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बिंदकी बाईपास निर्माण में रेट का रोड़ा
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बिंदकी। पांच किलोमीटर लंबे बिंदकी बाईपास का डेढ़ सौ मीटर का हिस्सा अभी भी अधूरा है। सरकारी दर पर कुछ किसानों द्वारा जमीन देने को तैयार न होने के चलते यह लटका हुआ है। इसके चलते यहां अक्सर जाम की समस्या रहती है।
मुख्य व्यवसायिक एवं घनी आबादी वाले नगर के अंदर से मुगल रोड और बांदा सागर हाईवे निकले हुए हैं। यह नगर, कानपुर और बुंदेलखंड को सीधा जोड़ने का काम करता है। जिसमें प्रतिदिन ओवरलोड बड़े वाहनों का बड़ी संख्या में आवागमन होता है। वर्ष 2011 में बसपा शासनकाल में करीब 8 करोड़ रुपए की लागत से 5 किलोमीटर लंबाई का यह बाईपास बनना प्रारंभ हुआ था। इस बाईपास को 2012 निर्माण कार्य पूरा कराने का आदेश पीडब्ल्यूडी को दिया गया था।
कार्यदाई संस्था ने तेजी से काम भी किया लेकिन आखिर में रुकावट आ गई। 5 किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण कराने के लिए बिंदकी, कोहना, जाफराबाद, जनता के 300 से अधिक किसानों की भूमि का बैनामा कराया गया था। इसमें कुछ किसानों से सर्किल रेट पर सहमति न बन पाने के कारण रजिस्ट्री नहीं की। जिस कारण अब महज डेढ़ सौ मीटर की दूरी का निर्माण कार्य पूरा न हो पाने के कारण बाईपास में खर्च हो चुके 7 करोड़ रुपये पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
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बाईपास का थोड़ा सा काम बाकी होने के कारण यह अभी तक चालू नहीं हो सका है। जिस कारण पहले की तरह बड़े वाहनों का नगर के अंदर से आवागमन होता है। मंगलवार और शुक्रवार का दिन सबसे परेशान करने वाला होता है क्योंकि इस दिन यहां पर साप्ताहिक बाजार भी लगती हैं।
बाईपास का निर्माण अधूरा पड़ा होने की वजह से जाम की समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। हाईवे में वाहनों की रफ्तार लोगों पर भारी पड़ रही है। सड़क हादसे हो रहे हैं।
पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि कानपुर से भूमि के अधिग्रहण का कार्य चल रहा है। जिसके लिए कमेटी भी चयनित हो चुकी है। कमेटी के स्तर से सर्वे का काम भी किया जा रहा है। 15 दिनों में सर्वे पूरा होने के बाद रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। जहां से किसानों को दिए जाने वाले रेट की सहमति बनेगी। जिसके बाद बाईपास का निर्माण पूरा कराया जाएगा।
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मुख्य व्यवसायिक एवं घनी आबादी वाले नगर के अंदर से मुगल रोड और बांदा सागर हाईवे निकले हुए हैं। यह नगर, कानपुर और बुंदेलखंड को सीधा जोड़ने का काम करता है। जिसमें प्रतिदिन ओवरलोड बड़े वाहनों का बड़ी संख्या में आवागमन होता है। वर्ष 2011 में बसपा शासनकाल में करीब 8 करोड़ रुपए की लागत से 5 किलोमीटर लंबाई का यह बाईपास बनना प्रारंभ हुआ था। इस बाईपास को 2012 निर्माण कार्य पूरा कराने का आदेश पीडब्ल्यूडी को दिया गया था।
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कार्यदाई संस्था ने तेजी से काम भी किया लेकिन आखिर में रुकावट आ गई। 5 किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण कराने के लिए बिंदकी, कोहना, जाफराबाद, जनता के 300 से अधिक किसानों की भूमि का बैनामा कराया गया था। इसमें कुछ किसानों से सर्किल रेट पर सहमति न बन पाने के कारण रजिस्ट्री नहीं की। जिस कारण अब महज डेढ़ सौ मीटर की दूरी का निर्माण कार्य पूरा न हो पाने के कारण बाईपास में खर्च हो चुके 7 करोड़ रुपये पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
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बाईपास का थोड़ा सा काम बाकी होने के कारण यह अभी तक चालू नहीं हो सका है। जिस कारण पहले की तरह बड़े वाहनों का नगर के अंदर से आवागमन होता है। मंगलवार और शुक्रवार का दिन सबसे परेशान करने वाला होता है क्योंकि इस दिन यहां पर साप्ताहिक बाजार भी लगती हैं।
बाईपास का निर्माण अधूरा पड़ा होने की वजह से जाम की समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। हाईवे में वाहनों की रफ्तार लोगों पर भारी पड़ रही है। सड़क हादसे हो रहे हैं।
पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि कानपुर से भूमि के अधिग्रहण का कार्य चल रहा है। जिसके लिए कमेटी भी चयनित हो चुकी है। कमेटी के स्तर से सर्वे का काम भी किया जा रहा है। 15 दिनों में सर्वे पूरा होने के बाद रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। जहां से किसानों को दिए जाने वाले रेट की सहमति बनेगी। जिसके बाद बाईपास का निर्माण पूरा कराया जाएगा।