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मनरेगा बढ़ाएगी मानिकपुर झील की जिंदगी
Fatehpur
Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
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चौडगरा (फतेहपुर)। मानिकपुर जंगल की आकर्षक झील को संवार कर उसकी जिंदगी बढ़ाने में मनरेगा सशक्त माध्यम बनेगी। वन विभाग अपनी महत्वाकांक्षी योजना पर इस साल भी 12 लाख रुपए खर्च करेगा।
योजना के अंतर्गत वन विभाग एक किलोमीटर लंबी झील को डेढ़ किलोमीटर बड़ी करेगा। योजना के पूरी होने पर न सिर्फ इलाकाई पशुओं और वन्य जंतुओं वरन, प्रवासी पक्षियों के पीने के पानी की किल्लत की समस्या का समाधान हो जाएगा।
जिले का सबसे बड़ा मानिकपुर जंगल है। इस घने जंगल की लंबाई चार किलोमीटर है। यह जंगल शासन से आरक्षित है। इसमें शीशम, देशी बबूल, विदेशी बबूल, बेर, यूकेलिप्टस, चिलवर और कत्था बनाने के काम मेें आने वाली खैर के बेशकीमती पेड़ लगे हुए है। जंगल में लकड़बग्घा, सियार, लोमड़ी और नीलगाय प्रमुखता से पाई जाती हैं। मानिकपुर जंगल गंगा से पांच किलोमीटर दूर है। इसका दायरा शिवराजपुर से कालीकुंडी तक फैला हुआ है। पिछले साल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण योजना के अंतर्गत जंगल में एक किलोमीटर लंबी झील का निर्माण कार्य कराया गया था। मकसद रहा झील और वन्य जीव संरक्षण, पक्षियों के लिए आवास स्थल का विकास, पशु पक्षियों के पीने के पानी की व्यवस्था करना। झील के निर्माण पर बारह लाख रुपया खर्च हुए थे। वन विभाग इस साल भी 12 लाख रुपए खर्च करके मानिकपुर झील को 600 मीटर और लंबी करेगा।
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मानिकपुर जंगल पहुंचे बिंदकी रेंजर एसएन मौर्या ने बताया पिछला साल की ही तरह इस बार भी मानिकपुर जंगल के विकास के लिए 12 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं। गुरुवार से झील के पुनरुद्धार का काम शुरू करा दिया जाएगा। उन्होंने कहा पिछली साल हुई झील की खुदाई से जंगली जानवर, पालतू जानवर और पक्षियों को काफी राहत मिली। झील का आकार बढ़ जाने के बाद इसका लाभ और उठाया जा सकेगा। रेंजर ने कहा वन विभाग मानिक पुर जंगल के संरक्षण और विकास के प्रयास में लगा है। यही मायने में यह विभाग की धरोहर है।
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योजना के अंतर्गत वन विभाग एक किलोमीटर लंबी झील को डेढ़ किलोमीटर बड़ी करेगा। योजना के पूरी होने पर न सिर्फ इलाकाई पशुओं और वन्य जंतुओं वरन, प्रवासी पक्षियों के पीने के पानी की किल्लत की समस्या का समाधान हो जाएगा।
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जिले का सबसे बड़ा मानिकपुर जंगल है। इस घने जंगल की लंबाई चार किलोमीटर है। यह जंगल शासन से आरक्षित है। इसमें शीशम, देशी बबूल, विदेशी बबूल, बेर, यूकेलिप्टस, चिलवर और कत्था बनाने के काम मेें आने वाली खैर के बेशकीमती पेड़ लगे हुए है। जंगल में लकड़बग्घा, सियार, लोमड़ी और नीलगाय प्रमुखता से पाई जाती हैं। मानिकपुर जंगल गंगा से पांच किलोमीटर दूर है। इसका दायरा शिवराजपुर से कालीकुंडी तक फैला हुआ है। पिछले साल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण योजना के अंतर्गत जंगल में एक किलोमीटर लंबी झील का निर्माण कार्य कराया गया था। मकसद रहा झील और वन्य जीव संरक्षण, पक्षियों के लिए आवास स्थल का विकास, पशु पक्षियों के पीने के पानी की व्यवस्था करना। झील के निर्माण पर बारह लाख रुपया खर्च हुए थे। वन विभाग इस साल भी 12 लाख रुपए खर्च करके मानिकपुर झील को 600 मीटर और लंबी करेगा।
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मानिकपुर जंगल पहुंचे बिंदकी रेंजर एसएन मौर्या ने बताया पिछला साल की ही तरह इस बार भी मानिकपुर जंगल के विकास के लिए 12 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं। गुरुवार से झील के पुनरुद्धार का काम शुरू करा दिया जाएगा। उन्होंने कहा पिछली साल हुई झील की खुदाई से जंगली जानवर, पालतू जानवर और पक्षियों को काफी राहत मिली। झील का आकार बढ़ जाने के बाद इसका लाभ और उठाया जा सकेगा। रेंजर ने कहा वन विभाग मानिक पुर जंगल के संरक्षण और विकास के प्रयास में लगा है। यही मायने में यह विभाग की धरोहर है।