{"_id":"5eee5e298ebc3e42f57da3a9","slug":"bemausam-baarish-se-piparament-kee-phasal-chaupat-fatehpur-news-knp566675596","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेमौसम बारिश से पिपरमेंट की फसल चौपट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेमौसम बारिश से पिपरमेंट की फसल चौपट
विज्ञापन
खेत में खड़ी मेंथा( पिपरमेंट) की फसल।
- फोटो : FATEHPUR
धाता (फतेहपुर)। धाता और विजयीपुर ब्लाक के साथ कौशांबी के सीमावर्ती इलाकों में पांच सौ एकड़ रकबे में पिपरमेंट की खेती होती है। इस फसल से होने वाली आय से किसान सालाना बजट तय करते हैं। बार-बार बारिश और पछुआ हवा ने पिपरमेंट की फसल को चौपट कर दिया है। किसानों की लागत तक नहीं निकल रही है। ऐसे में किसान परेशान हैं।
धाता ब्लाक इलाके में 200, विजयीपुर ब्लाक में 125 और धाता कस्बे की सीमा से जुड़े कौशांबी जिले में 150 एकड़ में किसान पिपरमेंट की फसल तैयार करते हैं। फसल गर्मी के मौसम में होती है। यह 90 दिन के भीतर तैयार हो जाती है। पिछले साल प्रति एकड़ 60 से 75 लीटर तेल मिला था। इससे किसानों को अच्छा मुनाफा हुआ था। इस साल बार-बार की बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। पिपरमेंट की फसल से मेंथा ऑयल तैयार किया जाता है। किसान बाराबंकी जिले में उपज बेचते हैं। इस बार 15 लीटर प्रति एकड़ ऑयल मिल रहा है। ऐसे में किसानों की लागत भी सीधी नहीं हो रही।
प्रति एकड़ इतनी आती है लागत
प्रति एकड़ तीन हजार रुपये जुताई, छह बार फसल सिंचाई में 1800 रुपये खर्च आता है। निराई, गुड़ाई में 2000, खाद, दवा में 2000, पिराई व अन्य खर्चों में 3000 रुपये खर्चे होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
धाता ब्लाक इलाके में 200, विजयीपुर ब्लाक में 125 और धाता कस्बे की सीमा से जुड़े कौशांबी जिले में 150 एकड़ में किसान पिपरमेंट की फसल तैयार करते हैं। फसल गर्मी के मौसम में होती है। यह 90 दिन के भीतर तैयार हो जाती है। पिछले साल प्रति एकड़ 60 से 75 लीटर तेल मिला था। इससे किसानों को अच्छा मुनाफा हुआ था। इस साल बार-बार की बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। पिपरमेंट की फसल से मेंथा ऑयल तैयार किया जाता है। किसान बाराबंकी जिले में उपज बेचते हैं। इस बार 15 लीटर प्रति एकड़ ऑयल मिल रहा है। ऐसे में किसानों की लागत भी सीधी नहीं हो रही।
विज्ञापन
प्रति एकड़ इतनी आती है लागत
प्रति एकड़ तीन हजार रुपये जुताई, छह बार फसल सिंचाई में 1800 रुपये खर्च आता है। निराई, गुड़ाई में 2000, खाद, दवा में 2000, पिराई व अन्य खर्चों में 3000 रुपये खर्चे होते हैं।
विज्ञापन