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ठंड़ बढ़ते ही शहर में घुसे अन्ना मवेशियों के झुंड
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एसपी निवास के बगल में कूड़े के ढेर में अन्ना मवेशी
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। ठंड बढ़ते ही ग्रामीण क्षेत्र के अन्ना मवेशियों के झुंड शहर में घुस आए हैं। ऐसे में अब शहर में अन्ना मवेशियों की बाढ़ आ गई है। सड़क के फुटपाथों पर बने कूड़ा डंपिंग सेंटरों में अन्ना मवेशियों ने बसेरा बना लिया है। मुख्य सड़कों पर कूड़ा के ढेर के आसपास बड़ी तादाद में मौजूद मवेशी कोहरे की धुंध में दुर्घटनाओं के कारण बन सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में ठंड का अधिक असर होने के कारण मवेशियों के झुंड आबादी में प्रवेश कर जाते हैं। शहर के आसपास खेतों में रहने वाले अन्ना मवेशी शहर में घुस चुके हैं। इनमें बड़ी तादाद में कान में टैग लगे मवेशी हैं। इससे साफ है कि गोशालाओं के मवेशी भी ठंड से बचाने के लिए छोड़ दिए गए हैं। सुबह और शाम कूड़ा डंपिंग सेंटर आईटीआई रोड, पत्थरकटा चौराहा, एसपी आवास, पीलू तले, मिशन अस्पताल समेत शहर के 54 कूड़ा डंपिंग सेंटर मवेशियों के बसेरा बन गए हैं।
खास बात तो यह शहर में ज्यादातर कूड़ा डंपिंग सेंटर मुख्य सड़कों पर हैं, जहां से 24 घंटे आवागमन रहता है। अंधेरे में मवेशी पूरी सड़क पर बैठ जाते हैं, जिससे कोहरे की धुंध में थोड़ी सी चूक होने पर दुर्घटना हो सकती है। इसके बावजूद अभी तक नगर पालिका अन्ना मवेशियों को शहर से बाहर निकालने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है।
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ईओ नगर पालिका मीरा सिंह का कहना है कि नगर पालिका की गोशाला बनकर तैयार होने वाली है। नए साल में गोशाला लगभग चालू होना तय है। गोशाला चालू होने के बाद शहरियों को अन्ना मवेशियों से छुटकारा मिल जाएगा।
मनोज गुप्ता का कहना है कि सप्ताहभर से शहर में अन्ना मवेशियों की बाढ़ आ गई है। हर कूड़ाघर में बड़ी तादाद में रात के समय अन्ना मवेशी बसेरा बनाए रहते हैं। पूरी सड़क पर बैठे मवेशी कोहरे की धुंध में दिखाई नहीं पड़ते हैं। ऐसे में दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। शोएब कहते हैं कि शहर के हर गली में घूमते अन्ना मवेशियों से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दरवाजे पर खड़े वाहनों को आपस में लड़ते मवेशी तोड़ देते हैं। इतना ही नहीं दरवाजा खुला होने पर मवेशी अंदर घुसकर गंदगी फैला देते हैं।
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ग्रामीण क्षेत्र में ठंड का अधिक असर होने के कारण मवेशियों के झुंड आबादी में प्रवेश कर जाते हैं। शहर के आसपास खेतों में रहने वाले अन्ना मवेशी शहर में घुस चुके हैं। इनमें बड़ी तादाद में कान में टैग लगे मवेशी हैं। इससे साफ है कि गोशालाओं के मवेशी भी ठंड से बचाने के लिए छोड़ दिए गए हैं। सुबह और शाम कूड़ा डंपिंग सेंटर आईटीआई रोड, पत्थरकटा चौराहा, एसपी आवास, पीलू तले, मिशन अस्पताल समेत शहर के 54 कूड़ा डंपिंग सेंटर मवेशियों के बसेरा बन गए हैं।
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खास बात तो यह शहर में ज्यादातर कूड़ा डंपिंग सेंटर मुख्य सड़कों पर हैं, जहां से 24 घंटे आवागमन रहता है। अंधेरे में मवेशी पूरी सड़क पर बैठ जाते हैं, जिससे कोहरे की धुंध में थोड़ी सी चूक होने पर दुर्घटना हो सकती है। इसके बावजूद अभी तक नगर पालिका अन्ना मवेशियों को शहर से बाहर निकालने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है।
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ईओ नगर पालिका मीरा सिंह का कहना है कि नगर पालिका की गोशाला बनकर तैयार होने वाली है। नए साल में गोशाला लगभग चालू होना तय है। गोशाला चालू होने के बाद शहरियों को अन्ना मवेशियों से छुटकारा मिल जाएगा।
मनोज गुप्ता का कहना है कि सप्ताहभर से शहर में अन्ना मवेशियों की बाढ़ आ गई है। हर कूड़ाघर में बड़ी तादाद में रात के समय अन्ना मवेशी बसेरा बनाए रहते हैं। पूरी सड़क पर बैठे मवेशी कोहरे की धुंध में दिखाई नहीं पड़ते हैं। ऐसे में दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। शोएब कहते हैं कि शहर के हर गली में घूमते अन्ना मवेशियों से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दरवाजे पर खड़े वाहनों को आपस में लड़ते मवेशी तोड़ देते हैं। इतना ही नहीं दरवाजा खुला होने पर मवेशी अंदर घुसकर गंदगी फैला देते हैं।