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Fatehpur News: फाइलों में शहर ओडीएफ प्लस, हकीकत में अधबने शौचालय
Mon, 15 Jan 2024 12:56 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
Updated Mon, 15 Jan 2024 12:56 AM IST
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फतेहपुर। शहर अभिलेखों में ओडीएफ प्लस घोषित है, लेकिन असलियत सच से एकदम परे है। चार साल पहले अमृत योजना से घरों में बनाए गए शौचालय अधबने पड़े हैं। ऐसे परिवार अभी भी खुले में शौच जाने को मबूर हैं। इसके बाद नगर पालिका का यह तमगा मिल चुका है।
2018 में शहर का चयन अमृत योजना में हुआ था। इसके बाद शहर को खुले में शौच जाने मुक्त कराने की जिम्मेदारी मिली थी। नगर पालिका ने घरों में शौचालय बनवाने के लिए शहरवासियों से आवेदन मांगे थे। इनका सफाई विभाग ने सत्यापन कराया, जिसमें 53 सौ लाभार्थी पात्र पाए गए थे। इन सभी शौचालय निर्माण के लिए दो किश्तों में आठ हजार की धनराशि दी गई थी। कुछ लोगों ने शौचालयों का निर्माण पूर्ण कराया, लेकिन अभी तक बड़ी तादाद में शौचालय अधबने पड़े हैं। ऐसे में अगर शहर ओडीएफ प्लस बन चुका है, तो इन परिवारों के सदस्य आखिर शौच कहां जाते हैं।
सिविल लाइन निवासी पप्पी के शौचालय का सिर्फ सीवर टैंक बना है। इसमें आगे का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो पाया। लाभार्थी का कहना है कि दो किश्तों में आठ हजार की धनराशि मिली थी। इससे जितना बन पाया बनाया गया है। शेष निर्माण पैसों की व्यवस्था होने पर पूर्ण कराया जाएगा। बताया कि उसका परिवार बांदा सागर बाईपास के फुटपाथ में शौच को जाते हैं।
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सिविल लाइन निवासी कल्लू ने सीवर टैंक के साथ कुछ दीवारे में भी खड़ी कर ली हैं, लेकिन अभी तक शौचालय अपूर्ण है। सीट आदि की व्यवस्था न होने के कारण खुले में पूरा परिवार शौच के लिए जाता है। लाभार्थी ने बताया कि सीवर टैंक के लिए गड्ढा स्वयं खोदा था। ऐसे में इतना शौचालय बन पाया है। पैसे की व्यवस्था होने पर निर्माण पूरा कराएंगे।
नगर पालिका का चयन ओडीएफ प्लस में हो चुका है। यह निकाय की उपलिब्ध है। अगर किसी लाभार्थी का शौचालय अपूर्ण पाया जाता है, तो संबंधित के खिलाफ दी गई धनराशि की रिकवरी की जाएगी, क्योंकि निकाय ने शौचालय निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग किया था। शेष धनराशि लाभार्थी को अपने से लगाई जानी है। अवकाश बाद अपूर्ण शौचालय के लाभार्थी देखे जाएंगे।
समीर कुमार कश्यप, ईओ नगर पालिका
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2018 में शहर का चयन अमृत योजना में हुआ था। इसके बाद शहर को खुले में शौच जाने मुक्त कराने की जिम्मेदारी मिली थी। नगर पालिका ने घरों में शौचालय बनवाने के लिए शहरवासियों से आवेदन मांगे थे। इनका सफाई विभाग ने सत्यापन कराया, जिसमें 53 सौ लाभार्थी पात्र पाए गए थे। इन सभी शौचालय निर्माण के लिए दो किश्तों में आठ हजार की धनराशि दी गई थी। कुछ लोगों ने शौचालयों का निर्माण पूर्ण कराया, लेकिन अभी तक बड़ी तादाद में शौचालय अधबने पड़े हैं। ऐसे में अगर शहर ओडीएफ प्लस बन चुका है, तो इन परिवारों के सदस्य आखिर शौच कहां जाते हैं।
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सिविल लाइन निवासी पप्पी के शौचालय का सिर्फ सीवर टैंक बना है। इसमें आगे का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो पाया। लाभार्थी का कहना है कि दो किश्तों में आठ हजार की धनराशि मिली थी। इससे जितना बन पाया बनाया गया है। शेष निर्माण पैसों की व्यवस्था होने पर पूर्ण कराया जाएगा। बताया कि उसका परिवार बांदा सागर बाईपास के फुटपाथ में शौच को जाते हैं।
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सिविल लाइन निवासी कल्लू ने सीवर टैंक के साथ कुछ दीवारे में भी खड़ी कर ली हैं, लेकिन अभी तक शौचालय अपूर्ण है। सीट आदि की व्यवस्था न होने के कारण खुले में पूरा परिवार शौच के लिए जाता है। लाभार्थी ने बताया कि सीवर टैंक के लिए गड्ढा स्वयं खोदा था। ऐसे में इतना शौचालय बन पाया है। पैसे की व्यवस्था होने पर निर्माण पूरा कराएंगे।
नगर पालिका का चयन ओडीएफ प्लस में हो चुका है। यह निकाय की उपलिब्ध है। अगर किसी लाभार्थी का शौचालय अपूर्ण पाया जाता है, तो संबंधित के खिलाफ दी गई धनराशि की रिकवरी की जाएगी, क्योंकि निकाय ने शौचालय निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग किया था। शेष धनराशि लाभार्थी को अपने से लगाई जानी है। अवकाश बाद अपूर्ण शौचालय के लाभार्थी देखे जाएंगे।
समीर कुमार कश्यप, ईओ नगर पालिका
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