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फतेहपुरः किसानों के अरमान बारिश में बह गए
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खदरा गांव में मिर्च की बर्बाद फसल को देखता किसान जगदीश पासवान। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। महज सप्ताहभर पहले तक खेत में लहलहाती फसल देखकर किसान बच्चों को पढ़ाई और घर के खर्च को आसानी से पूरा करने के अरमान संजोए थे, लेकिन दो दिन की तेज बारिश में सभी अरमान बह गए। बारिश में सब्जियों की फसलों के साथ धान की खेती को नुकसान पहुंचा है। पैदावार कम होने की आशंका है।
जिले में एक लाख 51 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में किसान खेती करते हैं। इसमें सबसे ज्यादा 83 हजार छह सौ हेक्टेयर में धान की फसल बोई जाती है। 35 हजार हेक्टेयर संकर व सुगंधित धान की फसल बोई गई है। यह फसल पक कर तैयार खड़ी थी, जिसे काटने के लिए किसान तैयारी बना रहे थे। पांच अक्तूबर से शुरू हुई बारिश के साथ तेज हवा ने फसलों को गिरा दिया। फिर दो दिन की जोरदार बारिश का पानी खेतों में भर गया और धान की बालियां पानी में डूब गईं। किसानों का कहना है कि जमीन में पड़ी बालियों में अंकुरण निकल आएगा और पैदावार कम हो जाएगी। वहीं, जिले में 15 हजार हेक्टेयर में सब्जी की खेती होती है, जिसमें शिमला मिर्च, हरी मिर्च, टमाटर, प्याज, तरोई और कद्दू की फसल है। बारिश का पानी भरने से सब्जी की फसल खराब हो गई है।
मौसम विशेषज्ञ वसीम खान ने बताया कि बुधवार को 60 मिमी और शुक्रवार को 65 मिमी बारिश रिकार्ड की गई है। अभी 12 अक्तूूबर तक हल्की से माध्यम बारिश होने की संभावना है। इस बारिश के पानी को खेत से निकालने का किसान प्रयास करें। ताकि नुकसान से बचाया जा सके।
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औंग संवाद के मुताबिक मलवां और देवमई ब्लॉक क्षेत्र के 40 गांव के किसान मिर्च की खेती करते हैं। यहां पर चार हजार बीघा से अधिक मिर्च की खेती होती है। दो दिन की बारिश में मिर्च की फसलें बर्बाद हो गई। करचलपुर व खदरा गांव में राजबहादुर यादव, उमेंद्र सिंह चौहान, बाबू कुशवाहा, शिवदास कुशवाहा, नरेंद्र अग्निहोत्री, राजा बाबू रैदास का कहना है कि मिर्च में फूल और फल बनना चालू हो गए थे। बारिश का पानी भरने से पौध की जड़े सड़ने और पौध सूखने लगी है।
देवमई ब्लाक के कृषि रक्षा इकाई प्रभारी संदीप कुमार ने बताया मिर्च की फसल में बारिश से बिल्स रोग लगा हुआ है। जिला उद्यान विभाग के मलवां ब्लाक प्रभारी शब्बीर हुसैन ने बताया मिर्च की जड़ों में उकथा रोग अधिक जलभराव व बारिश से लगा है।
बेमौसम बारिश से जिन किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं और उन्होंने फसल बीमा कराया है तो वह बीमा कंपनी कार्यालय व कृषि विभाग के कार्यालय में शिकायत दर्ज करा दें। बीमा कंपनी व कृषि विभाग की टीम से सर्वे कराया जाएगा। नुकसान के बाद क्लेम मिलेगा।
- राममिलन सिंह परिहार, उप कृषि निदेशक
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जिले में एक लाख 51 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में किसान खेती करते हैं। इसमें सबसे ज्यादा 83 हजार छह सौ हेक्टेयर में धान की फसल बोई जाती है। 35 हजार हेक्टेयर संकर व सुगंधित धान की फसल बोई गई है। यह फसल पक कर तैयार खड़ी थी, जिसे काटने के लिए किसान तैयारी बना रहे थे। पांच अक्तूबर से शुरू हुई बारिश के साथ तेज हवा ने फसलों को गिरा दिया। फिर दो दिन की जोरदार बारिश का पानी खेतों में भर गया और धान की बालियां पानी में डूब गईं। किसानों का कहना है कि जमीन में पड़ी बालियों में अंकुरण निकल आएगा और पैदावार कम हो जाएगी। वहीं, जिले में 15 हजार हेक्टेयर में सब्जी की खेती होती है, जिसमें शिमला मिर्च, हरी मिर्च, टमाटर, प्याज, तरोई और कद्दू की फसल है। बारिश का पानी भरने से सब्जी की फसल खराब हो गई है।
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मौसम विशेषज्ञ वसीम खान ने बताया कि बुधवार को 60 मिमी और शुक्रवार को 65 मिमी बारिश रिकार्ड की गई है। अभी 12 अक्तूूबर तक हल्की से माध्यम बारिश होने की संभावना है। इस बारिश के पानी को खेत से निकालने का किसान प्रयास करें। ताकि नुकसान से बचाया जा सके।
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औंग संवाद के मुताबिक मलवां और देवमई ब्लॉक क्षेत्र के 40 गांव के किसान मिर्च की खेती करते हैं। यहां पर चार हजार बीघा से अधिक मिर्च की खेती होती है। दो दिन की बारिश में मिर्च की फसलें बर्बाद हो गई। करचलपुर व खदरा गांव में राजबहादुर यादव, उमेंद्र सिंह चौहान, बाबू कुशवाहा, शिवदास कुशवाहा, नरेंद्र अग्निहोत्री, राजा बाबू रैदास का कहना है कि मिर्च में फूल और फल बनना चालू हो गए थे। बारिश का पानी भरने से पौध की जड़े सड़ने और पौध सूखने लगी है।
देवमई ब्लाक के कृषि रक्षा इकाई प्रभारी संदीप कुमार ने बताया मिर्च की फसल में बारिश से बिल्स रोग लगा हुआ है। जिला उद्यान विभाग के मलवां ब्लाक प्रभारी शब्बीर हुसैन ने बताया मिर्च की जड़ों में उकथा रोग अधिक जलभराव व बारिश से लगा है।
बेमौसम बारिश से जिन किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं और उन्होंने फसल बीमा कराया है तो वह बीमा कंपनी कार्यालय व कृषि विभाग के कार्यालय में शिकायत दर्ज करा दें। बीमा कंपनी व कृषि विभाग की टीम से सर्वे कराया जाएगा। नुकसान के बाद क्लेम मिलेगा।
- राममिलन सिंह परिहार, उप कृषि निदेशक
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