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सीएमओ दफ्तर में तैनात अधिकारी को जान का खतरा
Updated Sat, 07 Oct 2017 11:47 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर।
सीएमओ कार्यालय में तैनात सहायक शोध अधिकारी मिसबाहुल हक को अपनी जान का खतरा है। उसने सदर विधायक विक्रम सिंह के साथ पांच अक्तूबर को कार्यालय में आए लोगों से ऐसी आशंका जताई है। मिसबाहुल ने इसका एक पत्र सीएमओ को दिया है।
सहायक शोध अधिकारी मिसबाहुल हक का कहना है कि आरोग्य निधि से संबंधित काम में उन पर दबाव डाला जा रहा है। पांच अक्तूबर को सदर विधायक अपने कई समर्थकों के साथ उनके कार्यालय में आए थे। मिसबाहुल का आरोप है कि उन्हें नाम लेकर ढूंढा जा रहा था, यदि वह मिल गए होते तो उन्हें शक है कि उनके साथ अभद्रता होती, जान भी जा सकती थी।
आरोग्य निधि के बाबत कुछ ऐसा करने का दबाव साथ आए लोग कर्मचारियों पर बना रहे थे, जिसे करना संभव नहीं। उन्होंने यह भी लिखा है कि समय-समय पर मुझे डीएम के पास भी जाना पड़ता है। बिना सुरक्षा के अब वह न तो दफ्तर और न ही मीटिंगों में जाने में खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
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दूसरी ओर सदर विधायक विक्रम सिंह का कहना है कि वह महिला को बेवजह दौड़ाने, फाइल संस्तुति होने के बाद भी काम न होने से उसके बच्चे की मौत सुनकर वह गए थे। शासन की मंशा के अनुसार काम न करने वालों को केवल कड़ी चेतावनी दी गई थी। अभद्रता का सवाल ही नहीं उठता।
मिसबाहुल बेवजह डर रहे हैं। इमानदारी से काम करने वालों को भाजपा के शासन में डरने की जरूरत ही नहीं है। उधर, सीएमओ वीके पांडेय का कहना है कि उनके संज्ञान में मामला आया है, बातरचीत की जा रही है।
सीएमओ दफ्तर में तैनात अधिकारी को जान का खतरा
सदर विधायक के साथ पहुंचे लोगों से जताया डर
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फतेहपुर।
सीएमओ कार्यालय में तैनात सहायक शोध अधिकारी मिसबाहुल हक को अपनी जान का खतरा है। उसने सदर विधायक विक्रम सिंह के साथ पांच अक्तूबर को कार्यालय में आए लोगों से ऐसी आशंका जताई है। मिसबाहुल ने इसका एक पत्र सीएमओ को दिया है।
सहायक शोध अधिकारी मिसबाहुल हक का कहना है कि आरोग्य निधि से संबंधित काम में उन पर दबाव डाला जा रहा है। पांच अक्तूबर को सदर विधायक अपने कई समर्थकों के साथ उनके कार्यालय में आए थे। मिसबाहुल का आरोप है कि उन्हें नाम लेकर ढूंढा जा रहा था, यदि वह मिल गए होते तो उन्हें शक है कि उनके साथ अभद्रता होती, जान भी जा सकती थी।
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आरोग्य निधि के बाबत कुछ ऐसा करने का दबाव साथ आए लोग कर्मचारियों पर बना रहे थे, जिसे करना संभव नहीं। उन्होंने यह भी लिखा है कि समय-समय पर मुझे डीएम के पास भी जाना पड़ता है। बिना सुरक्षा के अब वह न तो दफ्तर और न ही मीटिंगों में जाने में खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
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दूसरी ओर सदर विधायक विक्रम सिंह का कहना है कि वह महिला को बेवजह दौड़ाने, फाइल संस्तुति होने के बाद भी काम न होने से उसके बच्चे की मौत सुनकर वह गए थे। शासन की मंशा के अनुसार काम न करने वालों को केवल कड़ी चेतावनी दी गई थी। अभद्रता का सवाल ही नहीं उठता।
मिसबाहुल बेवजह डर रहे हैं। इमानदारी से काम करने वालों को भाजपा के शासन में डरने की जरूरत ही नहीं है। उधर, सीएमओ वीके पांडेय का कहना है कि उनके संज्ञान में मामला आया है, बातरचीत की जा रही है।
सीएमओ दफ्तर में तैनात अधिकारी को जान का खतरा
सदर विधायक के साथ पहुंचे लोगों से जताया डर