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बदला जाए दशकों पुराना एक्ट
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर।
Updated Tue, 01 Mar 2016 01:06 AM IST
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दवा कारोबारियों ने सरकारी नीतियों के खिलाफ रविवार को दहाड़ भरी। मौजूदा सरकारी क्रियाकलापों को कारोबार के लिए घातक करार देते हुए नौ दशक पुराने फार्मेसी एक्ट में बदलाव की मांग की।
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आरोप लगाया कि लाइसेंस नवीनीकरण फीस में बेतहाशा बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है। फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता समेत ऑनलाइन दवाओं की बिक्री कराने की कोशिशें चल रही हैं। इससे दवा कारोबारी दो राहे पर आ जाएंगे।
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यह बात केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले कलेक्ट्रेट में विरोध प्रदर्शन के दौरान कही गईं। अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि सरकार ने रिनुअल लाइसेंस फीस तीन हजार से बढ़ाकर 30 हजार करने का फैसला लिया है।
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छोटे-छोटे कस्बाें में दवा की बिक्री करने वाला कारोबारी इस फीस को अदा करने में सक्षम नहीं है। सरकार ने फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता कर दी है, जबकि सूबे में फार्मेसिस्टों की खासी कमी है। ऐसे में हर मेडिकल स्टोर में फार्मेसिस्ट बैठाना संभव नहीं है।
महासचिव सुनीत सिंह डब्बू ने ऑनलाइन दवा की बिक्री की चल रही कोशिशों पर सवाल खड़े करते हुए इसे कारोबार के लिए घातक करार दिया। विरोध दर्ज कराने के बाद एसोसिएशन ने पीएम व सीएम के नाम संबोधित ज्ञापन डीएम राजीव रौतेला को सौंपा।
प्रतिनिधि मंडल में धीरेंद्र सिंह, पवन गुप्ता, सुमित रस्तोगी, अमर सिंह, दिनेश अग्रहरि, नावेद अहमद, प्रकाश मौर्या, योगेंद्र यादव, केके सिंह, राजा सिंह, पंकज मिश्रा, रवि पांडेय, विनोद साहू आदि मौजूद रहे।