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जिपं अध्यक्षी चुनाव ने सपा की उधेड़ी बखिया
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फतेहपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सपा के सभी दावे फुस्स हो गए। पार्टी के समर्थन से केवल नौ सदस्य जीते लेकिन जिलाध्यक्ष ने 15 सदस्य जीतने का दावा किया। लखनऊ में राष्ट्रीय अध्यक्ष के समक्ष 25 सदस्यों की परेड भी कराई लेकिन शनिवार को हुए मतदान में सपा समर्थित अध्यक्ष प्रत्याशी को केवल पांच वोट ही मिल सके।
जिला पंचायत में 46 सदस्य हैं। इसमें समाजवादी पार्टी के समर्थन से नौ सदस्य जीते थे। सपा के कुछ बागी भी जीते। जिलाध्यक्ष ने चुनाव के बाद बागियों समेत कुछ अन्य की भी गिनती अपने पाले में कर ली और सपा के 15 सदस्य होने का दावा ठोंकने लगे।
23 जून को जिलाध्यक्ष और पार्टी नेताओं ने लखनऊ में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के समक्ष 25 जिला पंचायत सदस्यों की परेड भी कराई। इस परेड के आधार पर जीत का दावा कर संगीता राज पासी को सपा ने अध्यक्ष पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया। शनिवार सुबह मतदान शुरू होने तक सपा जीत का दावा करती रही, किंतु मतगणना के बाद ख्याली किला ध्वस्त हो गया। सपा समर्थित प्रत्याशी
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को केवल पांच वोट ही मिल सके। सपा के बैनर तले जीते चार सदस्य भी भाजपा के पाले में चले गए। हालांकि सपा जिलाध्यक्ष विपिन सिंह यादव भाजपा पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि उनके प्रत्याशी पर नाम वापस लेने के लिए दबाव डाला गया। पार्टी प्रत्याशी ने नाम वापस नहीं लिया तो सपा समर्थित जिला पंचायत सदस्यों को डरा धमकाकर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट डलवाए गए। निष्पक्ष चुनाव होने पर भाजपा कभी भी जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव नहीं जीत सकती है।
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जिला पंचायत में 46 सदस्य हैं। इसमें समाजवादी पार्टी के समर्थन से नौ सदस्य जीते थे। सपा के कुछ बागी भी जीते। जिलाध्यक्ष ने चुनाव के बाद बागियों समेत कुछ अन्य की भी गिनती अपने पाले में कर ली और सपा के 15 सदस्य होने का दावा ठोंकने लगे।
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23 जून को जिलाध्यक्ष और पार्टी नेताओं ने लखनऊ में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के समक्ष 25 जिला पंचायत सदस्यों की परेड भी कराई। इस परेड के आधार पर जीत का दावा कर संगीता राज पासी को सपा ने अध्यक्ष पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया। शनिवार सुबह मतदान शुरू होने तक सपा जीत का दावा करती रही, किंतु मतगणना के बाद ख्याली किला ध्वस्त हो गया। सपा समर्थित प्रत्याशी
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को केवल पांच वोट ही मिल सके। सपा के बैनर तले जीते चार सदस्य भी भाजपा के पाले में चले गए। हालांकि सपा जिलाध्यक्ष विपिन सिंह यादव भाजपा पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि उनके प्रत्याशी पर नाम वापस लेने के लिए दबाव डाला गया। पार्टी प्रत्याशी ने नाम वापस नहीं लिया तो सपा समर्थित जिला पंचायत सदस्यों को डरा धमकाकर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट डलवाए गए। निष्पक्ष चुनाव होने पर भाजपा कभी भी जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव नहीं जीत सकती है।