{"_id":"6a6648c61da6c64f0c0c62f9","slug":"a-treasure-trove-of-knowledge-to-open-up-through-play-85000-children-will-learn-math-and-english-fatehpur-news-c-217-1-bnd1018-159280-2026-07-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehpur News: खेल से खुलेगा ज्ञान का पिटारा, 85 हजार बच्चे सीखेंगे गणित-अंग्रेजी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehpur News: खेल से खुलेगा ज्ञान का पिटारा, 85 हजार बच्चे सीखेंगे गणित-अंग्रेजी
विज्ञापन
फतेहपुर। जिले के परिषदीय प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब 85 हजार बच्चों को अब खेल-खेल में पढ़ाई कराई जाएगी। कक्षा तीन से पांच तक के विद्यार्थियों की बुनियादी सीखने की क्षमता विकसित करने के लिए चयनित विद्यालयों में शिक्षा विभाग की ओर से ज्ञान का पिटारा कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसमें गतिविधि आधारित शिक्षण पर विशेष जोर रहेगा।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि कार्यक्रम के तहत बच्चों को भाषा, गणित और अंग्रेजी की पढ़ाई रोचक गतिविधियों, खेलों और शिक्षण सामग्री के माध्यम से कराई जाएगी। इससे उनकी सीखने की क्षमता, समझ और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। साथ ही नामांकन, नियमित उपस्थिति और विद्यालय में ठहराव बढ़ाने का भी प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय प्रबंधन समितियों (एसएमसी) को अधिक सक्रिय बनाया जाएगा। शिक्षकों को गतिविधि आधारित शिक्षण, समावेशी शिक्षा और नई शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए करियर जागरूकता गतिविधियां आयोजित होंगी। वहीं पढ़ाई में कमजोर बच्चों के लिए विशेष रिमेडियल कक्षाएं संचालित की जाएंगी। ताकि कोई भी छात्र सीखने में पीछे न रहे। बीएसए प्रिंसी मौर्या ने बताया कि इस पहल से परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी और बच्चों का पढ़ाई के प्रति रुझान बढ़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि कार्यक्रम के तहत बच्चों को भाषा, गणित और अंग्रेजी की पढ़ाई रोचक गतिविधियों, खेलों और शिक्षण सामग्री के माध्यम से कराई जाएगी। इससे उनकी सीखने की क्षमता, समझ और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। साथ ही नामांकन, नियमित उपस्थिति और विद्यालय में ठहराव बढ़ाने का भी प्रयास किया जाएगा।
विज्ञापन
कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय प्रबंधन समितियों (एसएमसी) को अधिक सक्रिय बनाया जाएगा। शिक्षकों को गतिविधि आधारित शिक्षण, समावेशी शिक्षा और नई शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए करियर जागरूकता गतिविधियां आयोजित होंगी। वहीं पढ़ाई में कमजोर बच्चों के लिए विशेष रिमेडियल कक्षाएं संचालित की जाएंगी। ताकि कोई भी छात्र सीखने में पीछे न रहे। बीएसए प्रिंसी मौर्या ने बताया कि इस पहल से परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी और बच्चों का पढ़ाई के प्रति रुझान बढ़ेगा।
विज्ञापन