिंग के चर्चित है। उसकी तैनाती के लिए हर थानेदार अपने थाने में चाहता है। थानेदारों को अपराधियों से मजबूत गठजोड़ के लिए गुडवर्क कराने में भी कसर नहीं छोड़ता था। कमाई के नए-नए रास्ते खोलना भी उसके लिए आम बात है।
हेड कांस्टेबल आनंद कुमार राय कई सालों से हाईवे पर मलाई काटने वाला है। बीते कई सालों लगातार थरियांव थाने में तैनाती रही। थरियांव थाने की हाईवे पुलिया पर अक्सर मोबाइल लेकर जुटा रहता था। हाईवे से कुछ दिनों के लिए हटाया गया। ललौली और सुल्तानपुर घोष थाने में दो बार स्थानांतरण हुआ। स्थानांतरण चंद दिनों के लिए
हुआ। फिर से हाईवे की खागा कोतवाली में एंट्री मारी। कोतवाली से तैनाती महिंचा मंदिर हाईवे की चौकी पर कराई। यहां भी मोबाइल पर तस्करों से सेटिंग का खेल करता रहा है। हेड कांस्टेबल झुल्लर पाल पुलिस महकमे का चर्चित नाम है। चर्चा है कि इनको भी चाहे जो कीमत हो तैनाती हाईवे पर चाहिए। उपनिरीक्षक महेंद्र वर्मा को हाईवे मझिलगांव चौकी से किसी भी कीमत पर नहीं हटना चाहते थे। एसटीएफ की शुरू हुई जांच के घेरे में आने के बाद मुगलमार्ग हाईवे की ओर भाग निकले थे।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक पशु तस्कर पप्पू एंड कंपनी ने गैरप्रतिबंधित पशुओं की तस्करी की आड़ से हाईवे के सारे थानों को माहवारी बांध रखी थी। जबकि गैरप्रतिबंधित की आड़ में प्रतिबंधित मवेशियों का तस्कर है। एसटीएफ ने विदेश सप्लाई वाले प्रतिबंधित मीट के साथ पप्पू को पकड़ा था। उसके मोबाइल सीडीआर में कई नंबर जिले के पुलिस कमिर्तयों से बातचीत निकले। उसके पकड़े जाने तस्करों का नेटवर्क टूटा लेकिन उसकी सत्ता संभालने वाले दूसरे खड़े होना चालू हो गए हैं। पिछले माहों में पुलिस को पुलिस को दी जाने वाली रकम में का हिसाब ऐसा रहा है। जिसमें खागा डेढ़ लाख, मझिलगांव, महिचा चौकी एक-एक लाख, थरियांव तीन लाख 60 हजार, हसवा चौकी एक लाख, कोतवाली डेढ़ लाख, कल्यानपुर डेढ़ लाख, चौडगरा चौकी एक लाख, औंग थाना डेढ़ लाख थी। यह रकम तस्कर थानों के नाम पर पहुंचाते रहे हैं।
फोटो संख्या एवं परिचय
28- 22 नवंबर को प्रकाशित खबर की पीडीएफ
खबर का असर-
साइड स्टोरी--
अधिकारियों के चहेते रहने वाले निकले दागी
- अधिकारी का चालक निकला दागदार
अमर उजाला ब्यूरो
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सीओ खागा के ड्राइवर के पद पर तैनात लालता प्रसाद मिश्रा की तस्करों से मिलीभगत सामने आना महकमे की साख पर बट्टा लगना माना जा रहा है। एक अधिकारी का वाहन लेकर चालक वसूली को घूमता रहा। इसकी भनक
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तक अधिकारी को नहीं रही। यह अधिकारियों के लिए बड़ा सवाल है। हेड कांस्टेबल लालता प्रसाद मिश्रा पहले पुलिस अधीक्षक और अपर पुलिस अक्षीक्षक जैसे बड़े अधिकारियों के चालक के पद पर तैनात रहे हैं। महकमे का काफी चर्चित चेहरा माने जाते रहे हैं। हाईवे के थानों में ड्राइवर के पद तैनात कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल की
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भूमिका भी संदिग्ध मानी जाती है। हेड कांस्टेबल शाहनवाज हुसैन तस्कर और माफियाओं से मजबूत सेटिंग के चर्चित है। उसकी तैनाती के लिए हर थानेदार अपने थाने में चाहता है। थानेदारों को अपराधियों से मजबूत गठजोड़ के लिए गुडवर्क कराने में भी कसर नहीं छोड़ता था। कमाई के नए-नए रास्ते खोलना भी उसके लिए आम बात है।
हेड कांस्टेबल आनंद कुमार राय कई सालों से हाईवे पर मलाई काटने वाला है। बीते कई सालों लगातार थरियांव थाने में तैनाती रही। थरियांव थाने की हाईवे पुलिया पर अक्सर मोबाइल लेकर जुटा रहता था। हाईवे से कुछ दिनों के लिए हटाया गया। ललौली और सुल्तानपुर घोष थाने में दो बार स्थानांतरण हुआ। स्थानांतरण चंद दिनों के लिए
हुआ। फिर से हाईवे की खागा कोतवाली में एंट्री मारी। कोतवाली से तैनाती महिंचा मंदिर हाईवे की चौकी पर कराई। यहां भी मोबाइल पर तस्करों से सेटिंग का खेल करता रहा है। हेड कांस्टेबल झुल्लर पाल पुलिस महकमे का चर्चित नाम है। चर्चा है कि इनको भी चाहे जो कीमत हो तैनाती हाईवे पर चाहिए। उपनिरीक्षक महेंद्र वर्मा को हाईवे मझिलगांव चौकी से किसी भी कीमत पर नहीं हटना चाहते थे। एसटीएफ की शुरू हुई जांच के घेरे में आने के बाद मुगलमार्ग हाईवे की ओर भाग निकले थे।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक पशु तस्कर पप्पू एंड कंपनी ने गैरप्रतिबंधित पशुओं की तस्करी की आड़ से हाईवे के सारे थानों को माहवारी बांध रखी थी। जबकि गैरप्रतिबंधित की आड़ में प्रतिबंधित मवेशियों का तस्कर है। एसटीएफ ने विदेश सप्लाई वाले प्रतिबंधित मीट के साथ पप्पू को पकड़ा था। उसके मोबाइल सीडीआर में कई नंबर जिले के पुलिस कमिर्तयों से बातचीत निकले। उसके पकड़े जाने तस्करों का नेटवर्क टूटा लेकिन उसकी सत्ता संभालने वाले दूसरे खड़े होना चालू हो गए हैं। पिछले माहों में पुलिस को पुलिस को दी जाने वाली रकम में का हिसाब ऐसा रहा है। जिसमें खागा डेढ़ लाख, मझिलगांव, महिचा चौकी एक-एक लाख, थरियांव तीन लाख 60 हजार, हसवा चौकी एक लाख, कोतवाली डेढ़ लाख, कल्यानपुर डेढ़ लाख, चौडगरा चौकी एक लाख, औंग थाना डेढ़ लाख थी। यह रकम तस्कर थानों के नाम पर पहुंचाते रहे हैं।
फोटो संख्या एवं परिचय
28- 22 नवंबर को प्रकाशित खबर की पीडीएफ
खबर का असर-
साइड स्टोरी--
अधिकारियों के चहेते रहने वाले निकले दागी
- अधिकारी का चालक निकला दागदार
अमर उजाला ब्यूरो