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शीतगृहों में आलू भंडारण पर ग्रहण, भा रहा बाजार
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फतेहपुर। आलू की महंगाई ने शीतगृहों का बाजार ठंडा कर दिया है। इस बार किसानों को बाजार भा रहा है और शीतगृह स्टोर पर ग्रहण लग गया है। आलू खुदाई का काम अंतिम पायदान पर है, लेकिन अभी तक शीतगृहों में सिर्फ 25 प्रतिशत भंडारण हुआ है। अपने शीतगृहों में आलू जमा कराने के लिए मालिकों ने किसानों को लुभाने का काम शुरू किया है। शासन से तय रेट से भी कम में आलू भंडारण का प्रस्ताव दे रहे हैं। साथ ही किसानों को अन्य जरूरत पूरा करने के लिए आलू के हिसाब से रुपये भी दे रहे हैं।
किसानों के आलू भंडारण के लिए जिले में 14 शीतगृह संचालित हैं। आलू के भंडारण का समय अंतिम पायदान पर पहुंच गया है, लेकिन शीतगृहों में इस बार भंडारण करने वाले किसानों की भीड़ नहीं है। न ही जमा करने के लिए वाहनों की लाइन लगी है। उद्यान विभाग की रिपोर्ट के अनुसार शीतगृहों में अब तक मात्र 25 प्रतिशत आलू का भंडारण हुआ है। कोल्ड स्टोरेज के हिसाब से भंडारण की बात करें तो जिले में थरियांव क्षेत्र में सबसे ज्यादा आलू की खेती होती है। यहां के तीन शीतगृहों में करीब 45-45 फीसदी आलू का भंडारण हुआ है। ऐसे में शीतगृह मालिकों की चिंता बढ़ गई है। कोल्ड स्टोर में आलू का भंडारण बढ़ाने के लिए मालिक व कर्मचारी किसानों से संपर्क करने के लिए उनके घर-घर जाना शुरू कर दिए हैं। साथ ही सरकारी रेट से कम में आलू भंडारण कराने पर भी राजी हैं और आलू खुदाई, मजदूरों को खर्च भी एडवांस दे रहे हैं। बाद में आलू की बिक्री के समय एडवांस की रकम लेने की सहूलियत दे रहे हैं। बकायदा स्लोगन दिया है कि स्टोर में जमा करें आलू, रुपये लेकर करें जरूरत पूरी।
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100 रुपये बोरी का भंडारण किराया
फतेहपुर। शीतगृह में आलू भंडारण के लिए शासन से 225 रुपये प्रति क्विंटल किराया तय किया है, लेकिन आलू का भंडारण न होने की वजह से कई शीतगृह मालिक 100 रुपये बोरी (करीब 52 किलो) की दर से जमा करा रहे हैं। फिर भी किसान आलू को स्टोर में न भेज कर मंडी में बिक्री के लिए भेज रहे हैं। वहीं व्यापारी भी किसानों के खेत में जाकर ही आलू की खरीदारी कर रहे हैं। खेत में ही 700 से 800 रुपये बोरी की दर से आलू ले रहे हैं।
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पिछले साल फुल हो गए थे स्टोर
फतेहपुर। पिछले साल किसानों को आलू भंडारण करने के लिए स्टोर में लाइन लगाना पड़ता था। ट्रैक्टर व ट्रकों की शीतगृहों से 500 मीटर की दूरी तक लाइन थी। एक ट्रैक्टर का आलू भंडारण करने में किसानों को तीन से चार दिन लगता था। 15 मार्च को ज्यादातर शीतगृह क्षमता के अनुसार भर गए थे। इस बार शीतगृहों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
उद्यान विभाग के योजना प्रभारी केपी सिंह ने बताया कि जिले में नौ हजार हेक्टेयर में आलू की बुआई हुई थी, लेकिन इस बार दिसंबर, जनवरी में सर्दी अधिक पडने की वजह से पैदावार कुछ कम हुई है। साथ ही बारिश का भी असर रहा है। इससे आलू के दाम मंडी में अधिक हैं। जिले के 14 शीतगृहों में 116422.72 मीट्रिक टन आलू भंडारण की क्षमता है, लेकिन अभी तक करीब 30105 मीट्रिक टन आलू का भंडारण हुआ है।
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किसानों के आलू भंडारण के लिए जिले में 14 शीतगृह संचालित हैं। आलू के भंडारण का समय अंतिम पायदान पर पहुंच गया है, लेकिन शीतगृहों में इस बार भंडारण करने वाले किसानों की भीड़ नहीं है। न ही जमा करने के लिए वाहनों की लाइन लगी है। उद्यान विभाग की रिपोर्ट के अनुसार शीतगृहों में अब तक मात्र 25 प्रतिशत आलू का भंडारण हुआ है। कोल्ड स्टोरेज के हिसाब से भंडारण की बात करें तो जिले में थरियांव क्षेत्र में सबसे ज्यादा आलू की खेती होती है। यहां के तीन शीतगृहों में करीब 45-45 फीसदी आलू का भंडारण हुआ है। ऐसे में शीतगृह मालिकों की चिंता बढ़ गई है। कोल्ड स्टोर में आलू का भंडारण बढ़ाने के लिए मालिक व कर्मचारी किसानों से संपर्क करने के लिए उनके घर-घर जाना शुरू कर दिए हैं। साथ ही सरकारी रेट से कम में आलू भंडारण कराने पर भी राजी हैं और आलू खुदाई, मजदूरों को खर्च भी एडवांस दे रहे हैं। बाद में आलू की बिक्री के समय एडवांस की रकम लेने की सहूलियत दे रहे हैं। बकायदा स्लोगन दिया है कि स्टोर में जमा करें आलू, रुपये लेकर करें जरूरत पूरी।
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100 रुपये बोरी का भंडारण किराया
फतेहपुर। शीतगृह में आलू भंडारण के लिए शासन से 225 रुपये प्रति क्विंटल किराया तय किया है, लेकिन आलू का भंडारण न होने की वजह से कई शीतगृह मालिक 100 रुपये बोरी (करीब 52 किलो) की दर से जमा करा रहे हैं। फिर भी किसान आलू को स्टोर में न भेज कर मंडी में बिक्री के लिए भेज रहे हैं। वहीं व्यापारी भी किसानों के खेत में जाकर ही आलू की खरीदारी कर रहे हैं। खेत में ही 700 से 800 रुपये बोरी की दर से आलू ले रहे हैं।
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पिछले साल फुल हो गए थे स्टोर
फतेहपुर। पिछले साल किसानों को आलू भंडारण करने के लिए स्टोर में लाइन लगाना पड़ता था। ट्रैक्टर व ट्रकों की शीतगृहों से 500 मीटर की दूरी तक लाइन थी। एक ट्रैक्टर का आलू भंडारण करने में किसानों को तीन से चार दिन लगता था। 15 मार्च को ज्यादातर शीतगृह क्षमता के अनुसार भर गए थे। इस बार शीतगृहों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
उद्यान विभाग के योजना प्रभारी केपी सिंह ने बताया कि जिले में नौ हजार हेक्टेयर में आलू की बुआई हुई थी, लेकिन इस बार दिसंबर, जनवरी में सर्दी अधिक पडने की वजह से पैदावार कुछ कम हुई है। साथ ही बारिश का भी असर रहा है। इससे आलू के दाम मंडी में अधिक हैं। जिले के 14 शीतगृहों में 116422.72 मीट्रिक टन आलू भंडारण की क्षमता है, लेकिन अभी तक करीब 30105 मीट्रिक टन आलू का भंडारण हुआ है।