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डीजीपी टीम आने की भनक पर लिख ली एफआईआर
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फतेहपुर। दो माह पहले की एक शिकायत में डीजीपी की टीम आने की खबर पर कोतवाली में हड़कंप मच गया। पुलिस ने आनन-फानन में पीड़ित की खोज की और टीम आने के 12 घंटे पहले एफआईआर दर्ज कर ली। टीम ने शनिवार दोपहर कोतवाली पहुंचकर तत्कालीन पुलिस कर्मियों के बयान दर्ज किए। प्रकरण की रिपोर्ट डीजीपी को सौंपी जाएगी।
शहर कोतवाली के सिविल लाइन पत्थरकटा चौराहा आजाद नगर निवासी मोहम्मद लईक ने बताया कि बिंदकी बस अड्डे में एमआईसी स्कूल की मार्केट में भारत मेडिकल स्टोर के नाम से उसकी दुकान है। दुकान में दवाओं की सप्लाई को छह माह पहले एमआर ज्ञान प्रकाश (निवासी शिव मंदिर के पास आबूनगर) आया था। उसने दो कंपनियों के बारे में जानकारी दी थी। बातचीत से प्रेरित होकर कुछ दवाओं का आर्डर दिया। कंपनियों से दवाओं की सप्लाई ली। उसके बाद आर्डर बंद कर दिया। आर्डर न देने के बाद भी दो बार कंपनी की ओर से ट्रांसपोर्ट के माध्यम से दवाएं पहुंचीं। इससे धोखाधड़ी का शक हुआ। दोनों कंपनियों से संपर्क किया। तब पता लगा कि एमआर
उसकी फर्म के नाम पर कंपनियों से माल मंगवा रहा है। धोखे में फर्म के पते पर कंपनी की सप्लाई पहुंच गई थी। उसने एमआर से संपर्क किया तो वह टाल मटोल करने लगा। उसकी फर्म का दुरुपयोग किया गया है। फर्म के नाम की दूसरी फर्म बनाकर डिलिवरी मंगाता है। पुलिस ने प्रकरण की एफआईआर शुक्रवार रात दर्ज की। इसी प्रकरण में दो माह पहले पुलिस ने शिकायत नहीं दर्ज की थी और टरका दिया था। पीड़ित लईक ने बताया कि उसने परेशान होकर डीजीपी से शिकायत की थी। डीजीपी की ओर से शनिवार को टीम जांच करने पहुंची। टीम ने तत्कालीन पुलिस कर्मियों के बयान दर्ज किए। उनसे एफआईआर दर्ज न करने का कारण पूछा गया। दोपहर तीन बजे के बाद कोतवाली से टीम वापस लौटी।
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शहर कोतवाली के सिविल लाइन पत्थरकटा चौराहा आजाद नगर निवासी मोहम्मद लईक ने बताया कि बिंदकी बस अड्डे में एमआईसी स्कूल की मार्केट में भारत मेडिकल स्टोर के नाम से उसकी दुकान है। दुकान में दवाओं की सप्लाई को छह माह पहले एमआर ज्ञान प्रकाश (निवासी शिव मंदिर के पास आबूनगर) आया था। उसने दो कंपनियों के बारे में जानकारी दी थी। बातचीत से प्रेरित होकर कुछ दवाओं का आर्डर दिया। कंपनियों से दवाओं की सप्लाई ली। उसके बाद आर्डर बंद कर दिया। आर्डर न देने के बाद भी दो बार कंपनी की ओर से ट्रांसपोर्ट के माध्यम से दवाएं पहुंचीं। इससे धोखाधड़ी का शक हुआ। दोनों कंपनियों से संपर्क किया। तब पता लगा कि एमआर
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उसकी फर्म के नाम पर कंपनियों से माल मंगवा रहा है। धोखे में फर्म के पते पर कंपनी की सप्लाई पहुंच गई थी। उसने एमआर से संपर्क किया तो वह टाल मटोल करने लगा। उसकी फर्म का दुरुपयोग किया गया है। फर्म के नाम की दूसरी फर्म बनाकर डिलिवरी मंगाता है। पुलिस ने प्रकरण की एफआईआर शुक्रवार रात दर्ज की। इसी प्रकरण में दो माह पहले पुलिस ने शिकायत नहीं दर्ज की थी और टरका दिया था। पीड़ित लईक ने बताया कि उसने परेशान होकर डीजीपी से शिकायत की थी। डीजीपी की ओर से शनिवार को टीम जांच करने पहुंची। टीम ने तत्कालीन पुलिस कर्मियों के बयान दर्ज किए। उनसे एफआईआर दर्ज न करने का कारण पूछा गया। दोपहर तीन बजे के बाद कोतवाली से टीम वापस लौटी।
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