फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Fatehpur News ›   Abunagar: Life is not getting back on track

आबूनगर : पटरी पर नहीं लौट पा रही जिंदगी

Wed, 20 Aug 2025 02:08 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर Updated Wed, 20 Aug 2025 02:08 AM IST
विज्ञापन
Abunagar: Life is not getting back on track
फोटो-21-बच्चों को स्कूल से लेकर लौटते क्षेत्र निवासी बबलू। संवाद
फतेहपुर। आबूनगर स्थित धार्मिक स्थल के विवाद के बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनका मंदिर और मकबरे से कोई सरोकार नहीं है। इसके बाद भी पिछले नौ दिनों से उनकी जिंदगी बेपटरी सी हो गई है। रोजमर्रा का जीवन अस्त व्यस्त है। वहीं, सुबह-शाम की दहशत अलग से दिमाग में बसी है।
विज्ञापन

यह आबूनगर के वे आम लोग हैं, जिनकी जिंदगी की परेशानियां नौ दिनों में और भी बढ़ी है। इन लोगों में महिलाओं से लेकर बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं, जो कि 11 अगस्त से पहले तक इतने परेशान न थे, जितने आज हैं।
विज्ञापन

इन लोगों का कहना है कि दिन-रात पुलिस वालों की चहलकदमी, उनकी गाड़ियों के हूटर का शोर डराया करता है कि पता नहीं कब क्या हो जाए। इलाकाई लोगों का कहना है न जाने कहां के लोग 11 अगस्त को भीड़ की शक्ल में आए और क्षेत्र का सुकून छीन ले गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

आबूनगर में दोनों समुदाय के लोग रहते हैं लेकिन कभी उनका धार्मिक स्थल तो दूर किसी आपसी बात को लेकर भी विवाद नहीं हुआ। आज स्थिति यह है कि हर कोई एक-दूसरे को संदेह की निगाह से देख रहा है। उस पर पुलिस के पहरे ने और परेशानियां बढ़ा दी है।
बच्चियों को स्कूल से लाने की जिम्मेदारी बढ़ी
क्षेत्र के रहने वाले बबलू ने बताया कि बताया कि उनकी दो बेटियां शहर के एक कान्वेंट स्कूल में पढ़ती हैं। जब से यहां बवाल हुआ है तब से आबूनगर की गलियों के बाहर बैरिकेडिंग कर दी गई है। ऐसे में स्कूली वाहन भीतर नहीं आ पाते हैं। छोटी-छोटी बच्चियां हैं इसलिए अब उन्हें दोनों को स्कूल से लाना और छोड़ने जाना पड़ता है। बता दें कि 11 अगस्त के बाद से आबूनगर की चार-पांच गलियों में पुलिस ने बैरिकेडिंग लगा दी है। आने-जाने वालों से पूछताछ व बड़े वाहनों को वहीं रोका जा रहा है।
महिलाओं के रिक्शे भी नहीं जाने देते हैं
क्षेत्र निवासी सबीना ने बताया कि वह मंगलवार दोपहर बाजार से खरीदारी कर ई-रिक्शे से लौटीं तो गली के बाहर बैठे पुलिस वालों ने बैरिकेडिंग नहीं हटाई। इस कारण उन्हें राशन का भारी-भरकम थैला लेकर 500 मीटर दूर स्थित घर तक पैदल आना पड़ा। इसी तरह सुशीला भी अपनी ननद के साथ सामान का झोला लेकर धूप में पसीना बहाते हुए घर जाती दिखाई दीं।

दरवाजे पर बैठना और बच्चों का खेलना हुआ बंद
बस्ती निवासी बुजुर्ग सुशील कुमार ने बताया कि 11 अगस्त के पहले शाम के वक्त वह घर के गेट पर कुर्सी डालकर बैठते थे तो पास-पड़ोस के तीन-चार लोग और आ जाते थे। सुख-दुख व हंसी मजाक के बीच कब रात के आठ बज जाते थे, पता ही नहीं चलता था। अब तो पुलिस की आवाजाही और टोका-टाकी के कारण सब ऐसे बंद हुआ कि लगता ही नहीं मोहल्ले का चैन कभी लौटेगा। इसी तरह घरों के बाहर बच्चे शाम को खेला करते थे, तनाव के चलते उनका बचपन भी घरों में कैद होकर रह गया है।


पशुओं का चारा मिलना भी मुश्किल हो रहा
बस्ती में कुछ महिलाओं ने जीवन-यापन के लिए पशु भी पाल रखे हैं। इन महिलाओं का कहना है कि 11 अगस्त के पहले उक्त धार्मिक स्थल के पीछे स्थित खेतों में जाकर पशुओं को ले जाकर छोड़ देते थे तो वे अपने खाने का इंतजाम कर लेते थे। शुरू में तो चार-पांच दिन पुलिस ने खेतों की ओर जानवरों को बिल्कुल नहीं जाने दिया। अब मिन्नतें करने पर थोड़ी बहुत छूट दी है। फिर भी बाजार से चारा खरीदकर जानवरों को देना पड़ रहा है।

फोटो-21-बच्चों को स्कूल से लेकर लौटते क्षेत्र निवासी बबलू। संवाद

फोटो-21-बच्चों को स्कूल से लेकर लौटते क्षेत्र निवासी बबलू। संवाद

फोटो-21-बच्चों को स्कूल से लेकर लौटते क्षेत्र निवासी बबलू। संवाद

फोटो-21-बच्चों को स्कूल से लेकर लौटते क्षेत्र निवासी बबलू। संवाद

फोटो-21-बच्चों को स्कूल से लेकर लौटते क्षेत्र निवासी बबलू। संवाद

फोटो-21-बच्चों को स्कूल से लेकर लौटते क्षेत्र निवासी बबलू। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed