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तीन इंस्पेक्टर समेत 11 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

Mon, 20 Nov 2017 12:22 AM IST
Updated Mon, 20 Nov 2017 12:22 AM IST
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तीन इंस्पेक्टर समेत 11 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहपुर। कल्यानपुर पुलिस और एसओजी टीम के सिटीजन चार्टर की धज्जियां उड़ाने में छह साल बाद कार्रवाई हुई है। कानपुर एंटी करप्शन कोर्ट में जांच के बाद तीन इंस्पेक्टर समेत 11 पुलिस कर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।

मामला वर्ष 2011 का है। कल्यानपुर हाईवे पर कृष्ण भगवान की बेशकीमती मूर्ति की डील हो रही थी। कल्यानपुर पुलिस और एसओजी की संयुक्त कार्रवाई में आरोपियों को पकड़ा गया। गुजरात के एक बाबा, उसके सहयोगी और एक महिला को पुलिस ने पकड़ा था।
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पुलिस ने दो दिन तक महिला को थाने में बैठाए रखा। जांच के बाद मासूम बच्चे के साथ रही महिला को दो दिन बाद थाने से पुलिस ने छोड़ दिया था। महिला ने मामले की शिकायत एंटी करप्शन सेल में की। आरोप था कि उसे पुलिस ने 15 फरवरी 2011 को पकड़ा। थाने ले आई और चार हजार रुपये रिश्वत लेकर 17 फरवरी को छोड़ा। एफआईआर दर्ज होने के बाद सेल इस मामले की जांच कर रहा था।
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कई विवेचक भी बदल गए। एंटी करप्शन सेल कानपुर इकाई के विवेचक नरेश चंद्र शर्मा ने मामले की कोर्ट में अब चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट की प्रतिलिपि कल्यानपुर थाने व संबंधित पुलिस कर्मियों को सूचना देने के लिए भेजी है। इस मामले में तत्कालीन एसओ सुभाष चंद्र राय, एसओजी प्रभारी महावीर प्रसाद त्रिपाठी उर्फ एमपी त्रिपाठी, एसआई सुनील सिंह, कांस्टेबल भूपेंद्र, मोहम्मद हुसैन, राघवेंद्र, दिनेश वाजपेयी, सुनील कुमार, इश्तियाक अहमद, दीपेंद्र कुमार, मुरली में आरोपित किए गए हैं।

इनके खिलाफ करप्शन सेल ने 2013 में महिला की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचक नरेशचंद्र शर्मा ने बताया चार्जशीट अब लगाई गई है।

एक कॉल के चक्कर में फंसे पुलिसकर्मी
पुलिस ने बाबा को अकूत संपत्ति का मालिक बताया था। किसी से बाबा की पुलिस कर्मियों ने मोबाइल पर बात कराई थी। पुलिस को लगा था कि वह और बड़े रैकेट तक पहुंच सकती है।

उसी एक कॉल ने बाबा और महिला की थाने में मौजूदगी को जांच के दौरान थाने में होना दर्शा दिया। एक मोबाइल कॉल पुलिस कर्मियों के लिए आफत बन गया। इनमें कई पुलिस कर्मियों के रिटायर होने की भी संभावना जताई जा रही है।


40 लाख रिश्वत मिलने का किया था दावा
खुलासे के दौरान इसी पुलिस टीम ने दावा किया था कि बाबा को छोड़ने के लिए 40 लाख की रकम रिश्वत मिल रही थी। टीम ने आरोपियों को जेल भेजने की कार्रवाई की, रिश्वत नहीं ली।

तत्कालीन टीम के सूत्रों की मानें तो उन लोगों ने महिला को मासूम बच्चे के साथ होने के कारण मानवता की वजह से छोड़ना बताया।
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