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ाइड स्टोरी: इमारत संग अतहर के परिवार का आतंक भी जमींदोज

Fri, 17 Mar 2023 01:12 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर Updated Fri, 17 Mar 2023 01:12 AM IST
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Along with the building, the terror of Athar's family also razed to the ground
रक्षपालपुर(फतेहपुर)। खागा से लेकर यमुना कटरी तक 1965 से 1998 के बीच अपराध के बल पर अतहर परिवार के कायम वर्चस्व की साख तिमंजिला इमारत ढहने के साथ ही खत्म हो गई। आपराधिक नजरिए से लोग अतहर को लंगड़ नाम से जानते थे। भले ही तीन माह पहले अतहर का देहांत हो गया था, लेकिन उसके बड़े बेटे हिस्ट्रीशीटर मो. अहमद की क्रूरता के चलते वर्चस्व में सेंध नहीं लगी थी। सरकार के बुलडोजर ने इलाके से परिवार को नेस्तानाबूत कर दिया है।
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खखरेरू, धाता, किशनपुर, खागा, असोथर थाना क्षेत्रों समेत जिले के कई इलाकों में अतहर परिवार का खौफ था। राजनीतिक पकड़ भी क्षेत्र में परिवार ने बना रखी थी। सबसे अधिक फायदा बसपा सरकार में परिवार को मिला। सजातीय और दूसरी जातियों के लोग भी अतहर को चच्चा कहकर बुलाते थे। अतहर की वजह से बेटा अहमद ओहदेदार है। अतहर के खिलाफ 30 मुकदमे दर्ज हैं।
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क्षेत्र में अतहर ने कई दिग्गजों के सामने 1965 में मोर्चा खोला था। बताया जाता है कि रंजिश के चलते गांव में बढ़ती गुंडागर्दी पर ही अतहर का एक पैर 1965 से 1970 के बीच काट दिया गया था। तभी से अतहर लंगड़ के रूप में जाना गया। खखरेरू के लोहारपुर के पास 1975 दोहरा हत्याकांड हुआ। उस घटना में यूनिवर्सिटी संचालक दयालशरण के भाइयों की हत्या में अतहर गैंग सामने आया।
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इसके बाद अतहर एंड कंपनी ने 1979 में घरवासीपुर बाजार अपने गांव ले गया, वहां से वसूली का काम चालू किया। बाजार के विरोध में लगातार पांच घंटे गोलियां चली थी। यमुना कटरी में सक्रिय शंकर केवट का भी अतहर को साथ मिला। गैंग पर अढ़ैया गांव के पूर्व प्रधान और कांग्रेस नेता रियाज के बेटे की 1993 में हत्या का आरोप लगा।
अतहर की दहशत और आतंक क्षेत्र में व्याप्त हो गया। अढ़ैया गांव के घर में घुसकर 1997 कमरूल जमां की हत्या का आरोप लगा। इसी कांड में शंकर केवट, शकील, अतहर, अकील, मट्टू को जिला कोर्ट से 2005 में आजीवन कारावास हुई थी। अभी भी शकील रायबरेली जेल में बंद है।
नैनी जेल में मिला था अतहर को अतीक का साथ
हत्या मामले में सजायाफ्ता अतहर को नैनी जेल में अतीक का साथ मिला था। चर्चा में यह बात भी सामने आई कि अतीक ने अपने पैरोकार और वकील अतहर के लिए खड़े कराए थे। हाईकोर्ट इलाहाबाद में जबरदस्त पैरवी के बाद करीब सात साल पहले अतहर आजीवन कारावास से रिहा हुआ था।
बसपा सरकार में पता छिपाकर बनवाए लाइसेंसों पर मुकदमा
फतेहपुर। गांव रहमतपुर का एक सेवानिवृत्त पुलिस कर्मी अतहर का करीबी है। उसकी सलाह के आधार पर पते छिपाकर परिवार में शस्त्र लाइसेंस जारी कराए थे। बसपा सरकार में 2003 में खेलदार मोहल्ले के पते से अतहर गैंग में अढ़ैया गांव के शकील की राइफल, कबरा निवासी नजीम की दोनाली बंदूक, बेटे मोहम्मद अहमद और जर्रार के नाम पर राइफल, अतीक को राइफल के लाइसेंस हुए थे। उमेश पाल हत्याकांड के बाद छानबीन में इसका खुलासा हुआ। खखरेरू पुलिस ने मो. अहमद समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। अतहर परिवार के पास अकूत संपत्ति है। इनका शहर की घनी आबादी के बीच एक पुराना मकान है। इसके अलावा प्रतापगढ़ के चुन्नीगंज में मकान और मैरिज हाल है। बताया जाता है कि एक हत्या के बाद अतहर के परिवार के ब्राह्मणों की सैकड़ों बीघा जमीन पर कब्जा कर लिया था।
साढ़े सात घंटे में खत्म हो सकी तोड़फोड़
पुलिस प्रशासन ने सुबह गांव को सील कर दिया था। किसी को बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी थी। गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। तोड़फोड़ का काम सुबह 11 बजे शुरू हुआ। इसके बाद शाम करीब साढ़े छह बजे खत्म हो सका। पांच जेसीबी, एक हाइड्रा मशीन लगी। एक जेसीबी मशीन पर मलबा भी गिरा। हालांकि चालक बाल-बाल बचा। इसके अलावा दो फायर ब्रिगेड, गोताखोर, चार एंबुलेंस मौजूद रहीं। पुलिस कर्मी बॉडी प्रोटेक्टर के साथ लैस रहे। बता दें कि पहले भी अतहर का घर ढहाया जा चुका है। अढ़ैया प्रधान और कांग्रेस नेता रियाज के बेटे की हत्या के बाद प्रशासन चौकन्ना हुआ था। प्रदेश सरकार ने मामले को संज्ञान में लिया था। अतहर की आतंक और दहशत को कम करने के लिए तत्कालीन अधिकारियों के सामने चुनौती बना था। इस दहशत को मिटाने के लिए प्रशासन की मूक सहमति पर अतहर का घर ढहाया गया था। इस तरह से माना जाए तो दोबारा घर गिरा है।

अहमद और उसके भाइयों का भी आपराधिक इतिहास
हत्या में सरेंडर करने वाले अहमद पर पहला मुकदमा खखरेरू में 1996 में डकैती, हत्या, छेड़खानी, एससी-एसटी का दर्ज हुआ था। खखरेरू थाने में 2004 में हत्या, खखरेरू थाने में 2005 में गैंगस्टर, किशनपुर थाने में 2005 में बलवा, हत्या, एससी-एसटी एक्ट, खखरेरू थाना क्षेत्र में 2005 में हुई हत्या को कोर्ट ने संज्ञान में लेकर आरोपी बनाया। 2006 में धाता थाने में बलवा, हत्या, फिरौती, हत्या के प्रयास का मुकदमा, प्रतापगढ़ जिले के मानिकपुर थाने में 2021 में दहेज प्रताड़ना, शस्त्र लाइसेंस धोखाधड़ी का मार्च 2023 का दर्ज हुआ। दूसरे भाई जर्रार के खिलाफ खखरेरू में 1996 में चोरी, 1996 में डकैती एससी-एसटी एक्ट, खखरेरू थाने में 1996 में हत्या व बलवा, 2021 में प्रतापगढ़ मानिकपुर में दहेज प्रताड़ना, मार्च 2023 में धोखाधड़ी से शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करने का मुकदमा दर्ज हुआ। तीसरे भाई अलमदार को खखेररू की 2005 में हत्या में कोर्ट ने स्वयं अभियुक्त माना। 2021 में प्रतापगढ़ के मानिकपुर थाना में दहेज प्रताड़ना का मुकदमा दर्ज है।
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